Crude Oil Prices Surge: अभी 6 दिन पहले सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको (Aramco) की रास तानूरा रिफाइनरी (Ras Tanura Refinery) पर हमला और अब बहरीन की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी (BAPCO) पर हमला. ईरान ने एक बार फिर ग्लोबल तेल सप्लाई चेन पर बड़ा वार किया है. इजरायल और अमेरिका के साथ छिड़ी जंग में ईरान ने कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग को हवा देने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा. होर्मूज जलडमरूमध्य में तेल सप्लाई का रास्ता रोकने से पहले ही तेल सप्लाई बाधित है. इन परिस्थितियों के बीच तेल की कीमतें 115 डॉलर/बैरल के पार पहुंच गई है.
कुल जमा निचोड़ यही कि दुनिया में जब भी कहीं जंग छिड़ती है, उसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है. दो-चार-10 नहीं, बल्कि पिछले 50 सालों का इतिहास पलट कर देख लीजिए, युद्ध की हर चिंगारी ने कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आग लगाई है. आज फिर से वही मंजर है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से सोमवार को कुछ ही घंटों के भीतर कच्चे तेल की कीमत 25% से ज्यादा उछल गई. पिछले दो हफ्तों में ही क्रूड ऑयल की कीमतें करीब 50% बढ़ चुकी हैं.
पिछले 50 सालों में कई बड़े युद्ध हुए और हर बार यही हुआ है.
आज क्यों मचा है हाहाकार?
आज क्रूड ऑयल में तेजी यूएस ईरान-इजरायल के बीच जारी युद्ध की वजह से आई है. इससे दुनिया के सबसे अहम सप्लाई रूट 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से तेल के सप्लाई में रुकावट आई है. खाड़ी देशों द्वारा प्रोडक्शन में कटौती ने इस क्राइसिस को और बढ़ा दिया है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं.

70 के दशक का Yom Kippur War (1973)
तेल की कीमतों में सबसे बड़ा उछाल 1973 के योम किप्पुर युद्ध के दौरान आया था. तब अरब देशों ने इजरायल का साथ देने वाले देशों को तेल देना बंद कर दिया था. नतीजा ये रहा कि तेल की कीमतें $3 से बढ़कर $12 पर पहुंच गई थीं.यानी पूरे 300% की भारी बढ़ोतरी हुई ती. इसने पूरी दुनिया को अपनी एनर्जी स्ट्रैटेजी बदलने पर मजबूर कर दिया था.

ईरानी क्रांति और ईरान-इराक युद्ध (1978-81)
1978-80 (ईरानी क्रांति)
जब ईरान में सत्ता बदली, तो सप्लाई ठप होने के डर से कीमतें $14 से बढ़कर $39 हो गई थीं. यह 179% का बड़ा उछाल था.

1980-81 (ईरान-इराक जंग)
दो बड़े तेल उत्पादकों के बीच लड़ाई से कीमतें 25% बढ़कर $32 से $40 तक चली गई थीं.

खाड़ी युद्ध का दौर (1990-91Gulf War)
जब इराक ने कुवैत पर हमला किया, तो पूरी दुनिया में सप्लाई रुकने का डर बैठ गया. इस दौरान कच्चे तेल की कीमतें $17 से उछलकर $41 प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं, जो कि 141% की ग्रोथ थी.

21वीं सदी के युद्ध: इराक, लीबिया और यूक्रेन
इराक युद्ध(2002-03)
इस दौरान अनिश्चितता के चलते कीमतें 40% बढ़ीं और $25 से $35 तक पहुंच गईं.

लीबिया संकट (2011)
अफ्रीका के बड़े तेल उत्पादक देश में संकट से कीमतें 32% बढ़कर $125 तक चली गई थीं.

रूस-यूक्रेन जंग(2022)
रूस दुनिया का बड़ा एनर्जी एक्सपोर्टर है, इसलिए इस जंग ने कीमतों को 73% की बढ़त के साथ $75 से सीधे $130 पर पहुंचा दिया था.युद्द के दौरान तेल के कीमतों में आई ये तेजी दिखाता है कि जब भी मिडिल ईस्ट या किसी बड़े तेल उत्पादक क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो तेल की कीमतें रॉकेट की रफ्तार से बढ़ती हैं. इन दिनों ईरान-इजरायल युद्ध भी इसी पुराने और खतरनाक पैटर्न को दोहरा रहा है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं