Budget 2026: टैक्स भरने वालों के लिए वित्त मंत्री निर्माल सीतारमण ने बड़ा ऐलान किया. हालांकि यह ऐलान टैक्स स्लैब में छूट को लेकर तो नहीं पर टैक्स भरने के नियमों को लेकर था. सरकार ने 64 साल पुराने आयकर अधिनियम 1961 को रिटायर करने का फैसला कर लिया है. वित्त मंत्री सीतारमण ने बजट 2026 में बताया कि 1 अप्रैल 2026 से देश में नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू हो जाएगा. यह बदलाव केवल नाम का नहीं होगा, बल्कि यह आपके टैक्स भरने के तरीके और पेचीदा नियमों को पूरी तरह से बदलने वाला है. आइए जानते हैं क्या है इस नए कानून की खास बातें.
असेसमेंट ईयरका झंझट खत्म
अभी तक टैक्स भरने वालों को प्रीवियस ईयर और असेसमेंट ईयर के बीच बहुत ही कंफ्यूजन होता था. अब वहीं इस नए एक्ट में सिरदर्द को ही खत्म कर दिया. अब केवल एक ही टर्म होगा टैक्स ईयर. यानी जिस साल कमाई, उसी साल का टैक्स का हिसाब.
डिजिटल एसेट्स पर कड़ी नजर
नया कानून डिजिटल फर्स्ट सोच पर चलेगा.यानी अब क्लाउड सर्वर, सोशल मीडिया अकाउंट्स, ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और वेबसाइट्स से बनने वाले एसेट्स पर सरकार की सीधी नजर होगी. वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के दायरे को भी बढ़ा दिया है, जिसमें अब क्रिप्टोकरेंसी और क्रिप्टोग्राफिक लेजर वाली तकनीकें भी शामिल होंगी.
कम कानूनी पचड़े
1961 के पुराने कानून में रूल्स इतने उलझे हुए थे कि अक्सर टैक्स पेयर्स कानूनी पचड़े में फंस जाते थे. नए एक्ट का मकसद भाषा को सिंपल बनाना और टैक्स चोरी को रोकना है. सरकार ने टीडीएस से जुड़ी अलग-अलग धाराओं को खत्म कर अब एक ही जगह सेक्शन 393 में डाल दिया है, जिससे इसे समझना आसान होगा.
इतना सब कुछ बदलाव किस लिए?
बड़ा सवाल यह कि सरकार को इतने बड़े पैमाने पर बदलाव की क्या जरूरत पड़ी. इसके लिए वित्त मंत्री ने बताया कि इस कानून को आधुनिक बनाने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है. 1961 का कानून पुरानी अर्थव्यवस्था के हिसाब से था जबकि 2025 का एक्ट आज की डिजिटल और ग्लोबल इकोनॉमी की जरूरतों को पूरा करेगा.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं