विज्ञापन

यूपी में योगी सरकार होने के मायने, 2017 के बाद बदली यूपी की तस्वीर

कवींद्र प्रताप सिंह
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    जून 22, 2026 20:44 pm IST
    • Published On जून 22, 2026 20:38 pm IST
    • Last Updated On जून 22, 2026 20:44 pm IST
यूपी में योगी सरकार होने के मायने, 2017 के बाद बदली यूपी की तस्वीर

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार नौ वर्ष से ज्यादा का कार्यकाल पूरा कर चुकी है और इतना समय बीत जाने के बाद इस बात का आकलन आवश्यक है कि आखिर जनता के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ क्या मायने रखते हैं? वे कौन से कारण हैं जो उन्हें पूर्ववर्ती शासकों से अलग पहचान देते हैं. 2017 से पूर्व के राजनीतिक परिदृश्य का विश्लेषण करें तो, दंगा, दलित उत्पीड़न, सनातन का अपमान और अल्पसंख्यक तुष्टिकरण जैसे मुद्दे प्रमुखता से उभरते हैं. कहा जा सकता है कि 2017 का सत्ता परिवर्तन केवल एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि इसने राज्य की प्रशासनिक पहचान, सुरक्षा व्यवस्था, सांस्कृतिक नीतियों और विकास को एक नई दिशा दी है.

2017 के पहले के उत्तर प्रदेश में वोट की राजनीति चरम पर थी. सांप्रदायिक तुष्टिकरण तत्कालीन सरकार के एजेंडे में शामिल था. एक तरह से राज्य राजनीतिक गुलामी की ओर था. दलितों का उत्पीड़न, अपराधियों और माफियाओं को संरक्षण, विकास की अनदेखी का दंश जनता भुगत रही थी. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि 2014-2016 के बीच अनुसूचित जाति के विरुद्ध अपराधों में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे था. दलित उत्पीड़न एक्ट तो इतना निष्प्रभावी था कि उसका कोई अर्थ ही नहीं रह गया था. मुजफ्फरनगर का दंगा तो राज्य पर ऐसा कलंक है जो शायद ही कभी धोया जा सके. जाने कितने हिंदुओं का पलायन हुआ और जाने कितने लोगों की जमीनें दबंगों ने हथिय़ाई, लेकिन सरकार मूक दर्शक बनी रही. आक्रोश का लावा कभी न कभी फटता ही है और 2017 में लोगों ने इसे अपने मतों से अभिव्यक्त किया. प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से भाजपा को 312 सीटें. यह सिर्फ एक राजनीतिक दल को बहुमत ही नहीं था, अपने अपमान से आहत जनता का विद्रोह था.

जनता किसी राजनीतिक दल को इस तरह शिरोधार्य करती है तो सरकार से अपेक्षाएं अत्यंत ही गहरी हो जाती हैं. मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ ने इस चुनौती को समझा और आत्मसात भी किया. पं. दीनदयाल उपाध्याय कहते थे कि जब तक शासन व्यवस्था अपनी सांस्कृतिक आत्मा से विमुख रहेगी, तब तक वह लोक-कल्याण का वास्तविक मार्ग प्रशस्त नहीं कर सकती. राज्य को आखिरी पंक्ति में खड़े लोगों तक पहुंचना होगा. इससे प्रेरणा लेकर मुख्यमंत्री योगी ने 'सुशासन' को केवल एक प्रशासनिक शब्द नहीं, युगांतकारी संकल्प के रूप में आगे बढ़ाया. इसमें उन्होंने वीर सावरकर के विचारों को भी जोड़ा जो यह मानते थे कि शक्ति के बिना शांति की स्थापना असंभव है. माफिया व अपराधियों के खिलाफ जीरो टालरेंस इसका उदाहरण है. कानून सबके लिए एक है, योगी का यह संदेश पूरे प्रदेश में गूंजा. शपथ लेने के तत्काल बाद अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई ने वोट बैंक की राजनीति को पीछे धकेला तो एंटी-रोमियो स्क्वाड के गठन ने बेटियों को निडर होकर घर से बाहर निकलने का आत्मबल दिया. माफिया के विरुद्ध अभियान तो शायद राज्य के इतिहास में दर्ज किया जाए. माफिया की कमर टूटने का अर्थ था संगठित अपराध का खात्मा. यानि अब राज्य में व्यापारियों को धमकाकर रंगदारी वसूलने की जुर्रत कोई नहीं करेगा.

जाहिर है कि यह सब एक दिन में नहीं हुआ, लेकिन नौ साल बीत जाने के बाद बदलाव का यह भाव ही योगी को राज्य के लिए आवश्यक बनाता है. प्रदेश दंगों से मुक्त हुआ. प्रशासन को सीधा संदेश कि दंगाई किसी भी समुदाय के हों, कार्रवाई अनिवार्य है. मिशन शक्ति अभियान, महिला हेल्पलाइन, और पुलिस में महिला भर्ती ने उस वातावरण को बदलने की कोशिश की जहां बेटी का बाहर निकलना परिवार की चिंता का सबसे बड़ा कारण होता था. यह कहने की बात नहीं कि निर्भीकता केवल कानून से नहीं आती, उस विश्वास से आती है कि शासन नागरिकों के पक्ष में है और इस सुरक्षित वातावरण ने निवेशकों के लिए जैसे रेड कारपेट बिछा दिया. 'बीमारू' राज्य में गिना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है. देश ही नहीं विदेश के निवेशक उत्तर प्रदेश आ रहे हैं और आने को आतुर हैं. गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने न केवल दूरियां घटाईं, बल्कि उन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ा जो दशकों से उपेक्षित थे. जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण, उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की स्थापना, डेटा सेंटर नीति, यह नए उत्तर प्रदेश के नक्शे में शामिल हैं

सांस्कृतिक पुनर्जागरण की बात किए बिना बात अधूरी रहेगी. काशी विश्वनाथ धाम कारिडोर, जिसका 2021 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकार्पण किया, धार्मिक पर्यटन की आर्थिक आभा में निखरकर सामने आया. फिर 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा ने सनातनधर्मियों की सदियों की आस्था को प्रतिफल दिया. विकास और सांस्कृतिक गर्व का यह संगम योगी सरकार की वह विशिष्टता है, जो उसे पिछली सरकारों से अलग करता है.

प्रशासनिक स्तर पर, त्वरित निर्णय क्षमता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे संबल और मार्गदर्शन ने जटिल समस्याओं के समाधान में अहम भूमिका निभाई है. कोविड महामारी के दौरान योगी सरकार का प्रबंधन इसका प्रमाण है. उस समय की प्रशासनिक दक्षता को पूरे देश ने स्वीकार किया. फिर भी अभी बहुत लंबा सफर तय करना है. प्रदेश की जनता ने दंगों के बदले शांति चुनी है. माफिया नहीं, कानून चुना है. अपमान की जगह गर्व चुना है और इसीलिए योगी आदित्यनाथ को 2022 में भी बहुमत का जनादेश मिला. यह जनादेश इस सोच को था कि राज्य में अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए. सांस्कृतिक आत्मसम्मान और आर्थिक विकास साथ-साथ चल सकते हैं. आज जब लोग यह महसूस करते हैं कि सनातन परंपराएं गर्व का विषय हैं, लज्जा का नहीं, तो यह योगी सरकार के प्रति उनकी आत्मिक स्वीकारोक्ति है और इसीलिए यूपी में योगी सरकार होने के मायने अलग हैं, विशिष्ट हैं.

(लेखक उत्तर प्रदेश कैडर के एक सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं, जो वर्तमान में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के काशी प्रांत के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं.)

डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
CM Yogi Adityanath, CM Yogi Aadityanath, CM Yogi Aditya Nath, UP Government, CM Yogi UP Election
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com