कैसी होती है जादू की दुनिया? कैसे सब कुछ डराते हुए भी अच्छे होने का एहसास दिलाता है. मैं भी एक ऐसी ही दुनिया में रहना चाहती हूं! पलक झपकते अपने आप हर वह चीज जो मैं कभी हकीकत में न बदल पाऊं, बदलना चाहती हूं.
अपनी बड़ी बेटी के कहने पर आज 'Fantastic Beasts and Where to Find Them' फिल्म देखने गई. मशहूर लेखक जेके राउलिंग की इसी नाम की किताब पर आधारित इस कहानी में ऐसे खो गई कि अभी तक बाहर नहीं आ पा रही हूं. एक बक्से में बंद की गई वह दुनिया जिसे मिस्टर स्कैम्बर ने सबसे छुपाकर नई जिंदगी बना दिया, मैं उस बक्से का हिस्सा बनना चाहती हूं. हर जादुई प्राणी जिसे अपने ही समाज के लोग एक खतरा मानकर खत्म करना चाहते हैं न्यूट उसको प्यार की जिंदगी देता है. ठीक उस तरह जिस तरह मैं और आप अपनी लाइफ को देना चाहते हैं. पर कानून, समाज, हाइरारकी, रिश्तेदार इसे डराकर मार देना चाहते हैं.
हम सबके पास अपना बक्सा है जिसमें हमारे सपने रहते हैं, जिसमें हमें एक बेहतर कल दिखता है. हम इसे सबकी नजरों से दूर हर रोज संवारते हैं. अपनी खयाली दुनिया को हकीकत की दुनिया से कहीं आगे ले जाते हैं. पर क्या सबके बक्सों के राक्षस उतने ही बेहतर स्वभाव के होते हैं जैसे मिस्टर स्कैम्बर के हैं. हम सब में कुछ तो अच्छा है पर झूठ और स्वाभिमान का मुखौटा पहन हम अपने बक्से के उस अच्छे जीव को कब एक डरावना राक्षस बना देते हैं पता ही नहीं चलता.
क्रोध एक ऐसा रोग बन चुका है जो हम लोगों के अंदर ऐसे घर कर रहा है मानो किसी प्रकार का नया फैशन हो, जिसको पहनने की होड़ लगी हो. गाली गलौच, बेकार की तू-तू, मैं-मैं, अहंकार इसका ट्रेंड सेटर है. मेरे पास इतने अहंकारी, तेरे पास क्या? जैसी सोसायटी एक ऐपिडेमिक की तरह फैल रही है. फिल्म की कहानी में न्यूट किस तरह अपने बक्से के जीवों से बाहरी राक्षसों पर काबू पाता है वह देख लगा अगर अपने भीतर की सच्चाई को सामने लाने का प्रयास जारी रहे तो किसी भी कठिनाई से बाहर आ जाएंगे. और फिर एक नई सुबह हो जाएगी.
(मनप्रीत NDTV इंडिया में चैनल प्रोड्यूसर हैं)
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This Article is From Nov 21, 2016
बक्से की दुनिया...और अच्छे जीव का डरावना राक्षस बन जाना!
Suryakant Pathak
- ब्लॉग,
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Updated:नवंबर 21, 2016 16:17 pm IST
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Published On नवंबर 21, 2016 14:31 pm IST
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Last Updated On नवंबर 21, 2016 16:17 pm IST
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