Petrol-Diesel Price Today: 1 मई, यानी महीने का पहला दिन. इस दिन लोगों की जेब से लेकर रोजमर्रा के कामों पर असर डालने वाले नियमों में बदलाव होता है. एक सवाल पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर चल रहा है, कि क्या 1 मई से पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है. बीते दिन रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) की एक रिपोर्ट भी सामने आई, जिसमें बताया गया कि तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 14 रुपये और डीजल पर 18 रुपये प्रति लीटर का बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है. पूरी स्थिति को लेकर एनडीटीवी ने केडिया एडवायजरी के MD अजय सुरेश केडिया से बात की.
देश में बढ़ी एनर्जी कॉस्ट
अजय केडिया के अनुसार, "जब से मिडिल ईस्ट में टेंशन शुरू हुई है, तभी से तेल कंपनियों पर लगातार प्रेशर बना हुआ है. प्रॉफिट मार्जिन कम हो रहा है. दूसरी तरफ रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है, जिससे देश में एनर्जी कॉस्ट बढ़ी है. यानी तेल कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर में पेमेंट करना पड़ा रहा है. इसलिए हो सकता है कि कीमतों में महीने के पहले दिन इजाफा होता हुआ दिखाई दे."
सरकार के पास बॉन्ड का ऑप्शन मौजूद
हालांकि कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया ने एक राहत भरी खबर भी दी. उन्होंने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि हो सकता है सरकार आम नागरिकों को राहत देने के लिए ऑयल बॉन्ड का ऑप्शन चुने. इससे कुछ हद तक तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई हो सकती है. अगर ऐसा हुआ तो ये लोगों के लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं होगी.
शहरों में पेट्रोल की कीमतें (रुपये प्रति लीटर)
- दिल्ली- 94.77
- मुंबई- 103.54
- कोलकाता- 105.45
- चेन्नई- 100.84
- अहमदाबाद- 94.49
- हैदराबाद- 107.46
- पटना- 105.71
- बेंगलुरु- 102.96
- लखनऊ- 95.34
शहरों में डीजल की कीमतें (रुपये प्रति लीटर)
- दिल्ली- 87.67
- मुंबई- 90.03
- कोलकाता- 92.02
- चेन्नई- 92.39
- अहमदाबाद- 90.16
- हैदराबाद- 95.70
- पटना- 91.49
- बेंगलुरु- 90.99
- लखनऊ- 88.50
कच्चे तेल की कीमतें लगातार बना रहीं रिकॉर्ड
मालूम हो कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रही टेंशन का असर तेल की कीमतों पर पड़ा है. इससे दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel Price) महंगा हो रहा है. दुनिया के टोटल तेल और गैस सप्लाई का पांचवां हिस्सा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से आता है, जो अभी बंद है. वहां से ना तो जहाज आ रहे हैं और ना ही जा पा रहे हैं. इसके अलावा ट्रंप की ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी वाली चेतावनी से भी ब्रेंट क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. दूसरी तरफ वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 108 डॉलर के आसपास बना हुआ है.
रुपया पर बन रहा प्रेशर
इसके अलावा गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के स्तर को पार कर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने भारतीय करेंसी पर दबाव बना दिया है.
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