Pension Taxation Rules: रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन को अक्सर बुजुर्गों का आखिरी सहारा माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी इस मेहनत की कमाई पर भी आयकर विभाग (Income Tax Department) की पैनी नजर होती है? पेंशन को लोग अक्सर सुरक्षित आय मानते हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि पेंशन भी टैक्स के दायरे में आ सकती है. ज्यादातर पेंशनर्स को सही नियमों की जानकारी नहीं होती, जिसके कारण वे टैक्स प्लानिंग में गलती कर बैठते हैं. कई रिटायर्ड लोग हर साल जरूरत से ज्यादा टैक्स भर देते हैं या गलत ITR फाइल कर देते हैं.
अगर आप भी यह सोचते हैं कि पेंशन तो पूरी तरह टैक्स फ्री होती है, तो आपको यह समझना जरूरी है कि ऐसा हर मामले में सही नहीं है. पेंशन पर टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आपको पैसा किस तरह मिल रहा है, आप किस सेक्टर से रिटायर हुए हैं, और आपने कौन-सा टैक्स सिस्टम चुना है. आइए समझते हैं कि आपकी पेंशन के किस हिस्से पर टैक्स लगेगा और कहां आप टैक्स बचा सकते हैं.
भारत में टैक्स के नजरिए से पेंशन को दो कैटेगरी में बांटा गया है...
1. अनकम्यूटेड पेंशन (Uncommuted Pension):
यह वह पेंशन है जो आपको हर महीने नियमित रूप से मिलती है यानी आपकी मंथली इनकम.. इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, इसे 'Income from Salary' (वेतन से आय) माना जाता है. इस पर आपकी टैक्स स्लैब (पुरानी या नई व्यवस्था) के हिसाब से टैक्स लगता है.सीधी भाषा में समझें तो जैसे नौकरी में सैलरी पर टैक्स लगता था, वैसे ही मंथली पेंशन पर भी लगेगा
2. कम्यूटेड पेंशन (Commuted Pension)
कई बार कर्मचारी अपनी भविष्य की मंथली पेंशन का एक हिस्सा पहले ही 'सरेंडर' कर देते हैं ताकि उन्हें रिटायरमेंट के वक्त एक साथ मोटी रकम मिल सके. इसे ही एकमुश्त (lump sum) या कम्यूटेड पेंशन कहते हैं.
सरकारी vs प्राइवेट कर्मचारियों के लिए नियम
अगर आप केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय प्राधिकरण (Local Authority) या डिफेंस से रिटायर हुए हैं, तो आपके लिए नियम बेहद आसान हैं.सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली एकमुश्त (Commuted) पेंशन पूरी तरह टैक्स फ्री होती है. हालांकि,सशस्त्र बलों के उन जवानों की पूरी डिसेबिलिटी पेंशन (Disability Pension) टैक्स के दायरे से बाहर है, जो किसी फिजिकल डिसेबिलिटी कारण सर्विस से बाहर हुए हैं.
प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए कम्यूटेड पेंशन पर टैक्स की छूट के नियम थोड़े अलग हैं . ये इस बात पर निर्भर करती है कि उन्हें ग्रेच्युटी (Gratuity) मिली है या नहीं.
- अगर आपको रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी मिली है, तो उसकी कम्यूटेड पेंशन का केवल एक-तिहाई (1/3) हिस्सा ही टैक्स फ्री होगा.बाकी 2/3 पर टैक्स लगेगा.
- अगर ग्रे ग्रेच्युटी नहीं मिली है, तो आपकी कम्यूटेड पेंशन के 50% (आधे) हिस्से पर टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है.बाकी 50% राशि मिलने पर आपको अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स चुकाना होगा.
फैमिली पेंशन पर टैक्स नियम
जब किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है और उसके परिवार को पेंशन मिलती है जिसे फैमिली पेंशन (Family Pension) कहते हैं. इसका टैक्स कैलकुलेशन थोड़ा अलग है. इसलिए सबसे ज्यादा गलतफहमी यहीं होती है.फैमिली पेंशन को सैलरी ( Salary Income) नहीं मानी जाता.इसे अन्य स्रोतों से आय (Income from Other Sources) की कैटेगरी में रखा जाता है.आपको इसमें एक स्टैंडर्ड छूट मिलती है
स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction)
- वर्तमान में, कुल पेंशन का एक-तिहाई (1/3) या 15,000 रुपये (जो भी कम हो) की टैक्स छूट मिलती है.
- नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) चुनने वालों के लिए सरकार ने इस सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये तक करने का प्रावधान किया है.
- यदि कोई जवान देश की सेवा करते हुए शहीद होता है, तो उनके परिवार को मिलने वाली पूरी पेंशन टैक्स फ्री होती है.
- अगर कोई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान घायल हो जाता है.और उसे डिसेबिलिटी पेंशन मिलती है,तो वह पूरी तरह टैक्स फ्री होती है.
ITR भरते करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- मंथली पेंशन को हमेशा 'Income from Salary' हेड के तहत दिखाएं.
- सैलरीड की तरह पेशनर्स को भी पुरानी और नई दोनों टैक्स रिजीम (Old vs New) में 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है . सही टैक्स रेजीम चुनें और इसका फायदा उठाएं.
- सीनियर सिजिटन जिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक है वे धारा 80TTB के तहत बैंक या पोस्ट ऑफिस ब्याज पर 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त कटौती का लाभ ले सकते हैं.80C, 80D जैसे डिडक्शन का उपयोग करें. अगर लागू हो HRA/Medical जैसी छूट का फायदा लें.
अब आप समझ गए होंगे कि हर पेंशन टैक्स फ्री नहीं होती है. मंथली पेंशन पर टैक्स लगता है जबकि एकमुश्त पेंशन का नियम अलग-अलग है. इसके अलावा फैमिली पेंशन का टैक्स अलग तरीके से लगता है.
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