HeatWave and Power Consumption: न दिन को चैन, न रात को आराम. सुबह के 7 नहीं बजते कि खिड़कियों से आती सूरज की रौशनी चुभने लगती है. घर से निकलना मुश्किल. दोपहर में बाजार की सड़कें सूनसान. ऐसी गर्मी तो मई-जून में भी नहीं झेली भई! घर हो या दफ्तर, मजाल क्या है कि बिना AC ऑन किए आप चैन से बैठ पाएं. दिल्ली, पटना, लखनऊ, जयपुर, आगरा, कानपुर, भागलपुर... हर शहर तप रहा है. देश में इस साल सूरज की तपिश ने मई और जून के आने से पहले ही डराना शुरू कर दिया है. अभी अप्रैल का महीना खत्म भी नहीं हुआ है, लेकिन देश में बिजली की मांग ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं.
बिजली मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस सप्ताह के अंत में भारत की पीक पावर डिमांड 252.07 गीगावाट (GW) के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई. हैरानी की बात ये है कि पिछला रिकॉर्ड 250 गीगावाट का था, जो मई 2024 में बना था. यानी जो खपत पीक गर्मियों (मई-जून) में होती थी, वह इस बार अप्रैल में ही देखने को मिल रही है. 22 अप्रैल को जो डिमांड 239.70 गीगावाट थी, वह महज दो दिन के भीतर उछलकर 252 गीगावाट के पार चली गई.
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बिजली की रिकॉर्ड तोड़ खपत के पीछे 3 बड़ी वजहें
विशेषज्ञों और मंत्रालय के आंकड़ों के विश्लेषण से तीन मुख्य कारण सामने आए हैं, जिन्होंने बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ा दिया है-
- झुलसा देने वाली लू और बढ़ता पारा: उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में तापमान 40-44 डिग्री के बीच बना हुआ है. इसके चलते घरों और दफ्तरों में एयर कंडीशनर (AC) और कूलर का इस्तेमाल चौबीसों घंटे हो रहा है. आईएमडी (IMD) की चेतावनी है कि मई और जून में यह स्थिति और भयावह हो सकती है.
- EV चार्जिंग और डेटा सेंटर: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती संख्या और डेटा सेंटर्स की ऊर्जा जरूरतों ने बिजली की खपत का नया पैटर्न तैयार किया है. यह 'न्यू एज कंजम्पशन' आने वाले समय में डिमांड को तीन गुना तक बढ़ा सकता है.
- युद्ध का साइड इफेक्ट और गैस संकट: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण एलपीजी (LPG) और गैस की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ा है. ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के महानिदेशक कृष्ण चंद्र पाणिग्रही के अनुसार, गैस संकट के चलते भारतीय उपभोक्ता अब तेजी से इंडक्शन कुकिंग और बिजली के हीटरों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं. इस बदलाव की वजह से ग्रिड पर 13-27 गीगावाट का अतिरिक्त बोझ बढ़ा है.
आगे की तैयारी: अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का लक्ष्य
जैसे-जैसे मई की तपिश बढ़ेगी, बिजली की मांग 270 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है. सरकार इस संकट से निपटने के लिए कमर कस चुकी है. बिजली मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पीयूष सिंह ने पहले ही संकेत दिए थे कि अप्रैल से जून के बीच भारत अपनी क्षमता में 22 गीगावाट से ज्यादा की नई बिजली जोड़ेगा. इसमें 10 गीगावाट सोलर, 3.5 गीगावाट थर्मल और पवन व जलविद्युत ऊर्जा शामिल है.
पावर सेक्टर में आने वाले समय में 65-70 करोड़ रुपये के बड़े निवेश की संभावनाएं हैं. हालांकि, जिस रफ्तार से अप्रैल में रिकॉर्ड टूटे हैं, उसने बिजली कंपनियों और आम जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है. अगर मई में पारा और चढ़ा, तो पावर कट और लोड शेडिंग से बचना बड़ी चुनौती हो सकती है.
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