भारत और चीन के बीच कूटनीतिक कड़वाहट के बीच एक बड़ी आर्थिक सुगबुगाहट देखने को मिली है. गलवान घाटी संघर्ष के बाद उपजे तनाव और करीब पांच साल के लंबे अंतराल के बाद, भारत का एक उच्च स्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल चीन की आर्थिक राजधानी शंघाई पहुंचा. पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के नेतृत्व में पहुंचे इस डेलिगेशन की यात्रा को व्यापारिक गलियारों में 'बर्फ पिघलने' के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. चीनी दूतावास ने इस मुलाकात को विशेष महत्व देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर तस्वीरें साझा की हैं, जो दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों की नई शुरुआत की ओर इशारा करती हैं.
यूरोप के दिग्गज और भारत के स्टार्ट-अप्स एक साथ
इस बैठक की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहुपक्षीय स्वरूप रहा. शंघाई में आयोजित इन बैठकों में न केवल भारत और चीन के दिग्गज जुटे, बल्कि यूरोप के बिजनेस लीडर्स ने भी शिरकत की. 'भविष्य के भारत' (Future of India) थीम पर केंद्रित इस चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे वैश्विक तकनीक और भारतीय बाजार मिलकर दुनिया की ऊर्जा जरूरतों को बदल सकते हैं.
आठ सदस्यीय भारतीय डेलिगेशन में दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के प्रमुख उद्योगपति शामिल थे. साथ ही साथ ईवी (EV) चार्जिंग, ईवी ट्रक्स, बैटरी स्टोरेज और एनर्जी ट्रेडिंग क्षेत्र के 6 उभरते हुए स्टार्ट-अप्स भी शामिल थे.
First Indian business delegation to visit China in 5+ years just wrapped up in Shanghai.
— Yu Jing (@ChinaSpox_India) April 6, 2026
Focus: EVs. Clean energy. Supply chains.
The thaw is real. 🇨🇳🇮🇳 #ChinaIndia #PHDCCI pic.twitter.com/eXyKztTPjX
इन सेक्टर्स में 'ड्रैगन' का दम और भारत की रुचि
छह दिनों की इस यात्रा के दौरान भारतीय कारोबारियों ने चीन की उन तकनीकों का बारीकी से अध्ययन किया, जिसमें वो 'लीडर' बना हुआ है. मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं तलाशी गईं:
- EV और बैटरी तकनीक: लिथियम-आयन बैटरी उत्पादन के विभिन्न चरण और ऑटोमेशन.
- सोलर और विंड एनर्जी: सोलर पैनल की नई तकनीक, जो इमारतों के शीशों की तरह काम करती है और रात में रंगीन रोशनी देती है.
- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: 'एनर्जी बॉट्स' जैसे आधुनिक समाधान जो भविष्य की सड़कों पर चार्जिंग की समस्या खत्म कर सकते हैं.
- मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर: शंघाई, झेजियांग और वूशी जैसे क्षेत्रों में नए मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर चर्चा.
शून्य से नई शुरुआत: राजदूत और काउंसल जनरल का सहयोग
PHDCCI की सहायक महासचिव शालिनी एस. शर्मा के नेतृत्व में इस दल ने शंघाई में भारत के महावाणिज्य दूत (Consul General) प्रतीक माथुर से मुलाकात की. श्री माथुर ने पीएचडी चैंबर को बधाई देते हुए कहा कि संबंधों की बहाली और शंघाई में नए कार्यालय खुलने के बाद यह पहला भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल है. उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि पूर्वी चीन का देश के कुल व्यापार में 41 प्रतिशत हिस्सा है, इसलिए यह सहयोग का सबसे उपयुक्त समय है.
चीनी कंपनियों में जबरदस्त उत्साह
शंघाई न्यू एनर्जी इंडस्ट्री एसोसिएशन (SNEIA) द्वारा आयोजित बी2बी (B2B) बैठकों में चीनी कंपनियों का उत्साह देखने लायक था. कई चीनी अधिकारी भारतीय डेलीगेट्स से मिलने के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके आए थे.
PHDCCI के CEO डॉ रंजीत मेहता ने इस यात्रा के महत्व पर कहा, 'चीन रिन्यूएबल एनर्जी और ईवी मैन्युफैक्चरिंग में ग्लोबल लीडर है, जबकि भारत अपनी क्लीन एनर्जी क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है. दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और तकनीक की लागत कम करने में मील का पत्थर साबित होगी.'
भारतीय स्टार्ट-अप्स को मिला 'बूस्टर डोज'
इस यात्रा का सीधा असर भारतीय उद्यमियों के आत्मविश्वास पर दिखा है. गुरुग्राम स्थित ई-जीरो मोबिलिटी के संस्थापक विनीत कुमार ने बताया कि इस यात्रा के कारण उनके प्रोजेक्ट की टाइमलाइन में 16 सप्ताह (लगभग 4 महीने) की कमी आई है, क्योंकि उन्हें सीधे चीनी सप्लायर्स और महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग पार्ट्स तक पहुंच मिल गई है.
वहीं, अहमदाबाद की नियो ऊर्जा और लखनऊ की रीप्राइम एनर्जी के प्रतिनिधियों ने माना कि चीन की मैन्युफैक्चरिंग गहराई और भारत की बढ़ती मांग का मेल 'क्लीन एनर्जी' के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है.
हालांकि सीमा पर कूटनीतिक चुनौतियां बरकरार हैं, लेकिन इस बिजनेस डेलिगेशन की यात्रा ने यह साफ कर दिया है कि 'ग्रीन एनर्जी' और 'भविष्य की तकनीक' के मोर्चे पर दोनों देश एक-दूसरे की जरूरत बन सकते हैं. चीनी दूतावास ने मीटिंग की तस्वीरों को सार्वजनिक किया, जो कि स बात का प्रमाण है कि बीजिंग भी भारत के विशाल बाजार और बढ़ते स्टार्ट-अप ईकोसिस्टम के साथ फिर से जुड़ने को बेताब है.
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