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अमेरिकी कोर्ट में केस खारिज यानी अदाणी ग्रुप को 'कंप्‍लीट क्‍लीन चिट': महेश जेठमलानी

महेश जेठमलानी ने कहा, अमेरिकी कोर्ट ने आरोपों को 'विद प्रीज्यूडिस' के तहत खारिज किया है, जिसका मतलब है कि अब कभी दोबारा वही आरोप नहीं लगाए जा सकते.

अमेरिकी कोर्ट में केस खारिज यानी अदाणी ग्रुप को 'कंप्‍लीट क्‍लीन चिट': महेश जेठमलानी
महेश जेठमलानी
ANI

सीनियर वकील और राज्यसभा सदस्य महेश जेठमलानी के अनुसार, अमेरिकी अदालत द्वारा गौतम अदाणी, सागर अदाणी और विनीत जैन के खिलाफ आपराधिक आरोपों को खारिज करना इन तीनों लोगों के लिए पूरी तरह से क्लीन चिट मिलने जैसा है. अमेरिकी कोर्ट ने इन आरोपों को 'विद प्रीज्यूडिस' (with prejudice) के तहत खारिज किया है, जिसका मतलब है कि इन लोगों के खिलाफ दोबारा वही आरोप नहीं लगाए जा सकते. जेठमलानी ने कहा कि इससे आपराधिक कार्यवाही पूरी तरह खत्म हो जाती है और अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) या किसी अन्य अमेरिकी सिक्योरिटीज़ अथॉरिटी द्वारा इस मामले को दोबारा शुरू नहीं किया जा सकता.

कोर्ट ने DOJ से अतिरिक्त जानकारी और कारण मांगने के बाद धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों को खारिज करने की उसकी अर्जी को स्वीकार कर लिया था. अहम बात यह है कि कोर्ट ने DOJ के अनुरोध को बिना सोचे-समझे मंजूरी नहीं दी, बल्कि आरोपों को खारिज करने का फैसला लेने से पहले खुद मामले का विश्लेषण किया.

मुकदमा चलाने लायक कोई सबूत नहीं

महेश जेठमलानी ने बताया कि DOJ के मूल मामले में आरोप लगाया गया था कि अमेरिकी बॉन्डहोल्डर्स को दी गई जानकारी में अदाणी ग्रुप को मिले सोलर प्रोजेक्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़े भारत में किए गए भुगतानों का जिक्र नहीं किया गया था. हालांकि, उन्होंने कहा कि DOJ ने यह आरोप नहीं लगाया था कि उन कॉन्ट्रैक्ट्स को हासिल करने के लिए असल में रिश्वत दी गई थी. उन्होंने कहा कि इसके बजाय, मामला रिश्वत देने की कथित साज़िश से जुड़ा था, जिसके लिए रिश्वत देने के समझौते का कोई सबूत नहीं था.

जेठमलानी के अनुसार, DOJ ने अब कहा है कि कथित आरोपों के लिए मुकदमा चलाने लायक कोई सबूत नहीं था.

10 बिलियन डॉलर के अमेरिकी निवेश से कोई संबंध नहीं

कोर्ट ने इस बात की भी जांच की कि क्या अदाणी के 10 बिलियन डॉलर के अमेरिकी निवेश के ऐलान का DOJ के केस खारिज करने के फैसले से कोई संबंध था. जेठमलानी ने कहा कि जज खास तौर पर यह पता लगाना चाहते थे कि क्या यह निवेश केस वापस लेने के बदले में किया गया था. समीक्षा के बाद, कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि निवेश केस खारिज होने से स्वतंत्र था और DOJ के फैसले से इसका कोई संबंध नहीं था.

एक और अहम निष्कर्ष एंटी-ब्राइबरी और कंप्लाइंस सेटलमेंट से संबंधित था, जिनका जिक्र कथित गलत बयानी के मामले में किया गया था.

जेठमलानी ने कहा कि अदालत ने पाया कि ये बयान आम कॉर्पोरेट भाषा थे, न कि ऐसे खास बयान जिनसे निवेशक बॉन्ड खरीदने के लिए प्रेरित हो सकते थे. उन्होंने कहा कि फंड जुटाने वाले दस्तावेज़ों में ऐसे डिस्क्लेमर आम हैं और ये कानूनी सुरक्षा के तौर पर काम करते हैं. इसलिए कोर्ट ने इन बयानों को कानूनी कार्रवाई योग्य दावों के बजाय “कॉर्पोरेट पफ़री” (बढ़ा-चढ़ाकर कही गई कॉर्पोरेट बातें) माना.

ये मामला हमेशा के लिए बंद: सिद्धार्थ लुथरा 

चर्चा में वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लुथरा ने अदाणी समूह के खिलाफ अमेरिकी मामले के खारिज होने के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत द्वारा मामले को 'पक्षपात के साथ' (विथ प्रेजुडिस) खारिज किए जाने का मतलब यह है कि यह मामला हमेशा के लिए बंद हो गया है और इसे दोबारा नहीं खोला जा सकता है. अदालत ने न्याय विभाग (DOJ) के कारणों की स्वतंत्र रूप से समीक्षा करने के बाद धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार पाया, जिसे अदाणी समूह के लिए एक बड़ी राहत और आरोपों से मुक्ति के रूप में देखा जा रहा है.

इस कानूनी फैसले के बाद, अदाणी समूह के लिए अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने व्यापार को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है. चूंकि नामित सदस्यों ने शुरू से ही किसी भी तरह के गलत काम से इनकार किया था, इसलिए अब यह मामला उनके व्यापारिक और वित्तीय गतिविधियों में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं बनेगा. अदाणी ग्रुप अब अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी बाजारों में बिना किसी कानूनी रुकावट के फंड जुटाने की अपनी प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकता है.

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