लखनऊ में पिछले कई दिनों से चल रही पत्र लेखन प्रतियोगिता के बाद आज आशु भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रोए भी और बोले भी. रोते हुए लगा कि वे पिता से बोल रहे हैं, बोलते हुए लगा कि वे नेता से बोल रहे थे. सपा में नेता कब पिता बन जा रहे हैं और मुख्यमंत्री कब भतीजा, ये इसलिए है क्योंकि अब हमारे राजनीतिक दलों में परिवारवाद का अगला चरण सामने आ रहा है. एक ही दल में एक ही परिवार के कई सदस्यों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का मनोरम दृश्य आपने अभी इंटरवल तक ही देखा है. गोतिया जब टकराते हैं तो कहीं खेत बंटता है तो कहीं मीट भात बनता है. किसी पर मुकदमा होता है तो कोई मुखिया बनता है.
अगर आपकी पार्टी है तो ये मेरा भी करियर है. मैं भी बर्बाद हुआ हूं, मैं कोई दूसरा काम नहीं कर सकता. जिस ऊंचाई पर आपने पहुंचाया मुझे, आप कहेंगे तो उस ऊंचाई से हट जाऊंगा.
ये कहकर क्या अखिलेश ने अपने हथियार डाल दिये. अब वे सपा में रहेंगे और लड़ते भिड़ते रहेंगे. मुलायम सिंह यादव ने जिस तरह से अमर सिंह की तारीफ़ की है उससे अखिलेश पर क्या बीती होगी. वही जानते होंगे लेकिन दूसरे दलों से अमर सिंह को कितने फोन आ रहे होंगे कि आपने तो पिता के सामने उनके बेटे की ये हालत कर दी कि कहने लगे कि मैं कहां जाऊंगा. बर्बाद हो जाऊंगा. अमर सिंह की इस जीत पर आज़म ख़ान क्या कहने वाले हैं, आप रामपुर से समाचार एजेंसी एएनआई की बाइट का इंतज़ार कीजिए.
लखनऊ में वही हुआ जो बंद कमरे में हो रहा था. बल्कि बंद कमरे वाली बातें भी बाहर आ गईं जैसे किसने चांटा मारा, किसने धक्का मुक्की की, किसने कहा कि तुम्हारी ऐसी तैसी कर देंगे. जेब काटने की किसी ने कोई शिकायत नहीं की है. ये तमाम नेता यूपी की ग़रीब जनता के लिए आपसी संघर्ष कर रहे हैं. उनसे आपकी तकलीफ देखी नहीं गई इसलिए आपस में लड़ने लगे. तीनों के भाषण के दौरान कई सीन क्रिएट हुए जो एक ही टेक में फाइनल थे. तस्वीर तो नहीं है मगर मैं विवरण देना चाहता हूं. एक सीन में अखिलेश यादव ने चाचा और पिता के पांव छुए. दूसरे सीन में भतीजे ने कहा कि अमर सिंह ने छपवा दिया कि मैं औरंगजेब हूं और नेता जी शाहजहां. तीसरे सीन में चाचा ने भतीजे से माइक छीन ली और कहा कि मुख्यमंत्री झूठ बोल रहे हैं. चौथे सीन में एमएलसी आशु मलिक ने मुख्यमंत्री के कंधे पर हाथ रख दिया. जैसे चल यार हज़रतगंज कॉफ़ी पीकर आते हैं. पांचवें सीन में मुख्यमंत्री ने अपने एमएलसी को धकिया दिया और फिर सुरक्षाकर्मियों ने सीएम को हथिया लिया. छठे सीन में मुलायम सिंह यादव ने युवा नेता अभिषेक यादव से समाजवादी पार्टी की परिभाषा पूछ दी. सातवें सीन में अभिषेक ने कहा कि समानता और संपन्नता, जवाब पाकर नेता जी सन्न, कहा कि मैंने ही बताया होगा.
और भी किसी सीन में मारपीट हुई हो, किसी ने किसी को चांटे मारे हों तो वो हमारे पास उपलब्ध नहीं है. हम माफी चाहते हैं. बातों से लगा कि मुलायम को शक है कि रामगोपाल यादव ने अखिलेश को भड़काया है. अखिलेश को शक है कि अमर सिंह ने मुलायम सिंह यादव को भड़काया है. शिवपाल को शक है कि रामगोपाल यादव ने नेताजी को बहुत बड़ा नेता बनने नहीं दिया. बहुतों को शक हैं कि सपा में शक ही शक है. मुलायम सिंह यादव ने कहा कि शिवपाल यादव बहुत बड़े नेता हैं. शिवपाल यादव ने अखिलेश यादव के बारे में कहते हुए गंगा जल की कसम खा ली. आप जानते हैं कि मैं कसमों में कसम विद्या कसम को महत्व देता हूं मगर कोई गंगाजल की कसम खा लेता है तो भावुक हो जाता हूं. बहरहाल शिवपाल यादव ने कहा कि मैं गंगा जल लेके और अपने इकलौते बेटे की कसम खाता हूं कि अखिलेश ने मुझसे कहा कि वो अलग पार्टी बनाएंगे. नेताजी आपने मुझे अध्यक्ष पद से हटा कर अखिलेश को अध्यक्ष बनाया तो मैं उन्हें लेने एयरपोर्ट गया लेकिन जब अखिलेश को हटा कर मुझे बनाया तो उसने मेरे विभाग छीन लिये. मेरा क्या कसूर है. मैंने मुख्यमंत्री का कौन सा आदेश नहीं माना. यूपी का नेतृत्व अब आपको संभालने की ज़रूरत है. मैंने बिहार में महागठबंधन कराया. नेताजी उससे बहुत बड़े नेता बनते. रामगोपाल ने तुड़वा दिया.
शिवपाल यादव ने खुले में कहा कि मुख्यमंत्री अलग दल बनाना चाहते थे. शिवपाल यादव ने बिहार में महागठबंधन तोड़ने का प्लान बनाने वाले का नाम बता दिया. जब इतना बता दिया तो यह भी बता देते कि रामगोपाल यादव किसके लिए और किसके इशारे पर नेता जी के खिलाफ प्लान बना रहे थे. ताकि बाद में हमें यह न जानने को न मिले कि शिवपाल भी उसी का प्लान लागू कर रहे थे जिसका प्लान रामगोपाल पिछले साल लागू कर चुके हैं. मने कुछ भी पॉसिबल है. लेकिन किसी बाहरी को दोषी बता कर सपा कब तक बच सकती है. किसी वकील से पूछिये तो सात साल की सज़ा किन किन मामलों में होती है, क्योंकि मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव से कहा कि तुम अमर सिंह के बारे में जानते क्या हो. उसने मुझे जेल जाने से बचाया. कम से कम सात साल की सज़ा होती. अमर सिंह हमारा भाई है.
एक चाचा को निकालकर मुलायम सिंह यादव एक नए चाचा ले आए ताकि अखिलेश को चाचा की कमी न हो. अमर सिंह भी बाहरी से चाचा हो गए. इस पूरे खेल में प्रमोशन तो उन्हीं का हुआ. वैसे अमर सिंह ने मुलायम को जेल जाने से कब बचाया, फरवरी 2010 से पहले जब वे सपा से निकाल दिये गए या मई 2016 के बाद जब वे छह साल बाद सपा में आए. अगर 2010 में निकाले जाने से पहले बचाया होता तो अमर सिंह मुलायम पर हमला बोलते वक्त ये सब ज़रूर बताते.
फरवरी 2010 में जब अमर सिंह और जया प्रदा को मुलायम सिंह यादव ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निकाला था क्या तब अमर सिंह मुलायम सिंह को नहीं बचा रहे थे या बचा चुके थे. दोनों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था. अमर सिंह ने मुलायम सिंह को कहा था कि या तो आप लोहियावादी नहीं हैं या फिर अपने मुलायमवाद का सफेद झूठ लोहिया जी पर मढ़ना चाहते हैं. ऐसा लगता है कि नेतृत्व की सारी गुणवत्ता एक ही परिवार में है. मेरी ग़लती थी कि मैंने चौदह साल से हो रही इस धांधली को नहीं देखा. ये बयान पत्रिका अख़बार की वेबसाइट पर मौजूद है.
समाजवादी पार्टी की घटना पर हंसी भी आती है और हंसी नहीं भी आती है. अमर सिंह ने मुलायम सिंह यादव को सात साल जेल की सज़ा से बचाने के लिए किस-किस की मदद ली. क्या उसी की मदद ली जिसकी मदद लेने का आरोप प्रोफेसर रामगोपाल यादव पर लग रहा है.
आज का झगड़ा शांत नहीं हुआ है. पब्लिक में हुआ है ताकि सपा के तमाम गुट आने वाले दिनों में मारपीट के लिए तैयार रहें जैसा आज लखनऊ में हुआ. 1987 में मुलायम सिंह यादव ने भी चौधरी चरण सिंह के लोकदल का एक हिस्सा लेकर निकल गए. ख़ुद को चरण सिंह का दत्तक पुत्र बताते रहे. तब मुलायम सिंह यादव 48 साल के थे. अखिलेश यादव की उम्र 43 साल की है. जो जोखिम पिता ने लिया, क्या अखिलेश ले सकते हैं. क्या यूपी एक और नई पार्टी का भार उठाने के लिए तैयार है. क्या अखिलेश एक और चाचा स्वीकार करने के लिए तैयार हैं. क्या होगा अगर मुलायम सिंह यादव अखिलेश को अपनी कुर्सी देकर राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दें.
This Article is From Oct 24, 2016
प्राइम टाइम इंट्रो : यूपी में समाजवादी फ़ैमिली ड्रामा
Ravish Kumar
- ब्लॉग,
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Updated:अक्टूबर 24, 2016 21:34 pm IST
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Published On अक्टूबर 24, 2016 21:34 pm IST
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Last Updated On अक्टूबर 24, 2016 21:34 pm IST
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