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This Article is From Sep 17, 2025

खोली लाइब्रेरी, शुरू किया मुर्गीपालन, जीविका योजना से बिहार की महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

शिवहर में सरकार की पहल से महिलाओं को नई पहचान मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में जीविका क्रेडिट को-ऑपरेटिव बैंक का शुभारंभ किया और करोड़ों की राशि ट्रांसफर की.

खोली लाइब्रेरी, शुरू किया मुर्गीपालन, जीविका योजना से बिहार की महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

कहते हैं कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र और बिहार सरकार लगातार काम कर रही है. जीविका योजना महिलाओं के लिए एक वरदान साबित हुई है. इसी से जुड़ी कुछ प्रेरणादायक कहानियां बेगूसराय, बक्सर और शिवहर की आपको बताते हैं.

बेगूसराय में 33 हजार से ज्यादा स्वयं सहायता समूह सक्रिय

बेगूसराय में इस वक्त 33 हज़ार से ज्यादा स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 3 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं. इन्हीं में शामिल हैं खरीदी गांव की लक्ष्मी कुमारी और मनीषा, जो कभी आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं. जीविका से जुड़ने के बाद आज वो न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि किसानों को जैविक खाद भी उपलब्ध करा रही हैं.

लाइब्रेरी खोलकर रोल मॉडल बन गईं

मटिहानी प्रखंड की क्रांति देवी भी जीविका से जुड़ने से पहले गृहणी भर थीं. लेकिन अब उन्होंने गांव में जीविका लाइब्रेरी खोलकर रोल मॉडल बन गई हैं. बच्चों को मुफ्त में पढ़ाई का लाभ मिल रहा है और लोग उन्हें अब “विद्या दीदी” कहकर बुलाते हैं.

'जीविका ने पूरा जीवन बदल दिया'

वहीं कुमकुम देवी ने जीविका से जुड़कर मुर्गीपालन से शुरुआत की. धीरे-धीरे आटा चक्की और अन्य कारोबार भी खड़े किए. आज उनके बेटे की नौकरी दिल्ली पुलिस में लगी है. कुमकुम देवी कहती हैं कि जीविका ने उनका पूरा जीवन बदल दिया.

इधर बक्सर में जीविका दीदियां भोजनालय चला रही हैं. समाहरणालय परिसर में जीविका दीदियों का रेस्टोरेंट लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हो चुका है. यहां लोगों को शुद्ध और सस्ता भोजन मिलता है.

सरकार की पहल से महिलाओं को नई पहचान मिली

शिवहर में भी सरकार की पहल से महिलाओं को नई पहचान मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में जीविका क्रेडिट को-ऑपरेटिव बैंक का शुभारंभ किया और करोड़ों की राशि ट्रांसफर की. इसी पहल से शिवहर के जलपरी महिला उत्पादक समूह ने मछली पालन शुरू किया. छह महिलाओं के इस समूह की मासिक आय आज 12 हजार तक पहुंच चुकी है.

तो यह थीं बिहार की जीविका दीदियों की कहानियां. कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं अब अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से न सिर्फ खुद का जीवन बदल रही हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी नई दिशा दे रही हैं.बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कि जीविका योजना से आज बिहार की लाखों महिलाएं रोजगार कर रही हैं.

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