एलन मस्क की स्पेसएक्स अमेरिकी शेयर मार्केट में लिस्ट होने के लिए तैयार है. 12 जून को बाजार में आते ही स्पेसएक्स अपनी ही सिस्टर कंपनी टेस्ला को वैल्यूएशन में पीछे कर सकती है. यहां एक सवाल निवेशकों के मन में लगातार आ रहा है कि आखिर मस्क को इतने 1.77 ट्रिलियन डॉलर वाले बड़े आईपीओ को लाने की जरूरत क्यों पड़ी? तो इसका जबाव जुड़ा है मस्क के उस सपने से जुड़ा है, जिसका नाम स्टारशिप और मिशन मार्स है. इस सपने को पूरा करने के लिए 407 फीट लंबे रॉकेट का इस्तेमाल होना है, जिसके जरिए कई बार इंसानों को मंगल और चांद पर ले जाया जाएगा. आसान भाषा में कहें तो मस्क का विजन एकदम क्लियर है कि इस रॉकेट को पूरी तरह से रीयूजेबल लॉन्च सिस्टम के साथ बनाया जाए.
15 बिलियन डॉलर से ज्यादा का खर्च
एक बात क्लियर है कि जब एक ही रॉ़केट बार-बार स्पेस में जाएगा तो इससे मिशन की कॉस्ट भी कम हो जाएगी. इसी कम कॉस्ट के चलते मस्क आम इंसानों के लिए भी मंगल ग्रह के दरवाजे खोलना चाहते हैं. रॉयटर्स की खबर के अनुसार मस्क ने एआई टू सैटेलाइट ग्रुप ने स्टारशिप को डेवलप करने में अभी तक 15 बिलियन डॉलर से ज्यादा की रकम खर्च कर दी है. फंडिंग की इसी बड़ी जरूरत को पूरा करने के लिए इस आईपीओ को मस्क का बड़ा हथियार माना जा रहा है.
टेस्ला को पीछे कर स्पेसएक्स जाएगी आगे?
एक्सपर्ट की मानें तो 12 जून को जैसे ही स्पेसएक्स लिस्ट होगी वैसे ही वैल्यूएशन के मामले में ये टेस्ला से आगे निकल जाएगी. स्पेसएक्स इस आईपीओ से 1.77 ट्रिलियन डॉलर जुटाने की कोशिश में है. ऐसे में कंपनी के फ्यूचर प्रोजेक्ट्स को लेकर निवेशक इस आईपीओ के दीवाना हो चुके हैं.
कंपनी को पिछले साल हुआ नुकसान
पीटीआई के अनुसार, स्पेसएक्स के आईपीओ फाइलिंग से पता चला है कि कंपनी को पिछले साल 18.7 अरब डॉलर के रेवेन्यू पर ऑपरेशंस से 2.6 अरब डॉलर का घाटा हुआ था और इस साल की शुरुआत में भी घाटा बढ़ता ही गया. इसलिए आईपीओ के वैल्यूएशन को लेकर कई एक्सपर्ट पहले ही हैरान हो चुके हैं. हालांकि मस्क के भविष्य प्लान को देखते हुए निवेशक अभी भी एआई मॉडल पर दांव खेलने के लिए तैयार हैं.
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