विज्ञापन

Nestle बदलने जा रही पैकेजिंग के नियम! Ascorbic Acid की जगह लिखा मिलेगा Vitamin C, जानें पूरा प्लान

डिब्बाबंद खाना खरीदते वक्त पैकेट के पीछे लिखे मुश्किल नाम अक्सर लोगों को कन्फ्यूज कर देते हैं और वे सामान वापस रैक पर रख देते हैं. इसी डर को दूर करने के लिए कीटकेट और नेस्कैफे बनाने वाली कंपनी Nestle ने अमेरिकी सरकार के दरवाजे पर दस्तक दी है.

Nestle बदलने जा रही पैकेजिंग के नियम! Ascorbic Acid की जगह लिखा मिलेगा Vitamin C, जानें पूरा प्लान
Nestle अब पैकेट पर लिखे मुश्किल और केमिकल नामों को इंग्रेडिएंट्स लिस्ट से हटाकर बेहद आसान शब्द लिखने की तैयारी में है.

Nestle Food Label Strategy:आजकल ज्यादातर लोग सुपरमार्केट या दुकान से कोई सामान खरीदते समय उसके पैकेट को पलटकर पीछे इंग्रेडिएंट्स की लिस्ट जरूर देखते हैं. ऐसे में जब आप पैकेट के पीछे कोई भारी-भरकम केमिकल नाम देखते हैं, तो दिल में डर बैठ जाता है कि कहीं यह सेहत के लिए खतरनाक तो नहीं? इसी डर को दूर करने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी फूड कंपनी नेस्ले (Nestle)  ने एक बड़ा कदम उठाया है. नेस्ले ने अमेरिका में फूड आइटम्स के पैकेट (Labels) पर इंग्रेडिएंट के नाम आसान और साधारण भाषा में लिखने के लिए लॉबिंग शुरू की है.

नेस्ले की अमेरिकी सरकार से बड़ी मांग

कीटकेट और नेस्कैफे बनाने वाली कंपनी नेस्ले चाहती है कि 'एस्कॉर्बिक एसिड' (Ascorbic Acid) की जगह पैकेट पर सीधा 'विटामिन C' और 'बीटा-कैरोटीन' (Beta-Carotene) की जगह 'विटामिन A' लिखने की अनुमति मिले. इसके पीछे की वजह को लेकर कंपनी का कहना है कि आजकल कस्टमर पैकेट के पीछे लिखे साइंटिफिक और कॉम्प्लैक्स जैसे केमिकल नेम जैसे Ascorbic Acid को देखकर घबरा जाते हैं और प्रोडक्ट खरीदने से बचते हैं.ग्राहकों को 'केमिकल' का डर ना सताए, इसलिए नेस्ले ने अमेरिकी प्रशासन से पैकेजिंग नियम बदलने की अपील की है.

कंपनी ने इस सिलसिले में अमेरिका के स्वास्थ्य सचिव और नियामक संस्थाओं से बात की है ताकि पुराने और जटिल नियमों में ढील दी जा सके.कंपनियों का मानना है कि भले ही ये इंग्रेडिएंट नेचुरल और सेफ होते हैं, लेकिन उनके जटिल तकनीकी नाम बिक्री पर बुरा असर डालते हैं.

'Frankenstein Food' का डर: क्यों घबराते हैं ग्राहक?

नेस्ले के एक पूर्व वरिष्ठ कार्यकारी (Senior Executive) ने रॉयटर्स से बातचीत में खुलासा किया कि अमेरिका में मौजूदा नियमों के कारण पैकेज्ड फूड पर ऐसी भाषा लिखनी पड़ती है, जिससे खाना 'फ्रेंकेंस्टाइन फूड' यानी लैब में तैयार या डरावना खाना जैसा महसूस होने लगता है.जबकि हकीकत यह होती है कि वे पूरी तरह से सेफ होते हैं, जिसके लिए आम जनता के पास बहुत ही आसान शब्द मौजूद हैं. इसी उलझन और डर को खत्म करने के लिए नियमों को बदलना बेहद जरूरी है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेस्ले ने इस मुद्दे को सीधे अमेरिका के स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर (Robert F. Kennedy Jr.) की टीम के सामने उठाया है. यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी प्रशासन अपने "मेक अमेरिका हेल्दी अगेन" (Make America Healthy Again) कैंपेन के तहत फूड-लेबलिंग पॉलिसी की समीक्षा कर रहा है.

इंडस्ट्री में नेस्ले की इस लॉबिंग की जानकारी पहली बार सामने आई है, जिसका मकसद नियमों में बदलाव लाना है.

क्या कहते हैं अमेरिका और यूरोप के नियम?

वर्तमान में अमेरिका के फूड लेबलिंग नियम इतने सख्त और जटिल हैं कि कंपनियों को साइंटिफिक और टेक्निकल नाम ही लिखने पड़ते हैं. इसमें इंग्रेडिएंट्स का असली मकसद या इस्तेमाल नहीं लिखा होता, जिससे ग्राहक डरकर प्रोडक्ट छोड़ देते हैं या कंपनियां मजबूरी में रेसिपी बदल देती हैं.

इसके विपरीत, यूरोप में नियम काफी व्यावहारिक हैं. यूरोप में अगर कोई इंग्रेडिएंट्स एडिटिव के रूप में इस्तेमाल होती है, तो उसे 'एंटीऑक्सीडेंट (एस्कॉर्बिक एसिड)' या विटामिन के रूप में 'विटामिन C' लिखा जा सकता है. इससे आम लोगों को समझने में कोई परेशानी नहीं होती.

75% लोग इंग्रेडिएंट लिस्ट देख बदल देते हैं खरीदारी का फैसला

इनोवा मार्केट इनसाइट्स की एक हालिया रिपोर्ट में सामने आया कि उत्तरी अमेरिका के करीब तीन-चौथाई (75%) ग्राहक पैकेट के पीछे की इंग्रेडिएंट लिस्ट देखकर अपना सामान खरीदने का इरादा बदल देते हैं. ज्यादातर लोग आसान, नेचुरल और आसानी से समझ आने वाले इंग्रेडिएंट्स की तलाश करते हैं. इसी ट्रेंड को देखते हुए जर्मनी की दिग्गज रिटेल कंपनी एल्डी (Aldi) जैसे ब्रांड्स ने अपने सामानों से दर्जनों जटिल इंग्रेडिएंट्स हटा दी हैं ताकि ग्राहक बेझिझक शॉपिंग कर सकें.

क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स और दूसरे ब्रांड्स?

नेस्ले के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर स्टीफन पाल्ज़र ने माना कि कंपनी ट्रेड एसोसिएशनों के माध्यम से इन नियमों को सरल बनाने की पूरी कोशिश कर रही है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रोडक्ट सेफ्टी, क्वालिटी और टेस्ट से कोई समझौता किए बिना जटिल इंग्रेडिएंट्स को कम करना एक चुनौतीपूर्ण काम है.

दूसरी तरफ, अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग (HHS) ने कहा है कि वे फूड इंडस्ट्री के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं. हालांकि, कुछ  पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि साइंटिफिक नाम हटाने से बड़ी कंपनियों को छिपे हुए एडिटिव्स और केमिकल्स छिपाने का मौका मिल सकता है, जो ट्रांसपेरेंसी के खिलाफ होगा.


ये भी पढ़ें- Indian Railways: ट्रेन का चादर, तकिया और कम्बल कितने दिन में बदला जाता है? रेलवे का बड़ा खुलासा

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Nestle, Food Labels, Ingredient Labels
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com