Rupee on Lifetime Low: भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 12 पैसे टूटकर 92.40 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ. पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने घरेलू मुद्रा पर जबरदस्त दबाव बनाया है. इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया आज 92.35 पर खुला और कारोबार के दौरान 92.47 के सबसे निचले स्तर तक चला गया. अंत में यह 92.40 के नए लाइफटाइम लो पर बंद हुआ. इससे पहले सोमवार को रुपया 92.28 पर बंद हुआ था.
गिरावट की मुख्य वजहें जान लीजिए
फॉरेक्स ट्रेडर्स और विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये की कमजोरी के पीछे तीन बड़ी वजहें बताई जा रही हैं-
- कच्चे तेल में उछाल: ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.65% बढ़कर 102.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से रुपये पर दबाव बढ़ता है.
- विदेशी फंडों की निकासी: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार बाजार से पैसा निकाला जा रहा है. एक्सचेंज डेटा के अनुसार, सोमवार को विदेशी निवेशकों ने 9,365.52 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.
- पश्चिम एशिया संकट: युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने और 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) बंद होने की आशंका ने निवेशकों को डरा दिया है.

शेयर बाजार से मिला थोड़ा सहारा
हालांकि, घरेलू शेयर बाजार (Sensex और Nifty) में रही तेजी ने रुपये को और अधिक गिरने से बचा लिया. डॉलर इंडेक्स भी मामूली बढ़त के साथ 99.52 पर कारोबार कर रहा था. विश्लेषकों का मानना है कि इस हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति बैठकों पर निवेशकों की नजर रहेगी.
व्यापार घाटा और महंगाई की चिंता
सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में भारत का व्यापार घाटा 27.1 अरब डॉलर रहा. आयात पिछले साल के मुकाबले 24% से ज्यादा बढ़ गया है. थोक महंगाई दर (WPI) भी बढ़कर 2.13% के 11 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है.
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