- बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल की हार के बाद समीक्षा समिति ने हार के कई कारणों की पहचान की.
- अंतिम समय तक टिकट बंटवारे में देरी और नाराज नेताओं को मनाने में असमयता हार के मुख्य कारण रहे.
- समीक्षा में महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता और सरकारी तंत्र का भी हार में योगदान माना गया.
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में समीक्षा के लिए समिति बनाई गई, जिसमें अब्दुल बारी सिद्दीकी, आलोक मेहता, उदय नारायण चौधरी जैसे और भी नेता थे. इन लोगों ने RJD के हर एक उम्मीदवार से मुलाकात की, साथ में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी इनपुट लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की. RJD की इस समीक्षा समिति ने पाया कि नीतीश कुमार सरकार द्वारा महिलाओं को 10 हजार रुपए देना और सरकारी तंत्र इस हार की एक प्रमुख वजह तो थी लेकिन महागठबंधन ने भी कम गलतियां नहीं की.
अंतिम समय तक टिकट बंटवारा ना होना भी हार का कारण
आरजेडी के नेता भी मानते हैं कि अंतिम समय तक टिकट का बंटवारा ना होना और टिकट बांटने में देरी होना, सबसे बड़ा कारण रहा. फिर नाराज नेताओं को मनाने में देरी, जिससे लोग पार्टी को हरवाने में लग गए. कुछ ऐसे नेताओं को टिकट ना देना, जिससे दो-तीन जिलों में सीटों पर असर पड़ा. यही नहीं शीर्ष स्तर पर नेता और निचले स्तर के नेताओं और आम जनता के बीच की दूरी भी हार का बड़ा कारण रही.
तेजस्वी के लिए सुझाव- लालू की तरह आम लोगों के लिए दरवाजा
अब आने वाले दिनों के लिए कुछ सुझाव भी तेजस्वी यादव को दिए गए हैं जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है कि तेजस्वी अपने कार्यकर्ताओं और आम जनता के लिए दरवाजे खोलें जैसा कि लालू यादव के समय में होता था. कहने का मतलब है कि जितना हो सके सबसे मिलने की कोशिश करें. इसके लिए तेजस्वी पार्टी दफ्तर में भी निर्धारित समय के दौरान लोगों से मिल सकते हैं या अपने निवास पर.
फरवरी के बाद तेजस्वी बिहार संवाद यात्रा पर निकलेंगे
- यह भी सुझाव है कि फ़रवरी के बाद तेजस्वी बिहार संवाद यात्रा पर निकलें और पूरे बिहार का दौरा करें. इस दौरान वे ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं से मिलें और उनकी बातें सुनें.
- आरजेडी संगठन में बदलाव करें, जिलास्तर पर पार्टी को फिर से खड़ा करें. यादव के अलावा अन्य जातियों को जोड़ें पार्टी में सभी जातियों के युवाओं को जगह दें.
यादव और RJD प्रवक्ता अति आक्रामक ना हो
सिफारिश में यह भी कहा गया है कि यादव आक्रामक ना हो इसका विशेष ख्याल रखा जाए. एक अन्य सिफारिश में यह भी कहा गया है कि आरजेडी के प्रवक्ता टीवी पर ज्यादा आक्रामक होने से बचें. जो प्रवक्ता राष्ट्रीय स्तर के हैं वो राष्ट्रीय मुद्दों पर बोलें और प्रदेश स्तर के प्रवक्ता बिहार से संबंधित बहस में ही हिस्सा लें.
देखना दिलचस्प होगा तेजस्वी क्या करते हैं?
इस रिपोर्ट के बाद माना जा रहा है कि तेजस्वी अगले महीने के बाद बिहार के दौरे पर निकलेंगे. आरजेडी के तमाम नेता और कार्यकर्ता मानते हैं कि तेजस्वी एक बार फिर पिछले चुनाव परिणाम से सीख लेकर इन सुझावों पर अमल करने की कोशिश करेंगे. देखते हैं तेजस्वी अपने पिता की तरह फिर से लोगों से जुड़ने के लिए क्या करते हैं?
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