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मानसून आते ही पावर डिमांड में बड़ी गिरावट, जानें कितनी सस्ती हुई बिजली और AC बंद होने से कितना कम हुआ लोड

Power Demand India: देश में मानसून की दस्तक से जून में पीक पावर डिमांड घटकर 241 GW रह गई, जो मई में 270.8 GW थी. मांग घटने से IEX पर बिजली की औसत स्पॉट कीमत में भी 18% की कमी आई है.

मानसून आते ही पावर डिमांड में बड़ी गिरावट, जानें कितनी सस्ती हुई बिजली और AC बंद होने से कितना कम हुआ लोड
Monsoon Impact on Power Demand: भारत के पावर सेक्टर में ₹65-70 लाख करोड़ के बंपर निवेश के मौने बन रहे हैं.

देश में मानसून की बारिश शुरू होने के साथ ही बिजली की मांग में बड़ी कमी देखने को मिली है. तापमान घटने और AC समेत अन्य कूलिंग उपकरणों के कम इस्तेमाल के कारण भारत की पीक पावर डिमांड जून में घटकर 241 गीगावाट (GW) रह गई है. मई महीने में यह आंकड़ा 270.8 GW तक पहुंच गया था.

ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, 16 जून को सोलर घंटों के दौरान बिजली की अधिकतम मांग 249.7 GW रही, जबकि नॉन-सोलर घंटों में यह 247.5 GW दर्ज की गई. हालांकि मौजूदा मांग पिछले साल 16 जून को दर्ज 217 GW के मुकाबले अधिक है.

बिजली की कीमतों में भी आई कमी

बिजली की मांग कम होने का असर पावर मार्केट पर भी दिखाई दिया है. इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) में जून के मध्य तक बिजली की औसत स्पॉट कीमत 3.6 रुपये प्रति यूनिट (kWh) रही, जो पिछले साल की तुलना में 18 % कम है. वहीं रियल-टाइम मार्केट में बिजली की कीमत 16 जून को घटकर 4.5 रुपये प्रति यूनिट रह गई. 21 मई को जब बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी, तब यही कीमत 6.5 रुपये प्रति यूनिट थी.

कोयला अब भी सबसे बड़ा स्रोत

देश में बिजली उत्पादन में कोयला आधारित प्लांट्स की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही. कुल बिजली उत्पादन में कोयले का योगदान 68 % रहा. वहीं सोलर एनर्जी ने 19 % और हाइड्रो पावर ने 7 % योगदान दिया.

आमतौर पर मई और जून में भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग सबसे ज्यादा रहती है, क्योंकि घरों और कारोबारों में AC और कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है. लेकिन मानसून आने के बाद तापमान कम होने से खपत घटने लगती है. साथ ही कई क्षेत्रों में हाइड्रो पावर उत्पादन भी बढ़ जाता है.

भारत के पावर सेक्टर की ग्रोथ मजबूत रहने की उम्मीद

लंबी अवधि में भारत के पावर सेक्टर की ग्रोथ मजबूत रहने की उम्मीद है. एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती बिजली खपत, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), डेटा सेंटर्स और सरकारी नीतियों के समर्थन से इस सेक्टर में 65-70 लाख करोड़ रुपये तक के कैपेक्स अवसर बन सकते हैं.

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लेखक के बारे में
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अनिशा कुमारी
सबएडिटर
मैं करीब 4 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में एनडीटीवी में सबएडिटर के रूप में कार्यरत हूं. मैंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, ट्र... और पढ़ें
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