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इंश्योरेंस में 100% FDI को हरी झंडी, विदेशी कंपनियों की होगी एंट्री, जानें आपकी पॉलिसी पर क्या पड़ेगा असर

Insurance FDI India 2026: सरकार ने जहां प्राइवेट बीमा कंपनियों के लिए दरवाजे पूरी तरह खोल दिए, वहीं एलआईसी के नियमों में बदलाव नहीं किया है. LIC में एफडीआई की लिमिट अभी भी 20% ही रखी है.

इंश्योरेंस में 100% FDI को हरी झंडी, विदेशी कंपनियों की होगी एंट्री, जानें आपकी पॉलिसी पर क्या पड़ेगा असर

Insurance FDI India 2026: भारत के बीमा सेक्टर में बड़ा बदलाव हुआ है. सरकार ने ऐसा कानून लागू किया है जिससे अब विदेशी कंपनियां इंश्योरेंस सेक्टर में पूरा पैसा लगा सकती हैं. अब तक विदेशी कंपनियों को भारत में बीमा कंपनी चलाने के लिए किसी भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी करनी पड़ती थी. अब ऐसा जरूरी नहीं है. यानी विदेशी कंपनी अकेले ही अपनी बीमा कंपनी भारत में खोल सकती है. सरकार का कहना है कि इससे बीमा सेक्टर में ज्यादा पैसा आएगा, नई कंपनियां आएंगी, लोगों को ज्यादा ऑप्शन मिलेंगे, साथ ही इंश्योरेंस अब गांव और गरीब लोगों तक भी आसानी से पहुंचेगा.

आम आदमी को क्या होगा फायदा?

इस खबर के बाद आप सोच रहे होंगे कि विदेशी निवेश से आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा? तो जवाब है सस्ता प्रीमियम और बेहतर चॉइस आपके पास रहेगी. जब मार्केट में बाहर के देशों की बड़ी कंपनियां अकेले मैदान में उतरेंगी, तो कंपटीशन बढ़ेगा. यानी ग्राहकों को अपने साथ जोड़ने के लिए कंपनियां बीमा प्रीमियम की रेट कम कर सकती हैं.

सरकार ने कहा है कि साल 2047 तक इन्शुरन्स फॉर ऑल टारगेट पर काम हो रहा है. 100% एफडीआई उस दिशा में एक बड़ा कदम है. 

इसके अलावा विदेशी कंपनियां क्लेम सेटलमेंट अच्छे से करती है. अब क्लेम के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे, सब कुछ डिजिटल और फास्ट होगा. नए प्रोडक्ट्स देखने को मिल सकते हैं. अभी की बात करें तो देश में कुछ ही तरह के इंश्योरेंस प्लान मिलते हैं, लेकिन अब कस्टमाइज्ड प्लान का ऑप्शन ग्राहकों के पास हो सकता है. 

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LIC पर क्या लिया फैसला?

सरकार ने जहां प्राइवेट बीमा कंपनियों के लिए दरवाजे पूरी तरह खोल दिए, वहीं एलआईसी के नियमों में बदलाव नहीं किया है. LIC में एफडीआई की लिमिट अभी भी 20% ही रखी है. सरकार का मानना है कि एलआईसी की कमान पूरी तरह विदेशी हाथों में देना ठीक नहीं है.

क्या हैं नए नियम?

अब 100% निवेश के लिए सरकार से हर बार पर्मिशन लेने की जरूरत नहीं होगी. ये ऑटोमैटिक रूट के जरिए होगा. वहीं दूसरी तरफ कंपनी चाहे विदेशी हो, लेकिन नियम के अनुसार कंपनी के चेयरपर्सन, एमडी या सीईओ में से कम से कम एक व्यक्ति भारतीय होना जरूरी है. एफडीआई के नियमों में बदलाव के बाद IRDAI ने कहा है कि अगर किसी कंपनी ने धोखाधड़ी की तो ये उसे बहुत ही महंगा पड़ेगा. 

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