8वें वेतन आयोग की बैठकों का दौर चल रहा है और पेंशनर संगठन अपनी मांगें आयोग के सामने रख रहे हैं. सबसे बड़ी मांगों में कम्यूटेड पेंशन की बहाली की अवधि 15 साल से घटाकर 10 से 12 साल करना, न्यूनतम पेंशन को अंतिम वेतन के कम से कम 67% तक बढ़ाना और OPS का ऑप्शन देना शामिल है. 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों के पेंशन में रिवीजन की भी मांग की जा रही है.
आयोग की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. अंतिम रिपोर्ट मई 2027 तक आने की उम्मीद है. यहां 10 प्वॉइंट्स में जानिए आखिर क्या-क्या चाहते हैं पेंशनर्स...
- पेंशन में बड़ा बदलाव: NC-JCM, महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन और AIDEF ने पेंशन की पूरी व्यवस्था में बदलाव और अलग-अलग पेंशनरों के बीच समानता की मांग रखी है. संगठनों का कहना है कि नए सैलरी स्ट्रक्चर के हिसाब से पेंशन भी ठीक से तय होनी चाहिए.
- न्यूनतम पेंशन 67%: कई पेंशनर संगठनों की मांग है कि न्यूनतम पेंशन अंतिम वेतन का कम से कम 67% हो. एक विकल्प के तौर पर सेवा के आखिरी 10 महीनों की औसत सैलरी को भी आधार बनाने की बात कही गई है.
- उम्र बढ़े तो पेंशन भी बढ़े: कुछ संगठनों ने उम्र के साथ पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. मांग के मुताबिक 65 साल की उम्र पर अंतिम वेतन का 70%, 70 साल पर 75%, 75 साल पर 80%, 80 साल पर 85%, 85 साल पर 90% और 90 साल या उससे ज्यादा उम्र में 100% तक पेंशन की जाए.
- फिटमेंट फैक्टर में बदलाव:पेंशन कैलकुलेशन में इस्तेमाल होने वाले फिटमेंट फैक्टर को भी दोबारा तय करने की मांग है. पेंशनर संगठनों का कहना है कि सैलरी रिवाइज होने के साथ इसमें भी सही तरीके से बदलाव होना चाहिए.
- DR में बदलाव: महंगाई राहत (DR) की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने और इसे पेंशन लाभ के साथ जोड़ने की मांग भी आयोग के सामने रखी गई है. इससे बढ़ती महंगाई के बीच पेंशन की वास्तविक रकम को लेकर राहत मिलने की उम्मीद है.
- परिवार को भी ज्यादा पेंशन: फैमिली पेंशन का दायरा बढ़ाने की मांग भी उठी है. संगठनों ने फैमिली पेंशन से जुड़े मौजूदा नियमों को रिव्यू करने की मांग की है, ताकि पात्र परिवारों को बेहतर लाभ मिल सके.
- ग्रेच्युटी लिमिट बढ़े: पेंशनर्श ने ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाने और इससे जुड़े नियमों में बदलाव की मांग की है. इसके साथ पेंशन कम्यूटेशन के नियमों की भी समीक्षा की बात कही गई है.
- OPS, NPS या UPS का ऑप्शन: पेंशनर्श की एक बड़ी मांग यह है कि कर्मचारियों को OPS, NPS या UPS में से अपनी जरूरत के हिसाब से ऑप्शन चुनने का मौका मिले. यह फैसला रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले पेंशन बेनिफिट को ध्यान में रखकर करने की मांग है.
- 15 साल की जगह 10-12 साल में पेंशन:कम्यूटेड पेंशन की बहाली की मौजूदा 15 साल की अवधि घटाने की मांग सबसे अहम मुद्दों में है. NC-JCM, AIDEF, FNPO और BPSAPA ने 11 साल की अवधि की मांग की है. IRTSA ने 12 साल और AINPSEF ने 10 साल का सुझाव दिया है.
- पुराने नियम और टेबल की समीक्षा: संगठनों ने CCS (Commutation of Pension) Rules, 1981 के Rule 10A की समीक्षा की मांग की है. कम्यूटेशन टेबल को भी मौजूदा वित्तीय, जनसांख्यिकीय और बीमांकिक आंकड़ों के आधार पर अपडेट करने की मांग है.
पुरानी पेंशन में भी रिवीजन की मांग
एक अहम सवाल उन कर्मचारियों का है जो 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हो चुके हैं. DoPT ने ऐसे कर्मचारियों की पेंशन में रिवीजन से जुड़े प्रतिनिधित्व आयोग को भेजे हैं. पेंशनर संगठनों की चिंता है कि आयोग के Terms of Reference(ToR) में इन पेंशनरों की पेंशन रिवीजन की बात साफ तौर पर नहीं लिखी गई है. REWA समेत कई संगठन इसमें बदलाव की मांग कर रहे हैं.
8वां वेतन आयोग कब देगा अंतिम रिपोर्ट?
8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था. इसे गठन के 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देने की उम्मीद है. ऐसे में फरवरी से अप्रैल 2027 के बीच कुछ अहम जानकारी सामने आ सकती है. हालांकि आयोग की अंतिम रिपोर्ट जमा करने की समयसीमा मई 2027 है.
ये बात जान लें कि फिलहाल इन मांगों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. आयोग सुझावों पर चर्चा कर रहा है और सिफारिशें आने के बाद केंद्र सरकार की मंजूरी भी जरूरी होगी. 8वें वेतन आयोग से करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और करीब 65 लाख रिटायर्ड केंद्रीय सरकारी पेंशनर की सैलरी-पेंशन में बदलाव की उम्मीद है जिनमें डिफेंस सेक्टर के कर्मचारी और पेंशनर भी शामिल हैं.
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