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Gold Demand jump: तीन महीनों में ही रिकॉर्डतोड़ खरीदारी, भारत-चीन समेत इन देशों में गोल्ड पर टूट पड़े ग्राहक: WGC रिपोर्ट

Gold Demand In India:बाजार विश्लेषण से पता चलता है कि भारत और चीन जैसे बाजारों में ज्वेलरी की कुछ डिमांड गोल्ड बार और सिक्कों में बदल गई, जहां ज्वेलरी एक अप्रत्यक्ष निवेश के रूप में काम कर सकती हैं. केंद्रीय बैंकों ने ओवरऑल डिमांड को सपोर्ट देना जारी रखा, जिससे पहली तिमाही में वैश्विक भंडार में 244 टन की बढ़ोतरी देखी गई.

Gold Demand jump: तीन महीनों में ही रिकॉर्डतोड़ खरीदारी, भारत-चीन समेत इन देशों में गोल्ड पर टूट पड़े ग्राहक: WGC रिपोर्ट
भारत में कितनी है सोने की डिमांड.
  • वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार पहली तिमाही में सोने की मांग 1,231 टन रही
  • सोने में रिटेल निवेशकों की रुचि बढ़ी जिससे सिक्कों और छड़ों की मांग 42 प्रतिशत बढ़ी है
  • चीन में सोने की मांग रिकॉर्ड स्तर 207 टन तक पहुंची है जो पिछले वर्ष की तुलना में 67 प्रतिशत अधिक है
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नई दिल्ली:

सोने की रिकॉर्ड कीमतों की वजह से डिमांड लगातार बदल रही है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की 2026 की पहली तिमाही की सोने की मांग रुझान रिपोर्ट से पता चला है कि कुल तिमाही में सोने की मांग 1,231 टन तक पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में 2% ज्यादा है. मांग में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद, मांग का मूल्य रिकॉर्ड 193 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 74% ज्यादा है. 

सोने में बढ़ी रिटेल इन्वेस्टर्स की दिलचस्पी

दुनिया भर में, रिटेल इन्वेस्टर्स सोने की बढ़ती कीमत और सुरक्षित निवेश की वजह से इसकी तरफ खिंचे जा रहे हैं. जिसकी वजह से सोने की छड़ों और सिक्कों की मांग पिछले साल की तुलना में 42% बढ़कर 474 टन हो गई. चीन में मांग पिछले साल की तुलना में 67% बढ़कर रिकॉर्ड 207 टन पहुंच गई, जो 2013 की दूसरी तिमाही के पिछले रिकॉर्ड 155 टन से बहुत ज्यादा है. 

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भारत में लोग सोने के सिक्के ज्यादा खरीद रहे

भारत, दक्षिण कोरिया और जापान समेत अन्य ईस्टर्न मार्केट में भी गोल्ड स्टिक्स और सिक्कों की ज्यादा खरीदी हुई, जिससे सोने की मांग में चल रहे स्ट्रक्चरल बदलाव में योगदान मिला. अमेरिका और यूरोप में भी सोने की छड़ों और सिक्कों की मांग 14% और 50% बढ़ी, जिससे डिमांड और मजबूत हो गई.  

पहली तिमाही में फिजिकल गोल्ड ईटीएफ की मांग पॉजिटिव रही. होल्डिंग्स में 62 टन की बढ़ोतरी देखी गई. यह मुख्य रूप से एशियन लिस्टेड फंड की लगतार मजबूती की वजह से हुई. जिन्होंने तिमाही के दौरान 84 टन की बढ़ोतरी दर्ज की. मार्च में अमेरिकी लिस्टेड फंड्स से बहुत ही भारी संख्या में गोल्ड निकाला गया. जिसकी वजह से मजबूत शुरुआत कुछ हद तक जरूर प्रभावित हुई. 

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ज्वेलरी की मांग में भारी गिरावट

इसके उलट तिमाही के दौरान आई तेजी की वजह से ज्वेलरी की मांग में भारी गिरावट देखी गई.  यह सालाना 23% गिरकर 300 टन रह गई. सभी प्रमुख बाजारों में ज्लेवरी की मांग में कमजोरी दर्ज की गई. चीन (-32%), भारत (-19%) और मध्य पूर्व (-23%) में भी बड़ी गिरावट देखी गई.  ऐसा नहीं है कि ज्वेलरी की मांग सिर्फ गिरी ही है. कीमतों को देखें तो आभूषणों की मांग बढ़ी है. जिससे पता चलता है कि सोने की रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद लोग इस पर खर्च करना सही समझते हैं.

पहली तिमाही में वैश्विक भंडार में 244 टन की बढ़ोतरी

बाजार विश्लेषण से पता चलता है कि कुछ ज्वेलरी की मांग गोल्ड बार और सिक्कों में बदल गई, खासकर चीन और भारत जैसे बाजारों में, जहां ज्वेलरी एक अप्रत्यक्ष निवेश के रूप में काम कर सकते हैं. केंद्रीय बैंकों ने ओवरऑल डिमांड को सपोर्ट देना जारी रखा, जिससे पहली तिमाही में वैश्विक भंडार में 244 टन की बढ़ोतरी देखी गई. तुर्की गणराज्य के केंद्रीय बैंक, रूसी संघ के केंद्रीय बैंक और अज़रबैजान गणराज्य के राज्य तेल कोष समेत कुछ सरकारी संस्थानों द्वारा बिक्री में बढ़ोतरी के बावजूद, खरीददारी पिछली तिमाही और 5 साल के औसत दोनों से ज्यादा रही.

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