अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमलों के चलते पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. होर्मूज स्ट्रेट में तेल-गैस के टैंकर वाले जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो रही है. इराक और यूएई (UAE) के बंदरगाहों के करीब कार्गो जहाजों पर आज बुधवार को एक के बाद एक, तीन हमले हुए, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है. खास तौर से भारतीय बास्केट के लिए क्रूड ऑयल का भाव 108.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है.
जहाजों पर हमलों से सहमा बाजार
ब्रिटिश रॉयल नेवी से जुड़ी संस्था 'यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स' (UKMTO) के अनुसार, पिछले कुछ घंटों में कार्गो जहाजों पर प्रोजेक्टाइल से हमले हुए हैं. इराक के अल-फॉ से दक्षिण-पूर्व में एक टैंकर पर अज्ञात वस्तु से हमला किया गया, हालांकि क्रू मेंबर सुरक्षित हैं.
इससे पहले यूएई के पोर्ट राशिद के पास भी एक संदिग्ध हमले में जहाज के झुकने और उसमें पानी भरने की सूचना मिली थी. इससे पहले गल्फ ऑफ ओमान में भी कुछ जहाजों को निशाना बनाया गया. इन घटनाओं के बाद जहाजों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

कच्चा तेल महंगा, मई जैसे हालात
इन हमलों की वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 2.5% की तेजी आई है. वहीं भारत को तो काफी महंगा क्रूड खरीदना पड़ रहा है. पेट्रोलियम मंत्रालय की संस्था पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक, 8 सितंबर को कच्चे तेल (इंडियन बास्केट) की कीमत बढ़कर 108.91 डॉलर प्रति बैरल हो गई. अगस्त महीने में इंडियन बास्केट की औसत कीमत 90.19 डॉलर प्रति बैरल थी, जिसके मुकाबले 8 सितंबर को कीमतें करीब 20% तक महंगी हो चुकी हैं.
क्या फिर बढ़ेंगे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम?
मई 2026 में भी मध्य-पूर्व के तनाव के चलते कच्चे तेल में भारी उछाल आया था, जब 22 मई को इंडियन बास्केट 106.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी और सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम चार बार बढ़ाए थे. अब कीमतें एक बार फिर 109 डॉलर के करीब पहुंच जाने से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या आम जनता पर महंगाई का एक और बोझ पड़ने वाला है.
बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल और करीब 60% एलपीजी (LPG) आयात करता है. इसमें से बड़ा हिस्सा रणनीतिक रूप से बेहद अहम 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रास्ते भारत पहुंचता है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे भारत का आयात खर्च और महंगाई बढ़ने का खतरा फिर मंडराने लगा है.
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