बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि उनके शासनकाल में जितना अब तक काम हुआ है उतना लोग सोचते भी नहीं थे. सबकी सोच से अधिक उन लोगों ने अभी तक करके दिखाया है. नीतीश कुमार शनिवार को गणतंत्र दिवस के मौक़े पर पटना के समीप फुलवारी शरीफ़ में एक महादलित टोले में झंडोत्तोलन के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे. यहां पर झंडोत्तोलन की ख़ास बात यह होती है कि झंडा मुख्यमंत्री नहीं बल्कि उस महादलित टोले का एक वयोवृद्ध व्यक्ति फहराता है. नीतीश कुमार का कहना है कि इस साल के अंत तक बिहार में न केवल जर्जर बिजली के तारों को बदल दिया जाएगा बल्कि किसानों के खेत तक PC फ़ीडर के माध्यम से ही बिजली भी पहुंचा दी जाएगी.
नीतीश कुमार ने अपने काम का बखान करते हुए लोगों को याद दिलाया कि जब उनकी सरकार बनी तब उस समय बिहार में पंचायती राज व्यवस्था में किसी के लिए भी आरक्षण का प्रावधान नहीं था, तो सबसे पहले उन्होंने न केवल महिलाओं के लिए उनकी आबादी के अनुरूप 50 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की बल्कि अनुसूचित जाति/जनजाति और ख़ासकर अति पिछड़ों के लिए भी 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया.
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नीतीश ने कहा, 'हमारे इस क़दम को कितनी चुनौती दी गई लेकिन चूंकि हमारे क़ानून में कोई कमी नहीं थी, सोच समझकर हम लोगों ने संवैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर बनाया था, इसलिए वो उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में क़ानून की कसौटी पर खरा उतरा. निश्चित रूप से नीतीश लोगों को इस बात को याद दिलाना चाहते थे कि उनसे पूर्व लालू यादव ने पंचायती राज व्यवस्था में किसी भी जाति या वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं किया था और उनकी सरकार इस मुद्दे पर गंभीर थी, जिसके कारण कोर्ट मे इसे चुनौती देने के सारे प्रयास धराशायी हो गए.
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ये समारोह एक महादलित टोले में आयोजित था और राज्य में शराब बंदी को लेकर महादलितों की बड़ी संख्या में गिरफ़्तारी के मुद्दे पर भी नीतीश ने कहा कि जो एक लाख लोगों की शराबबंदी के बाद गिरफ़्तारी की बात की जा रही है वो ग़लत है क्योंकि बिहार में ज़ेलों की क्षमता 38000 लोगों को रखने की है. उन्होंने कहा कि जो भी लोग इस धंधे से जुड़े थे उनके वैकल्पिक रोज़गार की व्यवस्था की जा रही है लेकिन शराबबंदी के फ़ैसले से वह वापस नहीं जाएंगे.
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