अगर आप आने वाले महीनों में फ्लाइट से यात्रा करने की सोच रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए जरूरी है. एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के चलते भारतीय एयरलाइंस अब फ्लाइट्स कम करने पर विचार कर सकती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, मई में होने वाले अगले प्राइस रिविजन के बाद इस पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, एटीएफ की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने एयरलाइंस की लागत को काफी बढ़ा दिया है. इसी वजह से कंपनियां अभी वेट एंड वॉच मोड में हैं और मई में होने वाले अगले प्राइस रिविजन का इंतजार कर रही हैं, ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके.
ATF कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता,इन रूट्स पर कटौती की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, एयरलाइंस सबसे पहले उन रूट्स पर फ्लाइट्स कम कर सकती हैं जहां कमाई कम हो रही है. खासकर शॉर्ट-हॉल सेक्टर्स यानी छोटी दूरी वाली उड़ानें पर इसका ज्यादा असर देखने को मिल सकता है. जिन रूट्स पर पैसेंजर ऑक्यूपेंसी लगातार कम रहती है, वहां भी कटौती संभव है.
सरकार के फैसले पर नजर, कैप हटी तो बढ़ सकती हैं फ्लाइट कैंसिलेशन
एयरलाइंस इस बात का भी आकलन कर रही हैं कि सरकार एटीएफ प्राइस पर जो 25% की कैप लगाती है, उसमें कोई बदलाव होता है या नहीं. अगर यह कैप हटा दी जाती है, तो फ्यूल कीमतों में और तेज उछाल आ सकता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर एटीएफ प्राइस बढ़ोतरी पर लगी 25% की लिमिट हटा दी जाती है, तो घरेलू फ्लाइट कैंसिलेशन में तेजी आ सकती है. यानी यात्रियों को कम फ्लाइट्स और ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.
सरकार ने राहत देने के लिए उठाए कदम
वेस्ट एशिया संकट के असर को कम करने के लिए सरकार ने कुछ राहत भरे कदम भी उठाए हैं. इसमें बड़े एयरपोर्ट्स पर पार्किंग और लैंडिंग चार्ज में 25% की कटौती शामिल है. साथ ही, अप्रैल के लिए एटीएफ कीमतों में बढ़ोतरी को 25% तक सीमित रखा गया है.
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है, जिससे देश वैश्विक हालात पर काफी निर्भर हो जाता है. हाल ही में वेस्ट एशिया में बढ़े तनाव के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसका सीधा असर एविएशन सेक्टर पर पड़ रहा है.
सरकार ने बढ़ाया एक्साइज ड्यूटी का बोझ,तेलकंपनियों ने भी बढ़ाए ATF के दाम
इसी बीच सरकार ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर एक्साइज ड्यूटी भी बढ़ा दी है. एटीएफ पर ड्यूटी को ₹29.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹42 प्रति लीटर कर दिया गया है. हालांकि, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
सरकार के फैसलों के अलावा, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने भी एटीएफ की कीमतों में इजाफा किया है, जिससे एयरलाइंस की लागत और बढ़ गई है.इन सभी हालातों को देखते हुए एयरलाइंस फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं. कंपनियां फ्यूल प्राइस के ट्रेंड को करीब से मॉनिटर कर रही हैं और उसके बाद ही फ्लाइट नेटवर्क या कैपेसिटी में बदलाव का फैसला लेंगी.
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