भारत की समुद्री और ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी कामयाबी मिली है. तीन भारतीय झंडे वाले कच्चे तेल के टैंकर होर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर गए और अब बड़ी मात्रा में स्ट्रेटेजिक कार्गो लेकर भारतीय बंदरगाहों के रास्ते में हैं. यह होर्मुज समेत इलाके में भू-राजनीतिक बदलावों के बीच हुआ है. केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए समन्वित सरकारी प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए सफल मार्ग की घोषणा की. केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'सुरक्षित मार्ग! तीन भारतीय ध्वज वाले कच्चे तेल के टैंकर, देश वैभव, देश विभोर और सनमार हेराल्ड, 94 भारतीय चालक दल के सदस्यों के साथ 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक माल लेकर आज होर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर गए हैं और भारत के रास्ते पर हैं.'
सर्बानंद सोनोवाल ने बताया, 'पीएम मोदी के निर्णायक नेतृत्व में भारत सरकार भारत के समुद्री हितों को सुरक्षित करने के लिए सबसे ज्यादा प्राथमिकता पर काम कर रही है. हमारा मंत्रालय भारत के नाविकों और ऊर्जा लाइफलाइन की पूरी सुरक्षा की गारंटी देने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रहा है.'
कब भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचेंगे टैंकर
अधिकारियों के अनुसार, तीन जहाज 'देश वैभव', 'देश विभोर', और 'सनमार हेराल्ड' 24 जून से 1 जुलाई के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है. यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक जरूरी सप्लाई चेन मूवमेंट के पूरा होने का प्रतीक है. देश वैभव के 24 जून को वाडिनार पोर्ट पर पहुंचने की उम्मीद है, जबकि देश विभोर के उसी दिन सिक्का पोर्ट पहुंचने की संभावना है. इसके अलावा, तीसरा जहाज, सनमार हेराल्ड, जो 20 जून को होर्मुज स्ट्रेट को पार कर गया था, 1 जुलाई को पारादीप पोर्ट पर पहुंचने वाला है.
महीनों बाद होर्मुज पर तनाव हुआ कम
भारतीय जहाजों ने ऐसे समय पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार किया है, जब इलाके में तनाव कम हो रहा है. अमेरिका ने इससे पहले, 18 जून को, इलाके के झगड़े को कम करने के मकसद से एक छोटी सी डिप्लोमैटिक कामयाबी के बाद होर्मुज स्ट्रेट के जरिए समुद्री आवाजाही पर लगी रोक हटा दी थी. इस फैसले से तेल टैंकरों को स्ट्रेटेजिक चैनल के जरिए ऑपरेशन फिर से शुरू करने की इजाजत मिल गई, जो सुरक्षा चिंताओं की वजह से महीनों से काफी हद तक रुका हुआ था. उसी दिन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक समझौते पर इलेक्ट्रॉनिकली हस्ताक्षर किया. इसमें तेहरान के लिए अपने संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक को कम करने और कुछ प्रतिबंध में ढील देने के नियम शामिल हैं. इस कदम ने ईरान के तेल एक्सपोर्ट का रास्ता खोल दिया और शिपिंग कॉरिडोर को फिर से खोलने में मदद की. इससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को राहत मिली.
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भारत के लिए इन तेल टैंकरों का सुरक्षित आवागमन समुद्री ऊर्जा आपूर्ति मार्गों के काफी महत्व रखता है, क्योंकि देश अभी भी अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. अधिकारियों के अनुसार, संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय लगातार जारी है. इस सफल ट्रांजिट को एक अहम ऑपरेशनल माइलस्टोन के तौर पर देखा जा रहा है, जो गल्फ क्षेत्र में डिप्लोमैटिक विकास और भारत के अपनी समुद्री ऊर्जा लाइफलाइन को सुरक्षित रखने पर लगातार फोकस, दोनों को दिखाता है.
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