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This Article is From Oct 21, 2025

पातेपुर विधानसभा सीट रिजल्‍ट: बीजेपी के लखेन्‍द्र कुमार रौशन 22380 वोटों से जीते

Patepur Assembly Seat: पातेपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस, राजद और जनता दल ने तीन-तीन बार, जबकि भाजपा, जनता पार्टी और संयुक्त समाजवादी पार्टी ने दो-दो बार जीत हासिल की है. सोशलिस्ट पार्टी, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, सीपीआई और लोजपा ने एक-एक बार इस सीट पर कब्जा जमाया.

पातेपुर विधानसभा सीट रिजल्‍ट: बीजेपी के लखेन्‍द्र कुमार रौशन 22380 वोटों से जीते
पातेपुर सीट बिहार की सियासत महत्‍व
  • वैशाली जिले के पातेपुर विधानसभा क्षेत्र का गठन 1951 में हुआ. क्षेत्र राजनीतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण
  • पातेपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और इसमें भाजपा, राजद समेत कई पार्टियों ने चुनाव जीते हैं
  • वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा के लखनेंद्र कुमार रौशन ने राजद के शिवचरण राम को भारी मतों से हराया था
पटना:

पातेपुर विधानसभा सीट बीजेपी के लखेन्‍द्र कुमार रौशन ने  22380 वोटों के बड़े अंतर से जीत ली है. उन्‍होंने आरजेडी उम्‍मीदवार प्रेमा चौधरी को हराया जिन्‍हें 85976 वोट मिले. पातेपुर सीट पर तीसरे स्‍थान पर जन सुराज पार्टी के दशई चौधरी रहे, जिन्‍हें 4181 वोट मिले.  

किस पार्टी ने कब मारी बाजी 
 

यहां कांग्रेस, राजद और जनता दल ने तीन-तीन बार, जबकि भाजपा, जनता पार्टी और संयुक्त समाजवादी पार्टी ने दो-दो बार जीत हासिल की. सोशलिस्ट पार्टी, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, सीपीआई और लोजपा ने एक-एक बार इस सीट पर कब्जा जमाया. वर्तमान में भाजपा के लखेंद्र रौशन विधायक हैं, जिन्होंने 2020 में राजद के शिवचंद्र राम को हराया था. इससे पहले 2015 में इस सीट पर राजद और 2010 के चुनाव में बीजेपी ने यहां जीत दर्ज की थी. कुल मिलाकर बीते डेढ़ दशक में इस सीट पर बीजेपी और राजद उम्मीदवार में कड़ी टक्कर रही है.

वोटों का गणित

1985 के बाद के चुनावों में यह सीट कई बार कांग्रेस, जदयू, राजद, लोजपा और भाजपा के बीच पलटी. खास तौर पर प्रेमा चौधरी और महेंद्र बैठा जैसे नेताओं का इस सीट पर दबदबा रहा. पातेपुर में रविदास, पासवान, कुर्मी और कोरी मतदाता बहुसंख्यक हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं.

नदियों के किनारे बसे पातेपुर का ऐतिहासिक महत्‍व  

बूढ़ी गंडक और बाया नदियों के किनारे बसा यह क्षेत्र उपजाऊ भूमि के लिए प्रसिद्ध है. यहां धान, गेहूं और मक्का की खेती अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. स्थानीय बाजार के अलावा अनाज का व्यापार मुख्य रूप से महनार बाजार में होता है. धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की बात करें तो पातेपुर का श्रीराम-जानकी मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है. यह मंदिर भव्य और प्राचीन है, जिसमें भगवान राम, लक्ष्मण, मां जानकी और हनुमान की मूर्तियां स्थापित हैं. यह रामानंदी संप्रदाय के संतों के लिए भी तीर्थस्थल है. हर रामनवमी पर पातेपुर हाईस्कूल मैदान में एक माह तक मेला आयोजित होता है. इसके अलावा पातेपुर प्रखंड के डभैच्छ स्थित बाबा दरवेश्वरनाथ धाम लगभग पांच सौ साल पुराना है. यह तिरहुत, सारण और कोशी प्रमंडल में धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है.

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तिलकराज
Deputy News Editor
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