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बढ़ती गर्मी, बदलती बारिश और 'Extreme' क्लाइमेट स्कोर... नैनीताल की तस्वीर कितनी चिंताजनक?

हिमांशु जोशी
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    जुलाई 04, 2026 15:36 pm IST
    • Published On जुलाई 04, 2026 15:34 pm IST
    • Last Updated On जुलाई 04, 2026 15:36 pm IST
बढ़ती गर्मी, बदलती बारिश और 'Extreme' क्लाइमेट स्कोर... नैनीताल की तस्वीर कितनी चिंताजनक?

एक निजी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के City-Level Climate Change Severity Analysis में नैनीताल को 100 में से 81 अंक देकर 'Extreme' श्रेणी में रखा गया है. वहीं, शहर के स्थानीय लोग भी बदलते मौसम, बढ़ती गर्मी और बारिश के बदले पैटर्न की बात कर रहे हैं. लेकिन क्या स्थानीय लोगों के ये अनुभव और यह ऑनलाइन इंडेक्स जलवायु परिवर्तन की पूरी तस्वीर पेश करते हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऐसे दावे को स्वीकार करने से पहले उसकी कार्यप्रणाली और वैज्ञानिक आधार को समझना जरूरी है.

यह प्लेटफॉर्म क्या है?

यह प्लेटफॉर्म AQI.in है, जो खुद को एक ओपन-सोर्स एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म बताता है. इसके "About Us" पेज के अनुसार यह Prana Air Pvt. Ltd. के अंतर्गत संचालित होता है और रियल टाइम वायु गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराता है.

नैनीताल के बारे में प्लेटफॉर्म का दावा

प्लेटफॉर्म के Climate Change Severity Analysis के अनुसार नैनीताल का Climate Change Severity Score 81/100 है, जिसे Extreme श्रेणी में रखा गया है. वेबसाइट के अनुसार यह विश्लेषण पिछले 16 वर्षों के उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है. इसमें नैनीताल के तापमान में 5.27 डिग्री सेल्सियस का परिवर्तन, वर्षा, PM₂.₅, आर्द्रता, हवा की गति और अन्य पर्यावरणीय संकेतकों से जुड़े बदलाव भी प्रदर्शित किए गए हैं.

स्थानीय लोगों ने पिछले कुछ वर्षों में क्या महसूस किया है

नैनीताल निवासी पर्यावरण कार्यकर्ता दिनेश उपाध्याय ने बताया कि नैनीताल में पिछले कुछ सालों से अब लोगों के घर में पंखों के साथ एसी भी लगने लगे हैं और इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है. उन्होंने यह भी बताया कि इस गर्मी में ऐसा पहली बार हुआ जब प्री मानसून में बारिश के बाद मौसम नहीं खुला और बादल बने रहे. बारिश के पैटर्न पर बदलाव के बारे में उन्होंने बताया कि नैनीताल में पहले रिमझिम बारिश होती थी लेकिन अब कम समय में अचानक तेज बारिश होने लगी है.

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

बरेली कॉलेज, बरेली के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. जसपाल सिंह कहते हैं कि AQI.in का Climate Change Severity Score जलवायु परिवर्तन का एक उपयोगी संकेतक (Indicator) हो सकता है, लेकिन इसे Intergovernmental Panel on Climate Change (IPCC), India Meteorological Department (IMD), World Meteorological Organization (WMO) या किसी अन्य मानक वैज्ञानिक संस्था द्वारा आधिकारिक जलवायु परिवर्तन सूचकांक के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है.

उनका कहना है कि वेबसाइट 81/100 का स्कोर तो देती है, लेकिन यह स्कोर किस तरह निकाला गया, अलग-अलग मानकों को कितना भार (Weight) दिया गया और उसका वैज्ञानिक सत्यापन (Peer-reviewed Validation) कहां प्रकाशित है, यह स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है.

डॉ. सिंह बताते हैं कि वेबसाइट के विश्लेषण में PM₂.₅ यानी वायु प्रदूषण को भी शामिल किया गया है. उनका कहना है कि PM₂.₅ और जलवायु परिवर्तन आपस में जुड़े होने के बावजूद एक ही चीज नहीं हैं. किसी शहर का AQI खराब होने का अर्थ यह नहीं कि वहां जलवायु परिवर्तन की तीव्रता भी उसी अनुपात में अधिक है.

वे कहते हैं कि यदि वेबसाइट में दिखाया गया 5.27 डिग्री सेल्सियस का तापमान परिवर्तन औसत वार्षिक तापमान में वृद्धि को दर्शाता है, तो यह अत्यंत असाधारण परिवर्तन होगा. भारत के उपलब्ध आधिकारिक आकलनों में इस स्तर की वृद्धि नहीं दिखाई गई है. उदाहरण के लिए, भारत के दीर्घकालिक जलवायु आकलनों में 1901 से 2018 के बीच औसत तापमान में लगभग 0.7 डिग्री सेल्सियस वृद्धि दर्ज की गई है. IMD के दीर्घकालिक Heatwave विश्लेषण बढ़ते रुझान तो दिखाते हैं, लेकिन 16 वर्षों में किसी पर्वतीय शहर के औसत तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस से अधिक वृद्धि का समर्थन नहीं करते.

उनके अनुसार किसी शहर में जलवायु परिवर्तन का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए सामान्यतः 30 वर्ष या उससे अधिक का तापमान रिकॉर्ड (औसत, अधिकतम और न्यूनतम), वर्षा की मात्रा एवं उसकी प्रवृत्ति, हीटवेव, कोल्डवेव और अन्य चरम मौसमीय घटनाओं का रिकॉर्ड, भूमि उपयोग एवं वनस्पति (LULC/NDVI) में बदलाव, जल संसाधनों (भूजल, झील, नदी और हिमावरण) में परिवर्तन तथा IMD, WMO, IPCC, ERA5 और CRU जैसे विश्वसनीय स्रोतों के दीर्घकालिक आंकड़ों का उपयोग किया जाता है.

(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)

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