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वर्क फ्रॉम होम वालों पर इंफोसिस की नजर, अब कंपनी को देना होगा बिजली बिल का हिसाब, जानें क्या है पूरा माजरा?

इंफोसिस पिछले 15 सालों से अपने पर्यावरण को सेफ रखने पर काम कर रही है. कंपनी का मानना है कि हाइब्रिड वर्क मॉडल अब नौकरी के लिए जरूरी हो गया है, इसलिए कैंपस के बाहर हो रहे इस खर्च को ट्रैक करना जरूरी है.

वर्क फ्रॉम होम वालों पर इंफोसिस की नजर, अब कंपनी को देना होगा बिजली बिल का हिसाब, जानें क्या है पूरा माजरा?

क्या आपने कभी सोचा कि अगर आप घर से ऑफिस का काम कर रहे हैं को कहीं ना कहीं पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं. घर की लाइट, एसी, कूलर का इस्तेमाल ऑफिस की जगह अब घर में हो रहा है. नहीं ना. पर इंफोसिस ने पर्यावरण का ध्यान रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. दरअसल कंपनी अब आपके घर के बिजली बिल का ब्योरा मांग रही है, जिससे ग्रीनहाउस गैस एम्मिसन की सटीक जानकारी मिल सके.

क्या है मामला?

इंफोसिस  के CFO जयेश संघराजका ने कर्मचारियों को भेजे एक इंटरनल मेल में बिजली बिल लेने की वजह बताई है. कंपनी का कहना है कि जब कर्मचारी घर से काम करते हैं, तो उनके लैपटॉप, लाइट और AC से होने वाला ग्रीनहाउस गैस एम्मिसन भी कंपनी के टोटल कार्बन फुटप्रिंट का हिस्सा होता है. आसान भाषा में कहें तो इंफोसिस  यह जानना चाहती है कि उसके कर्मचारी घर से काम करके पर्यावरण पर कितना प्रभाव डाल रहे हैं.

सर्वे में क्या पूछा जा रहा?

बता दें यह सर्वे सिर्फ बिल के अमाउंट तक सीमित नहीं है. कर्मचारियों से कई जानकारियां मांगी गई हैं. मसलन,  घर में कितने AC, कंप्यूटर, लाइट्स इस्तेमाल हो रहे हैं. साथ ही यह लाइट्स कितने वॉट की हैं. इसके अलावा क्या घर में सोलर पावर या किसी दूसरे रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल हो रहा है.

इंफोसिस की यह पहल दिखाती है कि अब कॉर्पोरेट केवल दफ्तर की दीवारों के भीतर ही नहीं, बल्कि उसके बाहर भी पर्यावरण के लिए अपनी जिम्मेदारी समझ रहा है. क्या दूसरी आईटी कंपनियां भी अब इंफोसिस की राह पर चलेंगी? 

पर्यावरण के लिए बड़ी तैयारी

इंफोसिस पिछले 15 सालों से अपने पर्यावरण को सेफ रखने पर काम कर रही है. कंपनी का मानना है कि हाइब्रिड वर्क मॉडल अब नौकरी के लिए जरूरी हो गया है, इसलिए कैंपस के बाहर हो रहे इस खर्च को ट्रैक करना जरूरी है.

मालूम हो इंफोसिस में फिलहाल हाइब्रिड मॉडल लागू है, जिसमें कर्मचारियों को महीने में कम से कम 10 दिन ऑफिस आना जरूरी है. पर इस नए मेल आने के बाद देखना दिलचस्प होगा कि कर्मचारी अपनी प्राइवेसी और घर के खर्चों के इस डेटा को शेयर करते हैं या फिर नहीं.

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