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इजरायल-अमेरिका-ईरान करते-करते 'डूबा' पाकिस्‍तान, कुछ ही घंटों में अरबों डॉलर स्‍वाहा!

पाकिस्‍तान से विदेशी निवेशक भी लगातार बाहर जा रहे हैं. इसके पीछे मैक्रोइकॉनॉमिक प्रेशर, जियोपॉलिटिकल रिस्क और राजनीतिक अस्थिरता जैसे कारण बताए जा रहे हैं.

इजरायल-अमेरिका-ईरान करते-करते 'डूबा' पाकिस्‍तान, कुछ ही घंटों में अरबों डॉलर स्‍वाहा!
Pakistan Stock Market Crash: पाकिस्‍तान का शेयर मार्केट क्‍यों क्रैश हुआ?

मिडिल ईस्‍ट में ईरान और इजरायल के बीच जंग छिड़ी हुई है और अमेरिका भी इस जंग में ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. इस बीच दुनियाभर के बाजार प्रभावित हुए हैं. पाकिस्‍तान का हाल सबसे बुरा है. मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच एक बार फिर पाकिस्तान का शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह बिखर गया. PSX का बेंचमार्क KSE-100 इंडेक्स सोमवार (9 मार्च 2026) को 1,47,654 अंकों तक लुढ़क गया, जो पिछले सेशन से 6.25% नीचे है. पिछले एक महीने में ये 18.94% टूट चुका है, यानी निवेशकों को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ.

पिछला सोमवार भी साबित हुआ था ब्‍लैक मंडे 

पिछला सोमवार भी 'ब्लैक मंडे' साबित हुआ था, जब KSE-100 में 16,000 अंकों की भारी गिरावट आई. PSX ने सर्किट ब्रेकर लगाकर ट्रेडिंग 1 घंटे रोकी, लेकिन KSE-30 10% तक गिर गया. तेल के दामों में हर 10% बढ़ोतरी से पाकिस्तान का इम्पोर्ट बिल $1.5 बिलियन बढ़ जाता है.

ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका-इज़राइल की स्ट्राइक्स से तेल कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसका सीधा असर पाकिस्तान जैसे आयातक देश पर पड़ा.कराची में अमेरिकी कांसुलेट के बाहर हिंसक प्रदर्शन हुए थे. अफगानिस्तान के साथ चल रही मिलिट्री ऑपरेशन ने भी घाव पर नमक छिड़का.

पाकिस्‍तान से लगातार बाहर जा रहे विदेशी निवेशक

पाकिस्‍तान से विदेशी निवेशक भी लगातार बाहर जा रहे हैं. इसके पीछे मैक्रोइकॉनॉमिक प्रेशर, जियोपॉलिटिकल रिस्क और राजनीतिक अस्थिरता जैसे कारण बताए जा रहे हैं. ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष से तेल की कीमतें आसमा पर है. पाक का तेल इम्पोर्ट बिल लगातार बढ़ रहा है. हर 10% उछाल से $1.5 बिलियन एक्स्ट्रा खर्च बढ़ रहा है. पाकिस्‍तान में सीमेंट, बैंकिंग, टेक सेक्टर से FPI ने $4.43 मिलियन की बिकवाली की है.  

मैक्रोइकॉनॉमिक प्रेशर की बात करें तो जुलाई-नवंबर FY26 में करेंट अकाउंट डेफिसिट $812 मिलियन के पार पहुंच गया, जबकि ट्रेड गैप 34% बढ़कर $19.2 बिलियन पहुंच गया. FDI भी 41% तक गिरा है. रिपोर्ट के अनुसार, FY26 के पहले हाफ में $393 मिलियन FPI आउटफ्लो रिकॉर्ड कर चुका है. पाकिस्‍तान दूसरी ओर अफगान बॉर्डर टेंशन, IMF प्रेशर जैसे मसलों से भी जूझ रहा है.  

भारत, जापान, कोरिया और बाकी देशों पर कैसा असर? 

पश्चिम एशिया में तनाव का असर दुनियाभर के बाजारों पर है. हालांकि भारतीय बाजारों पर इसका असर सीमित दिख रहा है. सोमवार को सेंसेक्‍स में बड़ी गिरावट दिखी थी, जो बाद में रिकवर होकर 2 फीसदी से भी कम रह गई.  निफ्टी में भी कमोबेश यही स्थिति रही.  

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जापान का बाजार करीब 5% तक नीचे गिरा. यहां का Nikkei 225 इंडेक्‍स 5.2% गिरावट के साथ 52,728 अंको पर पहुंच गया. ऊर्जा आयात पर निर्भरता के कारण भारी गिरावट हुई. वहीं दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्‍स 5.96% गिरावट के साथ 5,251 के करीब पहुंच गया. वहीं हांगकांग और जर्मनी के मार्केट में भी करीब 3 फीसदी की गिरावट देखी गई. भारत के पास तेल रिजर्व और मजबूत करेंसी ने बचाया, लेकिन लंबे टेंशन से ग्लोबल सेंटीमेंट प्रभावित हो सकता है.

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