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कंपनी के MD के लिए 18 वर्ष की उम्र काफी! कॉर्पोरेट कानून में JPC ने जेल और जुर्माने पर भी दिया राहत का प्रस्‍ताव

कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर जेपीसी ने अपनी रिपोर्ट में कई अहम सिफारिशें की हैं. इनमें MD की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष करना, छोटे उल्लंघनों पर जुर्माना कम करना, अनुपालन आसान बनाना और निवेशकों के हितों को मजबूत करना शामिल है.

कंपनी के MD के लिए 18 वर्ष की उम्र काफी!  कॉर्पोरेट कानून में JPC ने जेल और जुर्माने पर भी दिया राहत का प्रस्‍ताव
JPC ने कॉर्पोरेट कानून में बड़े बदलावों की सिफारिश की है.
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सद की संयुक्त समिति ने 'कॉर्पोरेट विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026' पर अपनी रिपोर्ट लोक सभा में प्रस्तुत कर दी है. समिति के चेयरपर्सन सुधीर गुप्ता ने सोमवार को ये रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी. ये विधेयक इसी वर्ष 23 मार्च को लोक सभा में पेश किया गया था और उसी दिन केंद्रीय वित्त व कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रस्ताव पर इसे लोक सभा (21 सदस्य) और राज्य सभा (10 सदस्य) के कुल 31 सदस्यों वाली संयुक्त समिति को विस्तृत समीक्षा के लिए भेजा गया था. समिति ने व्यापार को सुगम बनाने (Ease of Doing Business), अपराधमुक्तिकरण (Decriminalisation), और निवेशकों के हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं. 

1. कंपनी लीडरशिप में उम्र सीमा का बदलाव

समिति ने प्रबंध निदेशक (MD), पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक के पद पर नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने और अधिकतम आयु 70 वर्ष से बढ़ाकर 75 वर्ष करने की सिफारिश की है.

2. कारावास के प्रावधानों में राहत और जुर्माने में कमी

  • NFRA आदेश उल्लंघन: राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) के आदेशों का पालन न करने पर जेल (कारावास) की सजा के प्रावधान को हटाने का सुझाव दिया गया है.
  • छोटे उल्लंघनों पर राहत: कंपनियों द्वारा अनुपालन में चूक होने पर 1 लाख रुपये तक के जुर्माने की जगह 50 हजार रुपये की निश्चित शास्ति (Penalties) तय करने की बात कही गई है.

3. ऑडिट (Statutory Audit) में छूट सिर्फ प्राइवेट कंपनियों को

समिति ने स्पष्ट किया है कि अनिवार्य वैधानिक लेखापरीक्षा (Statutory Audit) से छूट केवल निजी (Private) कंपनियों को दी जानी चाहिए ताकि छोटे व्यवसायों का अनुपालन बोझ कम हो. सार्वजनिक (Public) कंपनियों के लिए यह ऑडिट अनिवार्य ही रहेगा क्योंकि इनसे बड़े पैमाने पर निवेशकों व लेनदारों का हित जुड़ा होता है.

4. ट्रिब्यूनल (NCLT & NCLAT) में सुधार

  • IBC के लिए विशेष पीठ: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के अध्यक्ष के लिए दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) से जुड़े मामलों के निपटारे हेतु विशेष समर्पित पीठों (Special Benches) का गठन करना कानूनन अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई है.
  • मामलों का जल्द निपटारा: लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए पीठों (Benches) की संख्या बढ़ाने और अपीलीय अधिकरण (NCLAT) को देरी से दाखिल अपीलों को स्वीकार करने के लिए अतिरिक्त 45 दिन की मोहलत देने का अधिकार देने का सुझाव है.

5. विदेशी कंपनियों के लिए गिफ्ट सिटी (IFSC) में आसान एंट्री

विदेश में पंजीकृत कंपनियों को बिना अपनी मूल जगह पर कंपनी बंद (Liquidate) किए, भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC - GIFT City) में आसानी से ट्रांसफर/शिफ्ट होने (Re-domiciliation) के लिए विधेयक में एक नया अध्याय (Chapter 22A) जोड़ने का सुझाव दिया गया है.

6. CSR और डेटा सुरक्षा से जुड़ी सिफारिशें

  • CSR छूट सीमा: कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के लिए 10 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ (Net Profit) की सीमा को यथावत रखने और छोटे उद्योगों को वस्तु/सेवाओं के रूप में CSR योगदान की अनुमति देने की सिफारिश की गई है.

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