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पेट्रोल-डीजल क्या और महंगा होगा? NDTV के शो में इकोनॉमिस्ट ने समझा दिया तेल का 'नंबर गेम'

Fuel prices hike India 2026: मिडिल ईस्ट में चल रही टेंशन की वजह से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. एनडीटीवी के खास शो द नंबर्स गेम में एक्सपर्ट ने बताया कि ये बढ़ोतरी आगे भी जारी रह सकती है.

पेट्रोल-डीजल क्या और महंगा होगा? NDTV के शो में इकोनॉमिस्ट ने समझा दिया तेल का 'नंबर गेम'
Fuel Prices Hike India 2026: एक्सपर्ट के अनुसार भारत में पेट्रोल-डीजल और महंगा होगा.

Fuel Prices Hike India 2026: मिडिल ईस्ट में टेंशन के बीच कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं, जिसका असर भारत में भी दिख रहा है. हाल ही में कई बार दाम बढ़ चुके हैं. एनडीटीवी के स्पेशल प्रोग्राम द नंबर्स गेम में देश के बड़े इकोनॉमिस्ट के अनुसार ये बढ़ोतरी अभी रुकने वाली नहीं है. तेल कंपनियों को लगातार नुकसान हो रहा है. वैश्विक बाजारों में प्रेशर बना हुआ है, इन सभी बातों को देखते हुए आने वाले समय में पेट्रोल‑डीजल के दाम और तेजी से बढ़ सकते हैं.

Fuel Prices Hike India 2026

Fuel Prices Hike India 2026

ब्रेक-इवन का गणित

दिल्ली की बात करें, मई महीने में ही पेट्रोल की कीमतें 94.77 रुपये से बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गईं. लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि तेल कंपनियों के लिए ब्रेक-इवन यानी ना नुकसान, ना फायदा वाली स्थिति तब आएगी, जब पेट्रोल की कीमत करीब 115.12 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचेगी. यही स्थिति डीजल के साथ बनी हुई है. डीजल के दाम 87.67 रुपये से बढ़कर 95.2 रुपये प्रति लीटर तो हो गए हैं, लेकिन कंपनियों को नुकसान से बचने के लिए इसकी कीमत को 108.2 रुपये तक ले जाना होगा. इसका सीधा मतलब ये है कि आज भी तेल कंपनियां प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल पर करीब 13 से 15 रुपये का नुकसान झेल रही हैं.

Fuel Prices Hike India 2026

Fuel Prices Hike India 2026

'संकट सिर्फ भारत में ही नही'

अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने कहा कि ये संकट पूरी तरह से ग्लोबल है. ये किसी एक देश की समस्या नहीं है. फरवरी और मार्च के महीने से जियो पॉलिटिक्स बदली है और अभी जितनी भी पेट्रोल-डीजल में बढ़ोतरी हुई है वो नुकसान को देखते हुए ठीक है. सुरजीत भल्ला ने साफ कहा कि इंटरनेशनल मार्केट की स्थिति को देखते हुए देश में तेल की कीमतों को ब्रेक इवन पॉइंट पर ले जाने के अलावा कोई ऑप्शन मौजूद नहीं है.

अर्थशास्त्री हर्ष गुप्ता ने कहा कि भारत के पास टैक्स कुशन है, क्योंकि सरकार फ्यूल पर बड़ा टैक्स ले रही है. दुनिया भर के देशों में जहां 25 से 40 फीसदी तक कीमतें बढ़ चुकी हैं, वहीं भारत में कीमतों की बढ़ोतरी 20 से 25 फीसदी की लिमिट में रह सकती हैं. हालांकि उन्होंने एक साथ पैसे बढ़ाने की बजाय स्टेप बाय स्टेप कीमतों में इजाफे को सही माना. ऐसा इसलिए क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें एक साथ गिरती हैं, ऐसे में आम नागरिक पर एक साथ बोझ ना पड़े.

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लंबे समय तक बनी रहेंगी महंगी कीमतें

कीमतें कब तक महंगी बनी रहेंगी इस सवाल पर अर्थशास्त्री डॉ. रतिन रॉय ने बताया कि देश को लंबे समय के लिए बढ़ी हुई कीमतों के लिए तैयार रहना चाहिए. मान लीजिए अगले 15 दिनों में मिडिल ईस्ट में टेंशन खत्म हो भी जाती है तब भी ग्लोबल सप्लाई चेन, इंफ्रा को दुबारा काम के लिए बनाने में कम से कम 7 से 8 महीने का समय लग ही जाएगा. 

सरकार के पास क्या है ऑप्शन?

डॉ. रॉय ने बताया कि सरकार को पेट्रोल, डीजल की बढ़ती कीमतों का पूरा बोझ बाजार पर ही छोड़ देना चाहिए. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि गरीब, पिछड़े और किसान को आर्थिक मदद देना जरूरी है, क्योंकि महंगाई का सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर पड़ता है. इसलिए सरकार को इन जरूरतमंद लोगों के बैंक खातों में सीधे डीबीटी के जरिए सब्सिडी देनी चाहिए. डॉ. रॉय के अनुसार जो लोग पैसा दे सकते हैं, उन्हें इस संकट के समय साथ देना चाहिए. देश की अर्थव्यवस्था को संतुलित करने और चालू घाटे को कंट्रोल में रखने के लिए ये जरूरी है.

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