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पहले खुद 8,000 लोगों को जॉब से निकाला, अब दुनिया को 'ज्ञान' दे रहे जुकरबर्ग!

मेटा में 8,000 कर्मचारियों को सुबह 4 बजे ईमेल भेजकर नौकरी से निकालने के बाद सीईओ मार्क जुकरबर्ग के सुर बदल गए हैं. जुकरबर्ग ने कहा कि AI नौकरियों को खत्म नहीं करेगा, बल्कि कर्मचारियों को कैपेबल बनाएगा. जानिए पूरा मामला.

पहले खुद 8,000 लोगों को जॉब से निकाला, अब दुनिया को 'ज्ञान' दे रहे जुकरबर्ग!
8 हजार कर्मचारी निकालने के बाद मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि एआई से नौकरियों को कोई खतरा नहीं है.
NDTV File Photo

मेटा ने अभी कुछ ही दिन पहले अपने 8,000 कर्मचारियों को एक झटके में नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया दिया था, लेकिन इस बड़ी छंटनी के बाद अब जुकरबर्ग दुनिया को कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि कंपनियों को कर्मचारियों को निकालने के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए उन्हें और कैपेबल बनाना चाहिए.

बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के अनुसार, कॉम्प्लेक्स के 'आइडिया जनरेशन' शो में एक लाइव इंटरव्यू में जुकरबर्ग ने कहा, "लोग मान बैठे हैं कि AI का नौकरियों को निगल जाना तय है, लेकिन मैं ऐसा नहीं सोचता. ऐसा इसलिए क्योंकि अगर कंपनियां इंसानों को पूरी तरह ऑटोमेशन से रिप्लेस करने की जगह उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने पर फोकस दें, तो भविष्य में नौकरियों के मौके कम होने की जगह और बढ़ेंगे.

जब 10% वर्कफोर्स हुई बाहर

मार्क जुकरबर्ग का ये बयान ऐसे समय पर आया है जब मेटा ने अपने टोटल वर्कफोर्स का करीब 10% हिस्सा यानी 8,000 लोगों को नौकरी से निकाला. हैरान करने वाली बात ये है कि दुनिया भर के कर्मचारियों को सुबह 4 बजे ईमेल भेजकर छंटनी के बारे में बताया गया. ये ले ऑफ तीन फेज में हुआ. पहले एशिया, फिर यूरोप और लास्ट में अमेरिका. इस छंटनी का सबसे बड़ा असर कंपनी की इंटीग्रिटी, साइबर सेफ्टी और कंटेंट डिजाइन टीमों पर दिखा है. हालांकि, 7,000 कर्मचारियों को नए AI प्रोजेक्ट्स में ट्रांसफर किया गया है, जबकि खाली पड़े 6,000 जगहों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया.

गूगल और ओपनएआई जैसी बड़ी कंपनियों से पीछे छूटने के बाद मेटा इस समय जनरेटिव एआई की रेस में बने रहने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है. जुकरबर्ग ने इसे कंपनी का रीबूट बोला है. कंपनी ने स्केल एआई में करीब 14 बिलियन डॉलर का निवेश किया, जिसके बाद अपना पहला भाषा मॉडल म्यूज स्पार्क लॉन्च किया.

आंकड़ों से जाने एआई पर कितना लगा पैसा?

मेटा इस 2026 में कैपिटल एक्सपेंडिचर पर 125 बिलियन से 145 बिलियन डॉलर खर्च कर रही है, जो साल 2025 की तुलना में देखें तो ये दोगुना है. इतने बड़े निवेश से डेटा सेंटर्स, कस्टम चिप्स और एआई मॉडल ट्रेनिंग की जाएगी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसी खर्च को बैलेंस करने के लिए इन 8,000 कर्मचारियों का ले-ऑफ किया गया है.

भले ही जुकरबर्ग भविष्य में नौकरियां बढ़ने का दावा कर रहे हैं, लेकिन सच तो ये है कि मेटा के फाइनेंशियल नंबर्स कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. कंपनी की सीएफओ सुसान ली ने खुद माना कि उन्हें नहीं पता कि कंपनी के लिए कर्मचारी कितने होने चाहिए, वहीं जुकरबर्ग भी कह चुके हैं कि जिस टीम में पहले 50 या 100 लोगों की जरूरत थी, अगर अब वहां एआई की मदद से सिर्फ 10 लोगों से काम चल सकता है, तो बड़ी टीम को बनाए रखना कंपनी के लिए घाटे का सौदा है. ऐसे में साफ दिख रहा है कि जुकरबर्ग का ये नया बयान सिर्फ एक डैमेज कंट्रोल की कोशिश ही है और कुछ नहीं.

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