Share Market Crash India: भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. पिछले 22 महीनों की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट के साथ शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया. इससे पहले 4 जून 2024 को मार्केट बुरी तरह पस्त हुआ था. इस गिरावट ने ना केवल निवेशकों के पोर्टफोलियो को कम किया, बल्कि मार्केट के सेंटीमेंट को भी पूरी तरह से हिला कर रख दिया है.
बाजार का हाल
गुरुवार को कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 2,497 अंक (3.26%) टूटकर 74,207 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी (Nifty) 776 अंक (3.26%) गिरकर 23,002 के लेवल पर आ गया. कारोबार के दौरान निफ्टी एक समय 22,930 के निचले स्तर तक भी चला गया था. इस जबरदस्त बिकवाली की वजह से एक ही दिन में निवेशकों की करीब 12 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खाक हो गई.
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Indian share market crash
गिरावट की 5 बड़ी वजह
- इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध ने वैश्विक बाजारों को हिला कर दिया है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को रोक दिया, जिससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. इस पूरी घटना से निवेशकों के मन में रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट हावी हो गया.
- भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है. ब्रेंट क्रूड की कीमतें 115 से 118 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो 2022 के बाद का हाई लेवल है. इससे भारत के करेंट अकाउंट डेफिसिट और महंगाई के ट्रिगर होने का डर मार्केट में चौतरफा दिखाई दिया.
- विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं. मार्च 2026 के पहले 15 दिनों में ही FII ने करीब 56 हजार करोड़ से ज्यादा के शेयर बेचे हैं. डॉलर की मजबूती की वजह से विदेशी निवेशक सेफ हेवन की तरफ रुख कर रहे हैं.
- एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन के इस्तीफे की खबरों ने बैंकिंग इंडेक्स को हिला कर रख दिया. एचडीएफसी बैंक के शेयर करीब 8 से 9% तक गिरकर अपने 52-हफ्तों के लो लेवल पर पहुंच गया, जिसका सीधा असर निफ्टी और सेंसेक्स की वेटेज पर पड़ा.
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए इसे स्टेबल रखा. महंगाई के बढ़ते रिस्क को देखते हुए फेड ने संकेत दिए हैं कि मौजूदा रेट्स लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं, जिससे वैश्विक लिक्विडिटी पर असर पड़ा है.
गिरते बाजार में निफ्टी बैंक, निफ्टी आईटी और निफ्टी मेटल पर ज्यादा असर पड़ा. स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स भी 2-2.5% की गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे ये साफ हो गया कि बिकवाली केवल बड़े शेयरों तक ही सीमित नहीं रही.
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