Savji Dholakia Success Story: गांव में अक्सर बच्चों से कहा जाता है कि अगर हीरा बनना है, तो मेहनत की आग से गुजरना पड़ता है. गुजरात के अमरेली जिले से निकले एक आम से लड़के ने इस बात को सच करके दिखाया. उसने ना केवल हीरों को तराशा, बल्कि अपनी मेहनत से अपनी जिंदगी भी संवार ली. फर्श से अर्श तक की इस कहानी में आज हम बात कर रहे हैं सूरत के डायमंड किंग, पद्म श्री से सम्मानित सावजी ढोलकिया की, जिन्होंने लगन और कड़ी मेहनत के सहारे कई हजार करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी.
जब जेब खाली थी पर हौसला बुलंद
सावजी ढोलकिया (Savji Dholakia) का जन्म सौराष्ट्र के अमरेली जिले के दुधला गांव में हुआ था. उनका परिवार एक सिंपल किसान परिवार था और घर की हालत ठीक नहीं थी. पैसों की कमी के चलते वो ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाए. सिर्फ 13 साल की उम्र में चौथी क्लास के बाद उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा. हालांकि स्कूल छूट गया, लेकिन उन्होंने सीखना नहीं छोड़ा. मेहनत और हौसले के दम पर उन्होंने आगे बढ़ने का रास्ता बनाया.
साल 1977 की बात है, जब वो अपने चाचा के पास सूरत आए. उस समय उनके पास ना तो कोई बड़ी डिग्री थी और ना ही बिजनेस करने का अनुभव. उन्होंने एक डायमंड फैक्ट्री में हीरे की पॉलिश करने का काम शुरू किया. क्या आप यकीन करेंगे कि दुनिया को कारें और घर गिफ्ट करने वाले इस शख्स की पहली कमाई सिर्फ और सिर्फ 179 रुपये थी?
हरे कृष्णा एक्सपोर्ट्स की रखी नींव
करीब 10 साल तक सावजी भाई ने हीरे के काम को ध्यान से सीखा. वो सिर्फ नौकरी नहीं कर रहे थे, बल्कि समझ रहे थे कि ये बाजार कैसे चलता है. फिर साल 1989 में उन्होंने अपने भाइयों हिम्मत, तुलसी और घनश्याम के साथ मिलकर खुद का काम शुरू करने का फैसला किया. केवल 60 हजार रुपये से उन्होंने हरे कृष्णा एक्सपोर्ट्स की शुरुआत की. शुरुआत में ये एक छोटी सी यूनिट थी. सावजी भाई ने कभी पैसे पर फोकस किया,उन्होंने ईमानदारी और अच्छी क्वालिटी पर सबसे ज्यादा ध्यान लगाया.
यही सोच आगे चलकर उनकी पहचान और सफलता की वजह बनी. शुरुआत भले ही छोटे लेवल पर हुई हो, लेकिन अपने काम के दम पर हरे कृष्णा एक्सपोर्ट्स ने बहुत जल्दी अपनी पहचान बना ली. कंपनी ने हमेशा क्वालिटी के हीरों पर फोकस किया. ऑर्डर समय पर पूरे किए और अपने ग्राहकों के साथ भरोसे का रिश्ता बनाए रखा. यही सब खास बातें धीरे‑धीरे हरे कृष्णा एक्सपोर्ट्स लूज डायमंड मैन्युफैक्चरिंग में देश की बड़ी कंपनियों में शामिल हो गई. आज कंपनी के ग्राहक अमेरिका, यूरोप, हांगकांग और यूएई जैसे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मौजूद हैं.
व्यापार का वो मंत्र जिसने सबको चौंकाया
सावजी ढोलकिया (Savji Dholakia) का सीधा मानना है कि अगर कंपनी अपने कर्मचारियों का दिल से ख्याल रखे, तो वही कर्मचारी पूरी मेहनत और ईमानदारी से कंपनी को आगे बढ़ाते हैं. उन्होंने इस बात को सिर्फ कहा नहीं, बल्कि अपने काम में दिखाया. साल 2011 से वो हर दिवाली पर अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों को इनाम के तौर पर कार, गहने और घर देने लगे. ये कोई दिखावा नहीं था बल्कि उन कर्मचारियों का सम्मान था जो दिन‑रात लगकर कंपनी के लिए हीरे तराशते हैं. यही सोच उनके बिज़नेस को बाकी कंपनियों से अलग बनाती है.
2025 क्यों रहा खास?
पिछले कुछ साल दुनिया भर के लिए मुश्किल भरे रहे. लैब‑ग्रोन डायमंड्स का चलन भी बढ़ा. लेकिन इसके बावजूद सावजी ढोलकिया की कंपनी हरे कृष्णा एक्सपोर्ट्स मजबूती से आगे बढ़ती रही. साल 2025 कंपनी के लिए अच्छा साबित हुआ. 2025 में कंपनी की सालाना कमाई 10 हजार करोड़ से ज्यादा हो गई. ये कंपनी का अभी तक का सबसे दमदार प्रदर्शन रहा है. इसके अलावा कंपनी ने हॉन्गकॉन्ग, बेल्जियम और अमेरिका जैसे बड़े देशों में अपना काम और फैलाया.
टीम लीड करने का अलग अंदाज
सावजी भाई बहुत सिंपल तरीके से अपनी टीम को चलाते हैं. उनका कहना है कि कंपनी लोगों के लिए होती है, ना कि लोग कंपनी के लिए. वो आज भी अपने पुराने दिनों को याद रखते हैं और कई बार कर्मचारियों के साथ जमीन पर बैठकर खाना खाते हैं. उनका कहना है कि पैसा कमाना आसान है, लेकिन लोगों का प्यार और दुआएं पाना ही असली सफलता है. इसी सोच की वजह से उन्होंने अपने बेटे को भी मेहनत अहमियत समझाई. इसके लिए उन्होंने बिना अपनी पहचान बताए कोच्चि में एक नौकरी करने भेजा, जिससे वो भी मेहनत की कीमत समझ सके.
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