वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा विजन साझा किया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सरकार और निवेशकों से भारत के तेल और गैस प्रोडक्शन को बढ़ावा देने की बात कही.
90% आयात पर निर्भरता रिस्क से भरी
अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत आज भी अपनी तेल और गैस की जरूरतों का करीब 90% हिस्सा इंपोर्ट करता है. आज के जियो पॉलिटिकल हालात को देखते हुए यह निर्भरता देश के लिए रिस्क से भरी हो सकती है. उन्होंने आगे कहा कि अगर तीन तरफ से समुद्र से घिरे भारत की घेराबंदी होती है, तो हमारी पावर सेफ्टी खतरे में पड़ सकती है.
In today's turbulent geopolitics, it is critically important for every large nation to secure energy independence. India is vulnerable because we import 90% of our oil and gas. We are surrounded by sea on three sides which can be blockaded in hostile times. There is no option but…
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) February 9, 2026
300 अरब बैरल का खजाना हमारे पास
अग्रवाल ने आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि भारत के पास लगभग 300 अरब बैरल तेल के बराबर का बड़ा संसाधन मौजूद है. उन्होंने कहा, "हम लकी हैं कि हमारे पास इतने संसाधन है, लेकिन हम इसे निकाल नहीं पा रहे हैं." उनके अनुसार अगर हम खुद प्रोडक्शन करें, तो इसकी कॉस्ट इंपोर्ट के मुकाबले आधी हो जाएगी.
नियमों में ढील की मांग
वेदांता चेयरमैन ने इस बात पर जोर दिया कि भारी-भरकम नियमों के बजाय सरकार को आसान नियम बनाने पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा भारत में अभी केवल 200 एक्टिव एक्सप्लोरेशन लाइसेंस हैं, जबकि होने चाहिए 2 हजार. इसके अलावा निवेशक कानूनी पचड़ों और नोटिसों के डर से निवेश करने से कतराते हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि 5 करोड़ रुपये जैसे छोटे निवेश के साथ लीजिंग मॉडल को भी इस सेक्टर में लाना चाहिए.
10 गुना प्रोडक्शन और लाखों नौकरियां
अनिल अग्रवाल का मानना है कि लोकल प्रोडक्शन बढ़ने से ना केवल देश का पैसा बचेगा, बल्कि लाखों नौकरियां भी पैदा होंगी. उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत अनाज के मामले में आत्मनिर्भर बना ठीक वैसे ही हमें तेल और गैस के मामले में भी आत्मनिर्भर बनने के लिए जी-जान लगा देनी चाहिए.
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