जिस शख़्स से आप सबसे ज़्यादा प्यार करते हैं, जिससे आपको सबसे ज़्यादा उम्मीदें होती है और जो आपका सबसे बड़ा हीरो होता है, आप उससे सबसे ज़्यादा लड़ते भी हैं। उसके बारे में सबसे ज़्यादा बातें करते हैं। उसके बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं। ये इंसान की फ़ितरत है।
क्रिकेट के दीवाने देश को सचिन तेंदुलकर के संन्यास के बाद एक "आइकन" की तलाश है, जिसे वो "गॉड" बनाना चाहता है। विराट "चीकू" कोहली की असीमित प्रतिभा में क्रिकेट प्रेमी भगवान ढूंढ रहे हैं।
जब "स्लेजिंग" को लेकर मैदान पर विराट का गुस्सा फ़ूटता है, तो देश को अपने "एंग्री यंग मैन" पर नाज़ होता है। ईंट का जवाब पत्थर से देने के उसके मिज़ाज की जनता दीवानी हो जाती है। क्लीन बोल्ड हो जाने के बाद भी जब विराट को ये यकीन नहीं होता कि वो आउट थे, तो जीतने की ज़िद और कभी हार नहीं मानने के उनके ज़ज्बे को सलाम करने को जी चाहता है। हार के बाद किसी एक क्रिकेटर के चेहरे पर सबसे ज़्यादा निराशा पढ़ी जा सकती है, तो वो कोई और नहीं विराट कोहली ही होते हैं।
विराट कोहली में वो सब कुछ है, जो एक महान खिलाड़ी में होने चाहिए। लेकिन विराट हैं कि महान बनना ही नहीं चाहते। 'बड़ा' बनना तो तय है ही, लेकिन छोटी-छोटी बातों पर उनकी तीखी प्रतिक्रिया कहीं उनके 'महान' बनने की राह में स्पीड-ब्रेकर बनकर न आ जाए।
वर्ल्ड कप के सेमीफ़ाइनल में हार के बाद उनकी गर्लफ़्रेंड अनुष्का शर्मा को लेकर सोशल मीडिया में जो कुछ भी हुआ, उस पर विराट बिफ़रे हुए थे, जो जायज़ भी है। कोलकाता में उनका गुस्सा फ़ूट पड़ा, "मुझे बहुत दुख हुआ। जिन्होने ऐसा कहा उन्हें शर्म आनी चाहिए।"
विराट इतने गुस्से में थे कि वे यहां तक कह गए कि इस घटना के बाद उन्हें अच्छे-बुरे लोगों की पहचान हो गई, "एक मैच में ख़राब प्रदर्शन की ये क़ीमत? मेरे लिए प्रतिक्रियाएं बेहद निराशाजनक थीं। कई लोगों पर से मेरा विश्वास उठ गया। एक तरह से अच्छा ही हुआ। पता चल गया कि कौन मेरे साथ है और कौन नहीं।"
लेकिन क्या विराट ऐसे मुट्ठी भर शरारती लोगों की हरकतों को ज़्यादा महत्व नहीं दे रहे हैं?
वर्ल्ड कप के दौरान ऑस्ट्रेलिया के कप्तान माइकल क्लार्क से बीबीसी के पत्रकार स्टीफ़न शेमिल्ट सवाल पूछ रहे थे। बतौर कप्तान ज़बरदस्त "सक्सेस" मिली है...लेकिन शेमिल्ट की ज़ुबान लड़खड़ायी और उनके मुंह से "सक्सेस" की बजाए "सेक्स" निकल गया। क्लार्क और प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मौज़ूद स्टीवन स्मिथ के साथ सभी लोग हंस पड़े। क्लार्क की वाकपटुता और हाजिरजवाबी से सीखा जा सकता हैं। उन्होंने कहा कि "सेक्स" का सवाल तो उनकी पत्नी से पूछा जाना चाहिए!
हजारों युवा क्रिकेटर की तरह कोहली, सचिन तेंदुलकर को अपना आदर्श मानते रहे हैं। सचिन के खेलते देखकर बड़े हुए हैं। करोड़ों खेल प्रेमियों की तरह क्या कोहली को भी ये उम्मीद नहीं रहती थी कि सचिन शतक बनाकर ही लौटेंगे?
ऐसी ही उम्मीद विराट कोहली से भी की जाने लगी है। इसलिए उनके फ़ॉर्म का पैमाना दूसरे खिलाड़ियों से अलग होता है।
कोहली ने मीडिया को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि खिलाड़ियों के फ़ॉर्म को लेकर मीडिया के अलग-अलग पैमाने हैं। किसी खिलाड़ी के लिए एक पैमाना तो दूसरे के लिए कुछ और। "अगर मैं दो मैच में भी खराब खेलूं तो मेरा फ़ॉर्म खराब बताया जाने लगता है। कुछ खिलाड़ी 10 मैचों में 2 मैच अच्छा खेलकर भी फ़ॉर्म में बने रहते हैं।"
24 साल तक सचिन तेंदुलकर की क्रिकेट की दुनिया में तूती बोलती रही, लेकिन वे खुद बहुत कम बोले। हर सवाल का जवाब उनके बल्ले ने दिया। याद है न 2006 में ही एक आलोचक ने लिख दिया था -"एंडुलकर"। सचिन फिर भी ख़मोश रहे और अगले 7 साल तक खेलते रहे और आलोचक मुंह छुपाते रहे।
"पिछले 5 साल में मुझसे ज़्यादा किसी ने भी मैच नहीं जिताए हैं। मुझे नहीं लगता कि टीम में किसी का भी प्रदर्शन मुझसे बेहतर रहा है।" जब विराट कोहली ऐसे बयान देते हैं तो इसमें उनका आत्मविश्वास कम, दंभ ज़्यादा महसूस होता है। विराट उम्मीदों वाले कोहली "महानता-पथ" पर भटकते हुए नज़र आते हैं।