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धर्म और अर्थ का महाकुंभ! आस्था से आर्थिक प्रगति की ओर

Himanshu Shekhar Mishra
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    फ़रवरी 28, 2025 19:55 pm IST
    • Published On फ़रवरी 28, 2025 18:54 pm IST
    • Last Updated On फ़रवरी 28, 2025 19:55 pm IST
धर्म और अर्थ का महाकुंभ! आस्था से आर्थिक प्रगति की ओर

मैं 27 दिसंबर, 2024 को प्रयागराज पहुंचा था "इकोनॉमिक्स ऑफ़ महाकुंभ" पर डाक्यूमेंट्री शूट करने. इससे पहले मैंने किसी महाकुंभ पर रिपोर्टिंग नहीं की थी. प्रयागराज भी कई वर्षों के बाद गया था. उस दिन शाम को जब हम अपने सहयोगी राहुल भारद्वाज को छोड़ने रेलवे स्टेशन पहुंचे, हमने देखा कि बड़ी संख्या में NDRF, रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स, यूपी पुलिस के अधिकारी कुछ डॉक्टरों के साथ प्रयागराज रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म 6 पर एक सिक्योरिटी ड्रिल शुरू कर रहे थे. मैंने फ़ौरन शूट शुरू कर दिया. ये एक नया अनुभव था. पता चला की महाकुंभ के लिए एक डिजास्टर मैनेजमेंट ड्रिल चल रहा है, जो उस दिन घाटों से लेकर बस अड्डा और शहर के कई दूसरे हिस्सों में एक साथ प्लान किया गया था.

ये पहला संकेत था कि यूपी सरकार कितने बड़े स्तर पर महाकुंभ की तैयारियों में जुटी थी. प्रयागराज का रेलवे स्टेशन देश के सबसे बड़े रेलवे स्टेशनों में गिना जाता है, जहां करोड़ों श्रद्धालु महाकुंभ के दौरान पहुंचने वाले थे. इसीलिए रेलवे स्टेशन पर क्राउड मैनेजमेंट के लिए बड़े स्तर तैयारी की जा रही थी.

उसके अगले दिन जब 17 किलोमीटर लम्बे और 14 किलोमीटर चौड़े महाकुंभ मेला ग्राउंड पहुंचा तो अहसास हुआ कि महाकुंभ के आयोजन का दायरा कितना बड़ा था. हर तरफ कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था. कहीं अखाड़ों के कैंप लग रहे थे, तो कहीं फ़ूड स्टाल तैयार हो रहा था. कहीं लक्ज़री टेंट सिटी लग रहे थे, तो कहीं आम श्रद्धालुओं के लिए शिविर तैयार किये जा रहे थे. गंगा तट पर हर तरफ आर्थिक गतिविधियां दिखाई दे रही थीं. नए घाटों का निर्माण भी तेज़ी से चल रहा था.

योगी सरकार के नगर विकास मंत्री अरविन्द शर्मा एक नए घाट पर स्वच्छता अभियान लांच करने पहुंचे थे. मेरी "इकोनॉमिक्स ऑफ़ महाकुंभ" डाक्यूमेंट्री की शूट उसी कार्यक्रम से शुरू हुई. मैंने उनसे इंटरव्यू में पूछा कि इस बार महाकुंभ के दौरान कितनी बड़ी अर्थव्यवस्था खड़ी होगी? अरविन्द शर्मा ने कहा, "2019 के अर्धकुम्भ के दौरान 1 लाख 20 हज़ार करोड़ रुपये की इकॉनमी क्रिएट हुई थी. इस बार अर्थव्यवस्था का दायरा 1,50,000 लाख करोड़ से कहीं ज़्यादा होगा, क्योंकि हमारा अनुमान है की 40 करोड़ से ज़्यादा श्रद्धालु इस बार प्रयागराज पहुंचेंगे."

कुछ ही दिन बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महाकुंभ के दौरान 2 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था खड़ी होने की उम्मीद है. उनका दावा था कि आस्था से प्रयागराज क्षेत्र में आर्थिक प्रगति आएगी!

इस धार्मिक नगरी में बुनियादी ढांचे को तैयार करने की कवायद लम्बे समय तक चली. करोड़ों श्रद्धालु आसानी से महाकुंभ पहुंच सकें, इसके लिए नए हाईवे और ब्रिज तैयार किये गए. जिनपर केंद्र और यूपी सरकार ने मिलकर करीब 15,000 करोड़ का निवेश किया था. शहर में सैकड़ों नए होटल और गेस्ट हाउस तैयार किये गए. श्रद्धालुओं की तरफ से बुकिंग की बढ़ती मांग को देखते हुए ट्रांसपोर्टरों और ट्रेवल एजेंट्स ने उतर प्रदेश के कई ज़िलों से बसों, मिनी-बसों और टैक्सी का इंतज़ाम किया.  

13 जनवरी को जब महाकुंभ शुरू हुआ तो उसकी तस्वीरें धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं. सोशल मीडिया के इस दौर में जैसे-जैसे महाकुंभ के पहले शाही स्नान की तस्वीरें दुनियाभर में पहुंचने लगीं, आम लोगों में महाकुंभ को लेकर उत्सुकता भी बढ़ने लगी. धीर-धीरे महाकुंभ मेला ग्राउंड श्रद्धालुओं से भरने लगा.

परंपरा की पीठ पर सवार धर्मनगरी प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान उस परंपरा और संस्कृति का उत्सव हर तरफ दिखा.  45 दिनों तक पूरे प्रयागराज में हर तरफ धर्म में नहाया हुआ जोश और हौसला दिखाई दिया.

जब श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी, तो ट्रांसपोर्ट से लेकर हॉस्पिटैलिटी और धार्मिक पर्यटन से जुडी अर्थव्यवस्था का दायरा भी बढ़ने लगा. करीब 40 दिन बाद जब महाकुंभ के दौरान हुए कुल कारोबार पर कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स की पहली रिपोर्ट आयी तो उसमें खुलासा हुआ कि प्रयागराज में कुल कारोबार 3 लाख करोड़ से भी ज़्यादा का हुआ!

कई मायनों में महाकुंभ 2025 आस्था के साथ-साथ अर्थ का भी महाकुंभ साबित हुआ. 45 दिन तक चले महाकुंभ के दौरान दुनिया के सौ से ज़्यादा देशों से 67 करोड़ से ज़्यादा श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे. इसकी वजह से ट्रांसपोर्ट सेक्टर से लेकर हॉस्पिटेलिटी, टूरिज्म तक सैकड़ों सेक्टरों के बिज़नेस में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हुई.

"आज दुनिया उत्तर प्रदेश की जिस क्षमता को देख रही है, उसे महाकुंभ मेले से जोड़ा जा सकता है। अकेले महाकुंभ से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि में मदद मिलेगी", उत्तर प्रदेश विधान सभा में दिए भाषण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स के आंकलन पर मुहर लगायी.  

दरअसल, दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा महाकुंभ उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हुआ है. महाकुंभ के 45 दिनों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या अनुमान से दोगुनी से भी ज़्यादा थी. इस वजह से प्रयागराज क्षेत्र में अर्थव्यवस्था भी पहले अनुमानित 2 लाख करोड़ की जगह 3 लाख करोड़ की खड़ी हुई, यानी उम्मीद से 50% से भी ज़्यादा!  

महाकुंभ खत्म होते-होते होने कारोबार का आकलन और बढ़ गया. अहम बात ये रही कि प्रयागराज पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का एक बड़ा तबका संगम में डुबकी लगाने के बाद अयोध्या के राम मंदिर, काशी विश्वनाथ और चित्रकूट भी भगवान के दर्शन के लिए पहुंचा. इसकी वजह से Varanasi-Prayagraj-Ayodhya-Chitrakoot धार्मिक पर्यटन का एक बड़ा और ऐतिहासिक सर्किट महाकुंभ के दौरान काफी पॉपुलर हुआ.  

कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव और दिल्ली की चांदनी चौक सीट से लोक सभा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने मुझे बताया कि बड़ी संख्या में जो श्रद्धालु महाकुंभ आये वो Kashi, Ayodhya और Chitrakoot भी पहुंचे. इसीलिए इस ऐतिहासिक धार्मिक क्षेत्र में कुल कारोबार 4 लाख करोड़ से भी ज़्यादा का हुआ. प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, "हमारा आकलन है कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज, अयोध्या, काशी, चित्रकूट और मिर्जापुर में 4 लाख करोड़ से ज्यादा का कारोबार हुआ है. सिर्फ प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान 3 लाख करोड़ से ज्यादा की अर्थव्यवस्था खड़ी हुई".

ज़ाहिर है, पूरे प्रयागराज क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां अप्रत्याशित रहीं, पूरे महाकुंभ मेला ग्राउंड क्षेत्र में हर तरफ एक बड़ा आर्थिक क्षेत्र तैयार हो गया. प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं, उत्तर प्रदेश सरकार को हज़ारों करोड़ रुपये की राजस्व से कमाई हुई. उनके मुताबिक, महाकुंभ के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार को 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये की राजस्व की कमाई हुई!

महाकुंभ का असर सिर्फ आस्था और अर्थ तक सीमित नहीं रहा. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ा गांव में बागेश्वर धाम में महाकुंभ के सफल आयोजन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आजकल हम देख रहे हैं महाकुंभ की हर तरफ चर्चा हो रही है. करोड़ों लोगों ने आस्था की डूबकी लगाई है, संतों के दर्शन किए हैं. अगर इस महाकुंभ की तरफ नजर करें तो सहज भाव उठ जाता है, ये एकता का महाकुंभ है. आने वाली सदियों तक 144 वर्ष के बाद हुआ ये महाकुंभ, एकता के महाकुंभ के रूप से प्रेरणा देता रहेगा और देश की एकता को मजबूती देने का अमृत परोसता रहेगा".  

इसका फायदा इस पूरे क्षेत्र में स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला...जब व्यापार बढ़ा तो कारोबार बढ़ा और रोज़गार भी. ट्रांसपोर्ट से लेकर हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री तक इसका असर हर तरफ दिखा.

प्रयागराज में डी कुमार लिमिटेड के डायरेक्टर, दिनेश अग्रवाल कहते हैं,  "जब भी इतना बड़ा धार्मिक आयोजन होता है, इसका स्थानीय इकॉनमी पर सकरात्मक असर पड़ता है. नए होटल का निर्माण होता है, नयी सप्लाई चैन तैयार होती है, रोज़गार के अवसर बढ़ते हैं."

ज़ाहिर है, महाकुंभ 2025 से एक नयी शुरुआत हुई है. प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं, महाकुंभ के दौरान जिस तरह से एक धार्मिक सर्किट सक्रिय हुआ, उसको देखते हुए देश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नयी राष्ट्रीय नीति बननी चाहिए. खंडेलवाल के मुताबिक, महाकुंभ ने साबित किया है कि देश में धार्मिक पर्यटन बढ़ रहा है. वो चाहते हैं कि देश में नेशनल रिलीजियस टूरिज्म पालिसी बने, जिससे धार्मिक पर्यटन स्थलों के प्रति आम लोगों की आस्था का सम्मान भी होगा और व्यापर भी बढ़ेगा. खंडेलवाल जल्दी ही प्रधानमंत्री, केंद्रीय टूरिज्म मंत्री और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को चिठ्ठी लिखने वाले हैं कि आस्था भी आर्थिक प्रगति का एक स्रोत हो सकता है.  


हिमांशु शेखर मिश्रा एनडीटीवी में सीनियर एडिटर (पॉलिटिकल एंड करंट अफेयर्स) हैं. इस लेख में लेखक के निजी विचार हैं. 
 

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