LPG Vs PNG: भारत के घरेलू किचन में पिछले कुछ महीनों से एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जिस 'लाल सिलेंडर' (LPG) पर दशकों से करोड़ों घरों की निर्भरता थी, अब उसकी जगह तेजी से 'पाइप वाली गैस' यानी PNG ले रही है. मध्य पूर्व एशिया में जारी युद्ध और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में उपजे तनाव ने भारत को ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक नई सीख दी है.
संकट ने बदली सोच
भारत अपनी घरेलू खपत के लिए जरूरी LPG का करीब 60% हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है. इसमें से भी 90% आपूर्ति उसी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है, जो वर्तमान में युद्ध की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित है. सप्लाई चेन में आई इस रुकावट ने सरकार और जनता दोनों को विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया. पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बुधवार को इस बदलाव के ताजा आंकड़े पेश करते हुए बताया कि सरकार की अपील के बाद पीएनजी कनेक्शन की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है.
आंकड़ों की जुबानी, PNG की रफ्तार
सुजाता शर्मा के अनुसार, 'मार्च 2026 से अब तक कुल 5.10 लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शनों को गैसयुक्त (Gasified) किया जा चुका है. इसके अलावा, करीब 5.77 लाख नए ग्राहकों ने कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराया है.' उन्होंने आगे जानकारी दी कि बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी युद्ध स्तर पर काम चल रहा है. अब तक 7.66 लाख नए पीएनजी कनेक्शनों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया गया है, जिनमें से 2.56 लाख नए कनेक्शन जल्द ही गैस से जोड़ दिए जाएंगे.
दिलचस्प बात यह है कि उपभोक्ता अब पुराने विकल्प को छोड़ने के लिए भी तैयार हैं. आंकड़ों के मुताबिक, 19 अप्रैल 2026 तक लगभग 39,400 उपभोक्ताओं ने MYPNGD.in वेबसाइट के माध्यम से अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं.

सुजाता शर्मा
LPG बनाम PNG: क्यों बदल रहा है मूड?
जहां एक ओर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत 10.33 करोड़ कनेक्शनों के साथ LPG का विस्तार जारी है, वहीं शहरी क्षेत्रों में PNG को 'नो टेंशन गैस' माना जा रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण सुरक्षा और निरंतरता है. GAIL गैस के चीफ मैनेजर (कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन) सैकत चक्रवर्ती के अनुसार, देश में करीब 60 लाख घरों तक पाइपलाइन पहले से पहुंच चुकी है.
PNG की बिलिंग में पारदर्शिता, बुकिंग और डिलीवरी के झंझट से मुक्ति और लीकेज की स्थिति में कम जोखिम ने इसे उपभोक्ताओं की पहली पसंद बना दिया है. साथ ही, भारत अपनी 50% प्राकृतिक गैस रूस, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे अलग-अलग देशों से आयात करता है, जिससे किसी एक युद्धग्रस्त क्षेत्र पर निर्भरता कम हो जाती है.

LPG संकट ने यह साफ कर दिया है कि ऊर्जा के मामले में 'विश्वसनीयता' ही सबसे बड़ा पैमाना है. सरकार का तेजी से फैलता इंफ्रास्ट्रक्चर और बदलता वैश्विक परिदृश्य संकेत दे रहा है कि रफ्तार जारी रही तो आने वाले कुछ वर्षों में देश के शहरी किचन सिलेंडर मुक्त हो सकते हैं.
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