Middle-East Crisis: ईरान-इजरायल जंग की वजह से कई बड़े देशों की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है. भारतीय बाजारों में इसका असर देखा जा सकता है. एक्सपोर्ट से लेकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में व्यापारी वर्ग परेशान है. इसी को देखते हुए सरकार ने एक बड़ा सुरक्षा कवच तैयार करने का फैसला लिया है. सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वित्त मंत्रालय एक स्पेशल क्रेडिट सपोर्ट स्कीम पर काम कर रहा है, जिसके जंग की वजह से असर पड़ने वाले सेक्टर्स को 2 लाख करोड़ रुपये का लोन पैकेज दिया जा सकता है.
ECLGS जैसी हो सकती है योजना
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार ये नई योजना काफी हद तक कोरोना महामारी के दौरान शुरू की गई इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के मॉडल जैसी होगी. डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंस सर्विस (DFS) इस योजना के ब्लूप्रिंट को तैयार कर रहा है. माना जा रहा है कि अगले 15 दिनों के अंदर इस योजना का आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है. इस पैकेज का सीधा उद्देश्य है कि सप्लाई चेन रुकने की वजह से जिन सेक्टर्स में उठा-पटक का दौर चल रहा है, उन कंपनियों के पास कैश की कमी ना हो पाए, जिससे वो अपना कारोबार चालू रख सकें.

Middle-East Crisis
MSMEs और एक्सपोर्ट पर फोकस
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का सीधा असर भारत के एक्सपोर्ट और एमएसएमई पर पड़ा है. एक्सपोर्ट से जुड़े क्षेत्र आवाजाही में रुकावट, बढ़ते मालभाड़े की वजह से दबाव में हैं. एमएसएमई सेक्टर जो कैश फ्लो पर डिपेंड रहता है, इस संकट से सबसे ज्यादा असर इसी पर हो रहा है. सरकार की इस योजना में एमएसएमई को बिना किसी गारंटी के लोन देने का प्रॉविजन हो सकता है. इन लोन की गारंटी खुद सरकार देगी, जिससे बैंकों के लिए कर्ज देना आसान हो जाएगा. इससे छोटे व्यापारियों को अपना व्यापार बचाने और कर्मचारियों का सैलरी समय पर देने में मदद मिलेगी.
सरकार का मास्टर स्ट्रोक
अधिकारियों ने बताया कि अभी के समय में देश की बैंकिंग या अर्थव्यवस्था में कोई बड़ा टेंशन नहीं है, लेकिन सरकार भविष्य के लिए तैयारी कर रही है. अगर स्थिति बिगड़ती भी है, तो समय पर मिली ये मदद बड़े आर्थिक नुकसान को टाल सकती है. एक्सपर्ट का भी मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में टेंशन कम हो भी जाता है, तब भी सभी सेक्टर्स को नॉर्मल होने में समय लगेगा. सप्लाई रुकने से रिकवरी धीमी हो सकती है. ऐसे में ये 2 लाख करोड़ रुपये की क्रेडिट लाइन संजीवनी का काम करेगी.
EY की रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर ये जंग लंबी खिंचती है, तो ये भारत की जीडीपी ग्रोथ पर बड़ा असर डाल सकती है. देश की वित्त वर्ष 2027 की जीडीपी ग्रोथ रेट में 1 फीसदी तक की कमी आ सकती है. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और लॉजिस्टिक्स की कॉस्ट बढ़ना भारत के लिए बड़ी चुनौतियां हैं.
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