Rupees 500 Fake Currency Note: देश में नकली नोटों के मामले बढ़ रहे हैं. खास तौर से 500 रुपये के नकली नोटों के मामले 20 फीसदी से ज्यादा बढ़े हैं. बैंकिंग सिस्टम में ये नोट पकड़े भी जा रहे हैं. केंद्रीय बैंक RBI ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि एक साल के भीतर 2.29 लाख से ज्यादा नकली नोट पकड़े गए और इनमें सबसे ज्यादा 500 रुपये के नकली नोट शामिल थे. इनकी संख्या करीब 1.42 लाख थी. RBI की एनुअल रिपोर्ट में 100, 200, 50 और 20 रुपये के नोटों के बारे में भी खुलासे हुए हैं. केंद्रीय बैंक की रिपोर्ट में करेंसी नोटों को लेकर और भी ढेर सारी जानकारियां सामने आई हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, 20 रुपये के नकली नोटों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, जबकि 50, 100 और 200 रुपये के नकली नोटों में गिरावट दर्ज की गई है. 2,000 रुपये के नोटों के चलन से बाहर होने के कारण इस मूल्य वर्ग में नकली नोटों के मामले भी काफी कम हो गए.
500 रुपये के नोटों का चलन
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 500 रुपये के नोटों का चलन FY26 में 11.2 फीसदी बढ़कर 7,05,482 लाख हो गई. मार्च 2025 तक ये संख्या 6,34,458 लाख थी. मूल्य के लिहाज से देखें तो मार्च 2026 के अंत तक 500 रुपये के कुल नोटों की वैल्यू 35.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई. पिछले साल तक ये आंकड़ा 31.72 लाख करोड़ रुपये था. RBI ने कहा कि चलन में मौजूद कुल नोटों की संख्या में 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 41.2% रही, जो सबसे अधिक है. वहीं, मूल्य के आधार पर इनकी हिस्सेदारी 86% से भी ज्यादा रही.
सिक्कों और 2,000 के नोटों पर अपडेट
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 2000 रुपये के नोटों को वापस लेने के लिए मई 2023 में शुरू की गई इस वित्त वर्ष में भी जारी रही. मार्च 2026 तक इस मूल्य वर्ग के कुल 98.45% नोट बैंकिंग प्रणाली में वापस आ चुके थे.
सिक्कों के मामले में भी वृद्धि दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सिक्कों की कुल संख्या में 4.5% और मूल्य में 11.4% की बढ़त रही. एक, दो और पांच रुपये के सिक्के कुल संख्या का करीब 80% हिस्सा रहे.
आरबीआई ने बताया कि 2025-26 में नोटों की छपाई के लिए मांग एक साल पहले की तुलना में कम रही, जिससे छपाई पर होने वाला खर्च एक साल पहले के 6,379 करोड़ रुपये से घटकर 4,875 करोड़ रुपये रह गया.
उच्च मूल्य वर्ग के नोटों की छपाई मांग में कमी आई, जबकि 10 रुपये के नोटों की छपाई में बढ़ोतरी हुई. यह छोटे मूल्य के नोटों की बढ़ती जरूरत को दर्शाता है. इसके अलावा, खराब हो चुके नोटों के निपटान में भी करीब 28.6% की गिरावट दर्ज की गई.
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