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This Article is From Sep 04, 2018

क्या गोरक्षा का मुद्दा हथियाने की फ़िराक़ में है कांग्रेस? 

Akhilesh Sharma
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    सितंबर 04, 2018 20:33 pm IST
    • Published On सितंबर 04, 2018 20:33 pm IST
    • Last Updated On सितंबर 04, 2018 20:33 pm IST
देश की राजनीति की धारा बदलती हुई दिख रही है. अब तक बीजेपी कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाती आई है. छद्म धर्मनिरपेक्षता के नाम पर बीजेपी दूसरे विपक्षी दलों पर हमला करती आई है. इफ्तार पार्टियां सियासत का बड़ा हिस्सा बन गईं थीं और बीजेपी का आरोप था कि मुसलमानों को खुश करने के लिए इन पार्टियों ने हिंदुओं के हितों को चोट पहुंचाई. बीजेपी खुद को हिंदू हितों के सबसे बड़े रक्षक के तौर पर पेश करने लगी और हिंदू ह्रदय सम्राट के तौर पर नरेंद्र मोदी ने अपने बूते बीजेपी को 282 सीटें दिलवा दीं. अब कांग्रेस भी इसी बदली धारा का हिस्सा बनती दिखना चाह रही है. बात सिर्फ राहुल गांधी के मंदिरों के दौरों तक सीमित नहीं रह गई है. एक तरफ राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस बीजेपी के हिंदुत्व का एक बड़ा मुद्दा गोरक्षा हथियाने की फिराक में है. मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने एक ट्वीट में कहा प्रदेश की हर पंचायत में गौशाला बनाएंगे. ये घोषणा नहीं वचन है.

यह बीजेपी को उसी के गढ़ में चुनौती देने और उसके हाथ से एक बड़ा मुद्दा छीनने की कोशिश है. मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार अपने गोप्रेम के लिए अक्सर चर्चा में रहती है. राज्य सरकार ने देश का पहला गौ अभयारण्य बनाया. राज्य के आगर जिले के सलारिया गांव में 472 हेक्टेयर में फैले इस अभयारण्य में अभी करीब चार हजार गायों को रखा गया है. हालांकि इसमें छह हजार गायों को रखने की व्यवस्था है, लेकिन बीच में यहां फंड की कमी होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. बजट दस करोड़ का है मगर आवंटन पांच करोड़ का ही हुआ और उसमें से भी चार करोड़ सिर्फ चारे पर खर्च हो रहा है. यहां उन बुजुर्ग या बीमार गायों को लाया जाता है जो दूध नहीं दे सकतीं. उनके गोबर से गैस बनाने और गो मूत्र को बेचने की योजना बनाई गई थी. इसी की देखादेखी पड़ोसी राज्य राजस्थान ने भी अपने यहां गौ अभयारण्य बनाने की योजना बनाई है.

गायों को लेकर शिवराज सरकार का प्रेम यहीं नहीं रुका है. उन्होंने मध्य प्रदेश में गौसंवर्धन बोर्ड बनाया है. इसके अध्यक्ष के पद पर एक साधु स्वामी अखिलेश्वरानंद की नियुक्ति की गई. उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया है. कुछ दिनों पहले स्वामी जी ने कहा कि बेहतर होगा कि गायों के लिए एक अलग मंत्रालय ही बना दिया जाए. यह विचार पड़ोसी राज्य राजस्थान से आया जहां गायों के लिए गोसचिवालय की बात हुई है. इसके अलावा राज्य सरकार ने नब्बे लाख मवेशियों की पहचान के लिए आधार जैसी पहचान देने की योजना भी बनाई है. अंदाजा है कि राज्य में करीब 54 लाख गायें हैं. उनकी पहचान के लिए आधार जैसे नंबर देने की योजना है.

अब बात करते हैं कांग्रेस की. कमलनाथ का वादा कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार के फैसलों के ठीक उलट है. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री रहते हुए दिग्विजय सिंह ने दलित खेतिहर मजदूरों के पास ज़मीन न होने की समस्या को दूर करने के लिए एक बड़ा फैसला किया था. इसे दलित एजेंडा कहा गया. हर गांव मे मौजूद चरनोई या वो सरकारी जमीन जहां गांव के मवेशी चारा चरते थे, उसके पट्टे दलितों और आदिवासी परिवारों को बांटने का फैसला किया गया था. चार मार्च 1998 को सभी कलेक्टरों से कहा गया था कि वे चरनोई की जमीन साढ़े सात फीसदी से घटा कर पांच फीसदी कर दें और इस तरह करीब डेढ़ लाख एकड़ जमीन के 80 हजार से ज्यादा पट्टे दलित आदिवासी परिवारों को बांट दिए गए. बाद में यह क्षेत्रफल बढ़ाया गया और करीब छह लाख एकड़ जमीन चार लाख परिवारों को दी गई. इस फैसले का गांवों के सामाजिक तानेबाने पर असर पड़ा और कई जगहों पर हिंसा भी हुई. दिग्विजय सिंह एक कदम आगे बढ़ गए. उन्होंने पांच गांवों के सवर्ण और रसूखदार पिछड़ों पर पच्चीस लाख रुपए का जुर्माना लगा दिया. तब बीजेपी की मुख्यमंत्री पद की दावेदार उमा भारती ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया. यह दलित एजेंडा दिग्विजय सिंह पर भारी पड़ा. अब वही कांग्रेस हर पंचायत में गौशाला बनाने की बात कर रही है. जाहिर है राजनीति जो न कराए वो कम है.

(अखिलेश शर्मा NDTV इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

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