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क्या मेसी अर्जेंटीना को लगातार दूसरी बार दिला पाएंगे विश्व कप, कितनी बार हुआ है यह कारनामा

अमित कुमार कड़वासरा
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    जून 18, 2026 16:46 pm IST
    • Published On जून 18, 2026 16:46 pm IST
    • Last Updated On जून 18, 2026 16:46 pm IST
क्या मेसी अर्जेंटीना को लगातार दूसरी बार दिला पाएंगे विश्व कप, कितनी बार हुआ है यह कारनामा

16 जून को एर्लिंग हालैंड और कीलियन एमबापे जैसे यंग स्टार फिल्ड पर उतरे, उस दिन भी फुटबॉल वर्ल्ड कप में अगले सप्ताह 39 साल के होने वाले लियोनेल मेसी का ही जलवा रहा. मेसी ने दिखाया कि उम्र का उन पर कोई असर नहीं हुआ है. लेकिन अर्जेंटीना की ये जीत केवल मेसी के जादू पर ही नहीं टिकी हुई थी. इसके पीछे एक और लियोनेल का भी हाथ है. वो हैं टीम के कोच लियोनल स्कलोनी. पहले मैच के आधार पर जानेंगे कि क्या रणनीति रही अर्जेंटीना के कोच स्कलोनी की और अर्जेंटीना लगातार वर्ल्ड कप जीतने की कितनी बड़ी दावेदार है. 

अर्जेंटीना की टीम का फॉर्मेशन कैसा है

स्कलोनी की टीम उसी फॉर्मेशन में खेली जिस फॉर्मेशन में पिछले वर्ल्ड कप के फाइनल में खेली थी. अर्जेटीना 4-3-3 के संतुलित सिस्टम के साथ फील्ड पर आई, जिसमें मेसी को आजाद घूम कर अटैकिंग एरिया में स्पेस बनाने की खुली छूट थी. 2022 के फाइनल में जो मिडफील्ड अर्जेंटीना ने उतारी थी, वही इस बार थी. जो स्कलोनी की टीम सलेक्शन में निरंतरता को दर्शाता है. बाकी अटैक और डिफेंस में खिलाड़ियों की चोट, फॉर्म और संन्यास की वजह से कई बदलाव थे. 

कोच स्कलोनी की कमान में अर्जेंटीना 4-3-3 के सिस्टम में संयम के साथ संगठित रहते हुए और गेंद अपने पास रखकर अटैक करने में विश्वास रखती है. ऐसा ही कुछ पिछले वर्ल्ड कप फाइनल के फर्स्ट हाफ में देखने को मिला था, वही आज देखने को मिला. मेसी की सबसे बड़ी ताकत डिफेंसिव लाइन के बीच से पास देकर सामने वाली टीम तहस-नहस कर देना है. कोच इसका बखूबी उपयोग करते हैं. तीन वर्ल्ड क्लास मिडफील्डर एंजो फर्नांडिस, एलेक्सिस मैक एलिस्टर और रॉड्रिगो डे पॉल के साथ स्कलोनी मैच को अपने कंट्रोल में रखने की कोशिश करते हैं. मेसी को फील्ड पर पूरी तरह आजाद घूमने की छूट रहती है. उनके ऊपर विरोधी टीम के खिलाडियों पर दबाब डालकर गेंद छीनने की जिम्मेदारी भी नहीं होती है, क्योंकि 39 की उम्र में मेसी उतना नहीं दौड़ सकते जितना वो जवानी में दौड़ पाते थे. इसकी भरपाई मिडफील्ड अच्छी तरह से कर लेती है.

अर्जेंटीना की टीम की ताकत क्या है 

टीम की सबसे बड़ी ताकत ऐसी है जो दूसरी टीम किसी भी तरह से हासिल नहीं कर सकती. वो ताकत है मेसी. मेसी के जैसे विरोधी टीम के डिफेंस में गैप ढूंढना और फिर एकदम सटीक पास देने वाला काम कोई नहीं कर सकता. डिफेंस की बात करें तो टीम के पास क्रिस्चियन रोमेरो और लिसांड्रो मार्टिनेज के रूप में दो सॉलिड सेंटर बैक हैं. दोनों ने अल्जीरिया के खिलाफ कोई गलत कदम नहीं रखा. वहीं बेंच पर पिछले फाइनल की प्लेइंग 11 का हिस्सा रहे निकोलस ओटामेंडी हैं. गोल पोस्ट पर भरोसेमंद गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज है. इस मैच में उनके पास करने के लिए कुछ खास नहीं था. लेकिन वो अभी-अभी यूरोपा लीग जीतकर आए हैं. इसलिए उनका कॉन्फिडेंस काफी ऊपर होगा. राइट बैक नाहुल मेलिना और लेफ्ट बैक फाकुण्डों मेडिना दोनों इस मैच में डिफेंस के नजरिए से मजबूत थे.मिडफील्ड तिकड़ी की बात पहले कर चुके हैं. कई सालों से तीनों डिफेंडर साथ खेल रहे हैं. उनके बीच शानदार तालमेल इस मैच में भी देखने को मिला.

Argentine Football Team, FIFA World Cup

अर्जेंटीना उन तीन टीमों में शामिल हैं, जिन्होंने लगातार दो बार विश्व कप फुटबॉल के फाइनल खेले हैं.

अर्जेंटीना की टीम की कमजोरी क्या है

टीम के सेंटर बैक बॉल क्लियर करने में और टैकल में शानदार है. लेकिन दोनों सेंटर बैक की एक बड़ी खामी है कि उनकी स्पीड काफी कम है. जिसकी वजह से काउंटर अटैक के समय टीम मुश्किल में पड़ जाती है. ऐसा ही कुछ इस मैच के शुरुआत में देखने को मिला जब काउंटर अटैक करते हुए अल्जीरिया ने गोल दाग दिया था. लेकिन ऑफ़साइड कॉल की वजह से गोल रद्द हो गया था. वही दोनों सेंटर बैक हवा में हेडर डिफेंड करने में कमजोर हैं. कद में लंबे फॉरवर्ड टीम के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं. स्कलोनी अच्छे कोच के साथ मैन मैनेजमेंट में भी माहिर हैं. वो अपने खिलाड़ियों का ध्यान भटकने नहीं देते हैं. फिर भी रोमेरो कई बार डिफेंस में अचानक से बड़ी गलती कर बैठते हैं. उनको इस सीजन क्लब के लिए खेलते हुए दो रेड कार्ड मिल चुके हैं. दोनों फुलबैक ने इस मैच में अटैक में कोई खास योगदान नहीं दिया और अटैकिंग एंड पर उनकी पासिंग भी कमजोर नजर आई.

अटैक में मेसी के अलावा थियागो अल्माडा और लौटारो मार्टिनेज दोनों ही कुछ जोड़ नहीं पाए थे. मार्टिनेज ने पिछले वर्ल्ड कप में भी स्टार्टिंग 11 से अपना स्थान गवां दिया था. 

क्या कोच लियोनल स्कलोनी करेंगे टीम में कोई बदलाव

स्कलोनी बहुत ही फ्लेक्सिबल कोच हैं. यह बात पिछले वर्ल्ड कप में देखने को मिली थी, जब टूर्नामेंट के बीच में उन्होंने 21 साल के एंजो फर्नांडीज को मिडफील्ड में उतारा था. अटैक को मजबूत करने के लिए ऐसा ही कुछ वो इस वर्ल्ड कप में कर सकते हैं. अल्माडा को हटाकर निको गोंजालेज को फ्लैंक पर खिला सकते हैं. क्योंकि जब वो सब्स्टीट्यूट के तौर पर फील्ड पर आए तो अल्माडा से अच्छा खेल दिखाया. वही जूलियन अल्वारेज के ठीक होने पर मार्टिनेज की जगह टीम में वापसी तय है.

स्कलोनी की एक और खास बात है, वह है सामने वाली टीम के हिसाब से अपनी रणनीति में बदलाव करना जो इंटरनेशनल फुटबॉल में देखने को कम मिलती है. इसकी जांच अगले मैच में देखने को मिल सकती है, जब ऑस्ट्रिया से उनका मुकाबला होगा.क्योंकि राल्फ रंगनिक की कोचिंग के साथ ऑस्ट्रिया अच्छा अटैकिंग फुटबॉल खेल रही है. वो स्कलोनी के लिए परेशानी पैदा करने में कोई कमी नहीं छोड़ेंगे.

क्या आंकड़े अर्जेंटीना के पक्ष में हैं 

अर्जेंटीना ने जैसा खेल अल्जीरिया के खिलाफ खेला, उससे इतना तो तय है कि वो टूर्नामनेंट में काफी आगे तक जाएगी. लेकिन लगातार वर्ल्ड कप जीतना कितना कठिन होता है, वो इन आंकड़ों से साफ पता चलता है. वर्ल्ड कप इतिहास में केवल दो बार ऐसा हुआ है.1934 और 1938 में इटली और 1958 और 1962 में ब्राजील ने लगातार दो बार वर्ल्ड कप जीता था. लगातार फाइनल खेलना ही बहुत मुश्किल है. केवल तीन बार ऐसा हुआ है. अर्जेंटीना 1990 में, ब्राजील 1998 में और फ्रांस जो इस बार भी वर्ल्ड कप का बड़ा दावेदार है, वो 2022 में ऐसा करने में सफल रहा है. 

लेकिन मेसी की उपस्थिति की वजह से अर्जेंटीना के सफल होने के अवसर बढ़ जाते हैं. उनकी किसी भी समय मैच बदलने की क्षमता को दरकिनार नहीं किया जा सकता. पिछले वर्ल्ड कप में जीत के बाद मेसी के कंधों पर अर्जेंटीना के लिए वर्ल्ड कप जीतने का बोझ नहीं है. वहीं पिछली बार की विजेता टीम के मुख्य सदस्य इस बार भी मौजूद है. वही इस बार टीम ने शुरुआत अच्छी की है, जबकि पिछले वर्ल्ड कप के पहले मैच में उनको सऊदी अरबिया के खिलाफ बड़े उलटफेर का शिकार होना पड़ा था. इसका फायदा ये हो सकता है कि शुरुआत के दो मैच जीत कर जल्दी क्वालीफाई करने पर तीसरे मैच में टीम के जरूरी खिलाड़ियों को आराम दिया जाए. इससे वो आगे के राउंड के लिए काफी फिट रहेंगे. स्कलोनी के रूप में एक बढ़िया रणनीतिकार कोच भी उनके पास है. अगर 39 की उम्र में मेसी ऐसा कर पाते हैं तो ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम (GOAT) का क्राउन हमेशा के लिए उनका हो सकता है. 

(डिस्क्लेमर: लेखक फ्रीलान्स राइटिंग और स्पोर्ट्स कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में पिछले छह साल से काम कर रहे हैं. उनकी दिलचस्पी क्रिकेट और फुटबॉल जैसे खेलों को फॉलो करने के साथ-साथ खेल और खिलाड़ियों का विश्लेषण करने में रही है. इस लेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)

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FIFA World Cup 2006, Lionel Andres Messi, Argentine
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