- मैन्युफैक्चरिंग विस्तार कर रहा. रोजगार में बढ़ोतरी हो रही. घरेलू मांग मजबूत और कंपनियों का भरोसा कायम है.
- ग्राहकों की बढ़ती मांग और नए कारोबार में इजाफा रहा. सर्विस सेक्टर में मजबूती. औद्योगिक उत्पादन में भी तेजी.
- इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर, रेलवे पर अधिक फोकस, रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों में भी मजबूती.
भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत होती दिख रही है. सरकार की ओर से जारी ताजा आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बावजूद देश में विकास की रफ्तार बनी हुई है. मजबूत जीडीपी ग्रोथ, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में तेजी, रिकॉर्ड वाहन बिक्री, बढ़ता जीएसटी कलेक्शन और मजबूत निर्यात इस बात का संकेत हैं कि देश में मांग और निवेश दोनों लगातार बढ़ रहे हैं.
भारत की आर्थिक रफ्तार कैसी रही?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% की दर से बढ़ी, जिससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहा. सबसे खास बात यह रही कि वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ बढ़कर 7.8% पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 7.0% थी. इस तेजी के पीछे मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर, उपभोक्ता खर्च और निवेश में बढ़ोतरी प्रमुख वजह रही.

सर्विस सेक्टर बना सबसे बड़ी ताकत
एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई अप्रैल के 58.8 से बढ़कर मई 2026 में 59.8 पहुंच गया. यह नवंबर 2025 के बाद सबसे तेज बढ़ोतरी है. इस तेजी की वजह ग्राहकों की बढ़ती मांग, नए क्लाइंट जुड़ना और नए कारोबार में इजाफा रहा. नए ऑर्डर पिछले छह महीनों में सबसे तेज गति से बढ़े. रोजगार में बढ़ोतरी और निर्यात मांग में सुधार ने भी सर्विस सेक्टर को मजबूती दी.
औद्योगिक उत्पादन में भी तेजी
भारत का इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) अप्रैल के 4.9% से बढ़कर मई 2026 में 5.1% हो गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 5.5% की बढ़ोतरी
बिजली और गैस सप्लाई में 9.9% की वृद्धि हुई. मोटर वाहन उत्पादन 14.5%, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट 20.8% और बेसिक मेटल्स 4.6% बढ़े. कैपिटल गुड्स का उत्पादन 12.9% बढ़ा, जो निवेश और औद्योगिक क्षमता बढ़ने का संकेत है.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का क्या हाल रहा?
एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जून 2026 में 54.2 पर रहा. यह लगातार 37वें महीने 50 के ऊपर बना हुआ है, जिसका मतलब है कि देश का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार विस्तार कर रहा है. सर्वे के मुताबिक उत्पादन, नए ऑर्डर, रोजगार और खरीदारी गतिविधियों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. इससे पता चलता है कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और कारोबारी माहौल को लेकर कंपनियों का भरोसा कायम है.
इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर जारी
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत से ही पूंजीगत खर्च तेज कर दिया है. अप्रैल-मई 2026 के दौरान सरकार ने 2.51 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 2.21 लाख करोड़ रुपये था. यानी सिर्फ दो महीनों में लगभग 29,650 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किए गए. इसका फायदा सड़क, रेलवे, स्टील, सीमेंट, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और निर्माण जैसे क्षेत्रों को मिल रहा है.

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रेलवे पर सबसे ज्यादा फोकस
भारतीय रेलवे ने अप्रैल-मई 2026 में 84,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए, जो उसके पूरे साल के पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) लक्ष्य का लगभग 30% है. यह पैसा रेलवे सुरक्षा, आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रेन सुरक्षा तकनीक, नई रेल लाइनों, गेज परिवर्तन और डबल लाइन बिछाने जैसे कामों पर लगाया जा रहा है. सरकार का फोकस सड़क, रेलवे, टेलीकॉम, रक्षा और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास पर बना हुआ है.

टैक्स कलेक्शन में भी शानदार बढ़ोतरी
सरकार की टैक्स वसूली लगातार मजबूत बनी हुई है. जून 2026 में जीएसटी कलेक्शन 13.9% बढ़कर लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि जून 2025 में यह 1.71 लाख करोड़ रुपये था.
17 जून 2026 तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 14.64% बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसमें कॉरपोरेट और व्यक्तिगत दोनों तरह के टैक्स से अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली.
पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में नरमी से सरकार को अपने वित्तीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

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रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों के आंकड़े
देश की रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों से जुड़े ताजा आंकड़े भी अर्थव्यवस्था की मजबूती दिखा रहे हैं.
- ई-वे बिल मई में 10.9% बढ़े, जिससे माल ढुलाई और व्यापार में तेजी का संकेत मिला.
- बिजली की मांग अप्रैल के 3.5% से बढ़कर मई में 11.2% हो गई, जो उद्योग और कारोबार में बढ़ती गतिविधियों को दर्शाती है.
- बंदरगाहों पर कार्गो ट्रैफिक अप्रैल के 2.4% से बढ़कर मई में 6.6% पहुंच गया.
- अप्रैल 2026 में देश में 26.11 लाख वाहन बिके, यह भारत के रिटेल ऑटो बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा अप्रैल रहा.
- मई में 25.31 लाख वाहन बिके और बिक्री में करीब 10% सालाना बढ़ोतरी दर्ज हुई.
- जून में भी पैसेंजर व्हीकल, SUV, इलेक्ट्रिक वाहन, दोपहिया और कमर्शियल वाहनों की मांग मजबूत बनी रही.
- ग्रामीण क्षेत्रों में ऑटोमोबाइल बिक्री 7.8% बढ़ी, जिससे साफ है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत बनी हुई है.
कुल मिलाकर ताजा आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है.
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