इंश्योरेंस प्रीमियम पर GST में छूट, विदेशी कंपनियों के आने से कंपटीशन का बढ़ना... ऐसे और भी कुछ सुधार हुए हैं, पिछले कुछ समय में, जिनसे आम लोगों के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी लेना फायदेमंद हो गया है. हाल ही में आई एऑन की रिपोर्ट भी यही बताती है कि देश का कमर्शियल इंश्योरेंस मार्केट अब पहले के मुकाबले खरीदारों के लिए ज्यादा फायदेमंद हो गया है. एऑन की ग्लोबल इंश्योरेंस मार्केट इनसाइट्स Q1 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, रेगुलेटरी सुधार, विदेशी निवेश की बढ़ती संभावनाएं, री-इंश्योरेंस कैपेसिटी में बढ़ोतरी और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से मार्केट में बड़ा बदलाव आया है.
नए सुधारों से कंपटीशन बढ़ा, बीमाधारकों को फायदा
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में किए गए कई रेगुलेटरी बदलावों ने भारतीय इंश्योरेंस मार्केट को विदेशी निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाया है. इनमें इंश्योरेंस सेक्टर में FDI की सीमा बढ़ाकर 100% करना और भारतीय नागरिकों से जुड़े बोर्ड नियमों में ढील देना शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक, नए मार्केट प्लेयर्स के आने और री-इंश्योरेंस कैपेसिटी बढ़ने से ज्यादातर इंश्योरेंस सेगमेंट में मार्केट खरीदारों के पक्ष में हो गया है.
खासकर प्रॉपर्टी इंश्योरेंस में प्रीमियम में बड़ी कमी देखने को मिली है. रिपोर्ट में कहा गया, 'नए मार्केट प्लेयर्स, तेज प्रतिस्पर्धा और बढ़ी हुई री-इंश्योरेंस कैपेसिटी की वजह से मार्केट की स्थिति खरीदारों के लिए बेहतर हुई है. खासकर प्रॉपर्टी मार्केट में कीमतों में अच्छी-खासी कमी आई है.'
बेहतर कवरेज और कम प्रीमियम का मौका
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपटीशन बढ़ने से कॉर्पोरेट खरीदार अब ज्यादा कवरेज और ऊंची पॉलिसी लिमिट हासिल कर पा रहे हैं. इससे क्लाइमेट चेंज, साइबर खतरे और सप्लाई चेन में रुकावट जैसे नए जोखिमों से बेहतर सुरक्षा मिल सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रॉपर्टी, डायरेक्टर्स एंड ऑफिसर्स (D&O) लाइबिलिटी और साइबर इंश्योरेंस में डबल-डिजिट तक की छूट मिल रही है.
साथ ही इंश्योरर्स और री-इंश्योरर्स के विस्तार और गिफ्ट सिटी के इंटरनेशनल री-इंश्योरेंस हब के रूप में उभरने से मार्केट में कैपेसिटी भी बढ़ी है. हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साइबर इंश्योरेंस में बढ़ते क्लेम की वजह से अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड अभी भी सख्त बने हुए हैं. वहीं दूसरे ज्यादातर सेगमेंट में इंश्योरेंस कंपनियां ज्यादा कवरेज और बेहतर पॉलिसी शर्तें देकर ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं.
कम प्रीमियम में ज्यादा कवर लेने का मौका
एऑन इंडिया के चीफ ब्रोकिंग ऑफिसर, कमर्शियल रिस्क, हेल्थ एंड वेल्थ सॉल्यूशंस, शांतनु सक्सेना ने कहा कि मौजूदा मार्केट भारतीय खरीदारों के लिए अपने रिस्क प्रोटेक्शन को मजबूत करने का अच्छा मौका है. उन्होंने कहा, 'पर्याप्त कैपिटल, कम नुकसान और बढ़ती प्रतिस्पर्धा की वजह से भारतीय प्रॉपर्टी मार्केट में अंडरराइटिंग पहले से ज्यादा लचीली हुई है. भारतीय खरीदारों के लिए यह सही समय है कि वे कम प्रीमियम से होने वाली बचत का इस्तेमाल ज्यादा कवरेज और ऊंची पॉलिसी लिमिट लेने में करें. इससे भविष्य के जोखिमों का सामना करने की क्षमता और मजबूत होगी.'
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