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ईरान जंग का असर: टॉप 7 कंपनियों ने गंवाए 1.75 लाख करोड़, पर इन 3 ने निवेशकों के करा दिए मजे

जियो पॉलिटिकल टेंशन के चलते भारतीय शेयर बाजार में पिछले हफ्ते भारी गिरावट देखी गई. देश की टॉप 10 में से 7 कंपनियों का मार्केट कैप 1.75 लाख करोड़ रुपये घट गया है.

ईरान जंग का असर: टॉप 7 कंपनियों ने गंवाए 1.75 लाख करोड़, पर इन 3 ने निवेशकों के करा दिए मजे

Share Market Update: मध्य पूर्व में तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख रहा है. बीते हफ्ते देश की शीर्ष 10 में से सात कंपनियों का मार्केट कैप 1.75 लाख करोड़ रुपए कम हो गया है. 23-27 मार्च के बीच भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखी गई. इस दौरान निफ्टी 1.28 प्रतिशत या 294.90 अंक गिरकर 22,819.60 और सेंसेक्स 1.27 प्रतिशत या 949.74 अंक गिरकर 73,583.22 पर बंद हुआ.

टॉप 10 कंपनियों में से कुछ कंपनियों के मार्केट कैप में गिरावट देखी गई है. इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ICICI बैंक, भारती एयरटेल, हिंदुस्तान यूनिलीवर और टीसीएस जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं. वहीं दूसरी तरफ, L&T, बजाज फाइनेंस और इन्फोसिस के मार्केट कैप में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

किन कंपनियों का घटा मार्केट कैप

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज की कुल कीमत 89,720 करोड़ रुपए घटकर अब 18,24,516 करोड़ रुपए रह गई है.
  • एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप 37,249 करोड़ रुपए कम होकर 11,64,019 करोड़ रुपए रह गया.
  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की कंपनी वैल्यू 35,399 करोड़ रुपए घटकर 9,41,569 करोड़ रुपए हो गई है.
  • आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैप 8,122 करोड़ रुपए कम होकर 8,83,551 करोड़ रुपए रह गया है.
  • भारती एयरटेल की कीमत 2,480 करोड़ रुपए घटकर 10,50,413 करोड़ रुपए हो गई.
  • हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यू 2,091 करोड़ रुपए कम होकर 4,87,540 करोड़ रुपए हो गई है.
  • टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का मार्केट कैप 271 करोड़ रुपए घटकर 8,64,669 करोड़ रुपए हो गया है.
Share Market Update

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किन कंपनियों का बढ़ा मार्केट कैप

  • एलएंडटी का मार्केट कैप 18,051.68 करोड़ रुपए बढ़कर 4,90,536.19 करोड़ रुपए हो गया.
  • बजाज फाइनेंस का मार्केट कैप 8,680.36 करोड़ रुपए बढ़कर 5,25,395.48 करोड़ रुपए पहुंच गया.
  • इन्फोसिस का बाजार मूल्य 6,245.3 करोड़ रुपए बढ़कर 5,15,034.67 करोड़ रुपए हो गया. 

क्यों गिर रहा है बाजार?

मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि मिडिल ईस्ट में टेंशन बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता आई है. भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में वैश्विक तनाव भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर डालता है. इसके अलावा, विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाया है.

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक खबरों और कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी. निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वो अस्थिरता के इस दौर में सतर्क रहें और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में ही लंबी अवधि के लिए निवेश करें.

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