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SEBI के कर्मचारियों पर सख्त हुई निगरानी, शेयर बाजार में निवेश और नौकरी बदलने के नियमों में बड़ा बदलाव

सेबी ने अपने कर्मचारियों के लिए आचार संहिता और निवेश नियमों को किया सख्त. नौकरी बदलने, शेयर बाजार में निवेश और गिफ्ट लेने पर अब होगी कड़ी निगरानी. जानें क्या है नया 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' और कर्मचारियों के लिए जारी हुए सभी नए नियम...

SEBI के कर्मचारियों पर सख्त हुई निगरानी, शेयर बाजार में निवेश और नौकरी बदलने के नियमों में बड़ा बदलाव
SEBI New Rules 2026: सेबी ने इस्तीफा देने या रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए दो साल की अनिवार्य 'कूलिंग-ऑफ' अवधि तय की है.

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपने कर्मचारियों के लिए आचार संहिता और सेवा नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया है. नियामक ने 'सेबी (कर्मचारी सेवा) (संशोधन) विनियम, 2026' को अधिसूचित करते हुए हितों के टकराव को रोकने, निवेश की पारदर्शिता बढ़ाने और नौकरी छोड़ने के बाद की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किए हैं.

'परिवार' और 'आश्रित' की परिभाषा का विस्तार

नए नियमों के तहत सेबी ने 'परिवार' और 'आश्रित' के दायरे को और व्यापक कर दिया है. अब इसमें गोद लिए गए बच्चों, सौतेले बच्चों और उन सभी व्यक्तियों को शामिल किया गया है जो आर्थिक रूप से कर्मचारी पर निर्भर हैं. इस विस्तार के साथ ही निवेश और डिस्क्लोजर से जुड़े नियमों का दायरा भी बढ़ गया है.

इस्तीफे के बाद दो साल का 'कूलिंग-ऑफ पीरियड'

सेबी ने इस्तीफा देने या रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए दो साल की अनिवार्य 'कूलिंग-ऑफ' अवधि तय की है. इस दौरान पूर्व कर्मचारी किसी भी व्यक्ति या संस्था की ओर से सेबी के समक्ष किसी भी मामले में पैरवी नहीं कर सकेंगे. यह प्रतिबंध जांच, सुनवाई, सेटलमेंट और मंजूरी जैसे संवेदनशील मामलों पर लागू होगा. साथ ही, यदि कोई कर्मचारी नई नौकरी के लिए बातचीत शुरू करता है, तो उसे एक महीने के भीतर इसकी सूचना सेबी को देना अनिवार्य होगा.

शेयर बाजार में निवेश पर सख्त प्रतिबंध

सेबी ने अपने कर्मचारियों के निजी निवेश नियमों को काफी सख्त कर दिया है. अब कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य अपने कार्यकाल के दौरान शेयर, इक्विटी में परिवर्तनीय प्रतिभूतियों और डेरिवेटिव्स में कोई भी नया निवेश नहीं कर सकेंगे. हालांकि, म्यूचुअल फंड और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट्स) जैसे विनियमित साधनों में निवेश की अनुमति जारी रहेगी, लेकिन इनका हिस्सा कुल पोर्टफोलियो के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए. जीवनसाथी को मिलने वाले ईएसओपी (ESOP) और विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं को इसमें कुछ छूट दी गई है.

उपहार लेने के नियमों में बदलाव

उपहारों के संदर्भ में नियमों को थोड़ा लचीला करते हुए रिपोर्टिंग सीमा बढ़ा दी गई है. अब कर्मचारियों को 50,000 रुपये तक के उपहारों की रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं होगी, जो पहले मात्र 10,000 रुपये थी. इसके साथ ही, नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि किन सामाजिक अवसरों पर और किस प्रकार के पारंपरिक उपहारों को नियमों के तहत स्वीकार किया जा सकता है.
 

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