फीफा वर्ल्ड कप शुरू हो चुका है. सारी दुनिया के करोड़ों शैदाई इसके मैचों का लुत्फ ले रहे हैं. ब्राजील, अर्जेंटीना, फ्रांस और स्पेन जैसी विश्व स्तरीय टीमों के प्रति भारतीय फैंस में विशेष लगाव देखा जाता है. इनमें सबसे अधिक समर्थन और भावनात्मक जुड़ाव ब्राजील की राष्ट्रीय टीम के प्रति होता है, जबकि अर्जेंटीना के प्रति भी भारतीयों में गहरा जुनून है.
किसके फैन हैं भारतीय फुटबॉल प्रेमी
कभी पेले को चाहने वाले भारतीय अब नेमार, विंसीयस जूनियर और अन्य खिलाड़ियों के दीवाने हैं. वहीं अर्जेंटीना के दीवानों के लिए डिएगो माराडोना हमेशा से एक मिथक रहे हैं. लियोनेल मेस्सी उस विरासत को आगे बढ़ाते हुए विश्व कप 2022 की जीत के साथ भारतीय दिलों में और गहराई से उतर गए. ब्राजील का खेल न केवल तकनीकी कौशल से भरपूर होता है, बल्कि इसमें सांबा की लय, गति और रचनात्मकता का अनोखा मिश्रण दिखाई देता है. अर्जेंटीना की टीम इसमें 'टैंगो' की जुनून भरी अनिश्चितता और मेस्सी की जादुई प्रतिभा जोड़ती है.
ब्राजील की सफलता का इतिहास प्रभावशाली है. पांच विश्व कप खिताब (1958, 1962, 1970, 1994 और 2002) इस टीम को सबसे सफल बनाते हैं. 1970 की टीम को अब तक का सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, जिसमें खिलाड़ियों ने फुटबॉल को कला का रूप दिया. अर्जेंटीना ने भी तीन विश्व कप (1978, 1986 और 2022) जीते हैं. इसमें माराडोना की 1986 वाली 'हैंड ऑफ गॉड' और 'सेंचुरी ऑफ द सेंचुरी' वाली दौड़ और मेस्सी की 2022 वाली कप्तानी अमर हो गई. भारतीय प्रशंसक इन दोनों टीमों में अपने संघर्ष और आशाओं की झलक देखते हैं.

विश्व कप फुटबॉल के ग्रुप जे में अर्जेंटीना और अल्जीरिया के बीच खेले गए मैच कोलकाता में देखते लोग.
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ब्राजील और अर्जेंटीना को क्यों पसंद करते हैं भारतीय
भारत जैसे विकासशील देश में गरीबी और चुनौतियों के बीच उभरती प्रतिभा ब्राजील और अर्जेंटीना दोनों से जुड़ाव का कारण
बनती है. केरल के गांवों से लेकर दिल्ली-मुंबई के शहरी इलाकों तक,विश्व कप के दौरान ब्राजील और अर्जेंटीना के पोस्टर, झंडे और जर्सियां आम दिखाई देती हैं. मालाप्पुरम और अन्य क्षेत्रों में ब्राजील-अर्जेंटीना राइवलरी गांवों तक बंटी हुई है. बड़े कटआउट, सजावट और सामूहिक रूप से मैच देखना इस जुनून को दर्शाता है.
फ्रांस की टीम भी भारतीय फुटबॉल प्रेमियों के बीच लोकप्रिय है. किलियन एमबापे जैसे युवा सितारों की गति और पावर, साथ ही टीम की अनुशासित रणनीति प्रशंसकों को आकर्षित करती है. हाल के वर्षों में फ्रांस ने विश्व कप जीतकर अपनी मजबूती साबित की है. यह टीम विविधता और आधुनिक फुटबॉल का प्रतीक है. भारतीय युवा खिलाड़ी फ्रांस से अनुशासन और रणनीतिक तैयारी सीख सकते हैं. फिर भी, ब्राजील और अर्जेंटीना वाला भावुक जुड़ाव फ्रांस के साथ थोड़ा कम महसूस होता है.
स्पेन की खेलने की शैली क्या है
स्पेन की राष्ट्रीय टीम अपनी पासिंग गेम और तिकी-टाका शैली के लिए जानी जाती है. साल 2010 के विश्व कप विजेता अभियान में इनिएस्टा और जावी जैसे खिलाड़ियों ने इस शैली को परिपूर्णता दी. स्पेन का खेल बौद्धिक और धैर्यपूर्ण होता है, जो रणनीति प्रेमियों को पसंद आता है. भारतीय प्रशंसक स्पेन की तकनीकी निपुणता की सराहना करते हैं, लेकिन ब्राजील की अप्रत्याशितता और अर्जेंटीना की जादुई प्रतिभा इसमें नहीं मिलती.
ब्राजील हमेशा की तरह इस बार भी खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही है. नेमार की फिटनेस और टीम की समग्र क्षमता पर नजरें टिकी हैं. अर्जेंटीना में मेस्सी की विरासत और नई पीढ़ी का जोश खिताब की होड़ को रोमांचक बना रहा है. भारतीय समयानुसार रात्रि के मैच देखने वाले प्रशंसक सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं.
ब्राजील और अर्जेंटीना का संगीत और उत्सव
दोनों देशों (ब्राजील और अर्जेंटीना) में विविधता, संगीत और उत्सवों की परंपरा है. ब्राजील का कार्निवल भारतीय त्योहारों की याद दिलाता है, जबकि अर्जेंटीना का टैंगो और स्ट्रीट फुटबॉल की संस्कृति भी भारतीय जुनून से मेल खाती है. फुटबॉल यहां जीवनशैली का हिस्सा है, ठीक वैसे ही जैसे भारतीय फैंस इसे अपनाते हैं.

कोलकाता में अर्जेंटीना के स्टार प्लेयर लियोनेल मेस्सी का एक प्रशंसक.
भावनात्मक स्तर पर ब्राजील और अर्जेंटीना का संघर्ष भारतीयों से गहराई से जुड़ता है. दोनों टीमें अक्सर प्रबल दावेदार होती हैं, लेकिन कभी अप्रत्याशित हार भी झेलती हैं. जैसे ब्राजील की 2014 की 7-1 की हार या अर्जेंटीना के कई निराशाजनक वर्ष. इसके बावजूद वापसी का जज्बा प्रशंसकों को प्रेरित करता है. फ्रांस और स्पेन अधिक सुसंगत लगते हैं, पर ब्राजील-अर्जेंटीना में वह अनिश्चित रोमांच है जो मैच को यादगार बनाता है.
यह प्रेम फुटबॉल को एकता का माध्यम बनाता है. भारत की विविधता में विश्व कप के दौरान ब्राजील और अर्जेंटीना समर्थन
सबको जोड़ता है. बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सभी इसमें भाग लेते हैं. यह जुनून भारतीय फुटबॉल के विकास के लिए भी प्रेरणास्रोत है. अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ और सरकार को इस ऊर्जा का उपयोग करके बेहतर अकादमियां, कोचिंग और बुनियादी ढांचा विकसित करना चाहिए, ताकि भविष्य में भारत विश्व कप में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सके.

केरल के तिरुवंतपुरम में लगा पुर्तगाल के फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो का आदमकद कटआउट.
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माराडोना की विरासत
ब्राजीलियन और अर्जेंटाइनी फुटबॉल सुंदरता और जुनून का प्रतीक है. यह सिखाता है कि कौशल, रचनात्मकता, टीम भावना और व्यक्तिगत प्रतिभा से बड़ी जीत हासिल की जा सकती है. फ्रांस अनुशासन और स्पेन रणनीति का पाठ पढ़ाते हैं. विश्व कप 2026 इन सभी टीमों के प्रदर्शन से रोमांचक बना हुआ है.
दरअसल भारतीय फुटबॉल प्रेमियों का ब्राजील के प्रति लगाव सांस्कृतिक, भावनात्मक और ऐतिहासिक आधारों पर टिका है, जबकि अर्जेंटीना माराडोना-मेस्सी की जादुई विरासत के कारण दिलों में खास जगह रखती है. फ्रांस और स्पेन को सम्मानपूर्ण स्थान प्राप्त है, किंतु ब्राजील-अर्जेंटीना राइवलरी दिलों पर राज करती है. इस विश्व कप में भी यह जुनून देशभर में दिखाई दे रहा है और फुटबॉल को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
(डिस्क्लेमर: लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, वो देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अलग-अलग विषयों पर लेख लिखते हैं. इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)