अगर आप क्रिप्टो में निवेश करते हैं या किसी क्रिप्टो एक्सचेंज पर अकाउंट बनाने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. भारत सरकार ने क्रिप्टो पर शिकंजा और कस दिया है. अब सिर्फ पैन कार्ड या डॉक्यूमेंट अपलोड करके क्रिप्टो अकाउंट नहीं खुलेगा. सरकार चाहती है कि हर यूजर की सही पहचान हो और कोई भी गलत काम क्रिप्टो के जरिए न हो सके. इसी को ध्यान में रखते हुए नए सख्त नियम लागू किए गए हैं, जिनका सीधा असर आम निवेशकों पर पड़ेगा.
FIU ने जारी किए नए सख्त नियम
क्रिप्टो में गलत लेनदेन और काले धन पर लगाम लगाने के लिए वित्तीय खुफिया इकाई यानी एफआईयू ने नए नियम जारी किए हैं. ये नियम 8 जनवरी को लागू किए गए हैं. अब भारत में काम करने वाले सभी क्रिप्टो एक्सचेंज को वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर माना गया है. इसका मतलब यह है कि इन पर वही सख्ती लागू होगी, जो बैंकों और फाइनेंशियल कंपनियों पर होती है.
अब लाइव सेल्फी देना होगा जरूरी
नए नियमों के तहत यूजर को अकाउंट बनाते समय लाइव सेल्फी देनी होगी. यह कोई सामान्य फोटो नहीं होगी. इसमें ऐसा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया जाएगा, जो यह जांचेगा कि यूजर खुद सामने मौजूद है. यूजर से आंख झपकाने या सिर हिलाने के लिए कहा जा सकता है. इससे फर्जी फोटो और डीपफेक जैसी धोखाधड़ी को रोका जा सकेगा.
लोकेशन और आईपी एड्रेस भी होगा रिकॉर्ड
अब क्रिप्टो एक्सचेंज यह भी रिकॉर्ड करेंगे कि यूजर किस जगह से अकाउंट बना रहा है. इसमें यूजर की लोकेशन, तारीख, समय और आईपी एड्रेस शामिल होगा. यानी अकाउंट बनाते वक्त आपकी जियो टैगिंग होगी. इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कोई गलत गतिविधि कहां से हो रही है.
बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन भी जरूरी
यूजर के बैंक अकाउंट की पुष्टि के लिए अब एक रुपये का छोटा ट्रांजेक्शन जरूरी होगा. इसे पेननी ड्रॉप तरीका कहा जाता है. इससे यह साफ होगा कि बैंक अकाउंट चालू है और उसी व्यक्ति का है जो क्रिप्टो अकाउंट खोल रहा है.
दो पहचान पत्र और ओटीपी वेरिफिकेशन अनिवार्य
अब सिर्फ पैन कार्ड से काम नहीं चलेगा. यूजर को पैन के साथ आधार, पासपोर्ट या वोटर आईडी में से कोई एक देना होगा. इसके अलावा ईमेल और मोबाइल नंबर का ओटीपी वेरिफिकेशन भी जरूरी किया गया है, ताकि फर्जी अकाउंट न बन पाए.
हाई रिस्क यूजर्स पर ज्यादा नजर
जो यूजर हाई रिस्क कैटेगरी में आते हैं, जैसे विदेशों से जुड़े अकाउंट या पॉलिटिकली जुड़े लोग, उनकी जांच और सख्त होगी. ऐसे यूजर्स की केवाईसी हर छह महीने में अपडेट की जाएगी. बाकी सभी यूजर्स की केवाईसी साल में एक बार होगी.
आईसीओ और टोकन लॉन्च पर सख्ती
एफआईयू ने साफ कहा है कि आईसीओ और टोकन लॉन्च जैसे मामलों में धोखाधड़ी का खतरा ज्यादा होता है. इसलिए ऐसे कामों को रोका जाएगा. इसके अलावा ऐसे क्रिप्टो टूल्स जो लेनदेन को छिपाने में मदद करते हैं, उन्हें भी रोकने के निर्देश दिए गए हैं.
पांच साल तक रखना होगा यूजर डेटा
क्रिप्टो एक्सचेंज को यूजर की पहचान, एड्रेस और लेनदेन की पूरी जानकारी कम से कम पांच साल तक संभाल कर रखनी होगी. अगर कोई जांच चल रही है, तो डेटा जांच पूरी होने तक सुरक्षित रखना होगा.
आम निवेशकों के लिए क्या बदलेगा
इन नए नियमों से आम निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है. सरकार का मकसद गलत लोगों को पकड़ना है, न कि सही निवेशकों को परेशान करना. लेकिन अब क्रिप्टो में एंट्री पहले से ज्यादा प्रोसेस वाली होगी. इससे बाजार ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनने की उम्मीद है.
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