शुक्रवार दोपहर रावलपिंडी की अदियाला जेल के बाहर जमात-उद-दावा के समर्थक इंतज़ार में खड़े थे। लाहौर हाईकोर्ट ने एक दिन पहले मुंबई हमले के मास्टरमाइंड ज़की-उर-रहमान लखवी की हिरासत पर रोक लगाते हुए 10-10 लाख के दो मुचलकों पर रिहाई का आदेश दे दिया था।
सिर्फ कानूनी काग़जात जेल तक पहुंचने की देर थी। कुछ ही देर में 2008 के मुंबई हमले में 166 की हत्या का जिम्म्दार अपने समर्थकों की तरफ हाथ हिलाते हुए बाहर निकला और गाड़ियों का एक काफिला उसे ले चला। पंजाब सरकार का डिटेन्शन ऑर्डर किसी काम नहीं आया। लेकिन शायद ऐसा ही होना था।
अदालत के आदेश के बाद भारत सरकार ने सख्त आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में साफ कहा था कि "हमने अपनी चिंताएं पहले भी पाकिस्तान सरकार को बताई हैं, फिर से बताएंगे... एक ज्ञात आतंकवादी को अगर सही तरीके से सज़ा नहीं दी जा रही है, तो वह न सिर्फ भारत, बल्कि दुनियाभर के लिए खतरा है... इससे पाकिस्तान के बार-बार सीमा पार आतंकवाद को रोकने के आश्वासन भी कमज़ोर दिखते हैं..."
असल में अब तक मुंबई हमले का मामला पाकिस्तान की अदालतों में इतनी धीमी गति से चला है, इतने वकील, जज बदले हैं, भारत के दिए पुख्ता सबूतों को इस तरह दबाया गया है, उन पर सवाल उठाए गए हैं कि लखवी का छूटना कोई आश्चर्य की बात नहीं। यह होना ही था। पेशावर हमले के बाद उम्मीद जगी थी कि स्कूली बच्चों की हत्या के बाद पाकिस्तान आतंक के असल खतरे को समझेगा और आतंकवादियों में कोई फर्क नहीं करेगा, लेकिन लखवी का जेल से बाहर आना बताता है कि रवैये में कोई बदलाव नहीं है।
भारत के खिलाफ आतंकवादी कार्रवाई करने वाले आतंकवादी असल में पाकिस्तान के काम के हैं। भारत की खुफिया एजेंसियों के मुताबिक लखवी का इस्तेमाल पाकिस्तान भारत के खिलाफ ही करेगा और किसी बड़े हमले की कोशिश से इनकार नहीं किया जा सकता। गृहमंत्री राजनाथ सिंह कह रहे हैं कि ऐसे वक्त में, जब भारत एक बार फिर पाकिस्तान से बातचीत शुरू करने की कोशिश कर रहा है, लखवी का जेल से छूटना दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक है।
लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि भारत के पास विकल्प क्या हैं। अपनी नाराज़गी वह जता चुका है। कोर्ट की अगली सुनवाई का इंतज़ार उसे रहेगा, हालांकि पाकिस्तान को लगातार पैसे और हथियार मुहैया कराने वाले अमेरिका से और बाकी देशों के जरिये भी वह दबाव बनाने की पूरी कोशिश करेगा। फौरी तौर पर पहले से ज्यादा सजग-सतर्क रहने की ज़रूरत है, लेकिन बातचीत रोकना शायद एक गलत कदम होगा।