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तैयारी के बावजूद नहीं हुआ नितिन नवीन का इस्तीफा, लोग पूछने लगे बिहार के CM बनेंगे क्या?

नीतीश का सीएम पद से इस्तीफा कब? पटना में क्या हो रहा है, नियम क्या कहते हैं?

तैयारी के बावजूद नहीं हुआ नितिन नवीन का इस्तीफा, लोग पूछने लगे बिहार के CM बनेंगे क्या?
नीतीश कुमार और नितिन नवीन के आसपास घूम रही है बिहार की सियासत
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  • नीतीश कुमार सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले हैं
  • नितिन नवीन आज विधानसभा से इस्तीफा देने नहीं पहुंचे और असम चले गए, जिससे उनकी जिम्मेदारी बदलने की चर्चाएं हैं
  • नियमों के मुताबिक इस्तीफा गजट नोटिफिकेशन के बाद चौदह दिनों के भीतर देना होता है, न कि चुनाव की तारीख से
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पटना:

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं. आज उन्होंने जदयू के वरीय नेताओं के साथ मैराथन बैठकें की. बैठक से बाहर निकल कर नेताओं ने कहा कि नीतीश कुमार कल MLC के पद से इस्तीफा देंगे. आज सुबह नितिन नवीन विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने  विधानसभा जाने वाले थे लेकिन आखिरी वक्त पर वे असम चले गए. इसको लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हैं. कहा जा रहा है कि उन्हें कोई और जिम्मेदारी दी जा सकती है. इसलिए उनका इस्तीफा रुका है. हालांकि स्पीकर प्रेम कुमार कह रहे हैं कि दोनों को सोमवार तक बिहार विधानमंडल की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा.क्या हैं इससे जुड़े नियम? नीतीश कुमार, नितिन नवीन को कब तक इस्तीफा देना होगा यह समझिए.

क्या मुख्यमंत्री बनने के लिए नितिन ने रोका इस्तीफा?

आज सुबह नितिन नवीन विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने  विधानसभा जाने वाले थे लेकिन आखिरी वक्त पर वे असम चले गए. उनका इस्तीफा स्वीकार करने के लिए स्पीकर प्रेम कुमार अपना दिल्ली दौरा बीच में छोड़कर पटना आए थे. देर रात विधानसभा के कर्मियों को छुट्टी के दिन कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए थे. स्पीकर प्रेम कुमार अपने चैम्बर पहुंच गए थे. लेकिन नितिन नवीन विधानसभा की बजाय एयरपोर्ट पहुंच गए और असम चले गए. सोमवार को भी वे असम में रहेंगे. यहां उनकी दो सभाएं होनी है. उनके पटना आने की आधिकारिक सूचना नहीं है. ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह चर्चा होने लगी कि नितिन नवीन को भाजपा मुख्यमंत्री बना सकती है. हालांकि पार्टी नेताओं का एक धड़ा यह कह रहा है कि नितिन नवीन बिहार विधानसभा से इस्तीफा दे देंगे. 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हो गए हैं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101-2 के तहत एक व्यक्ति सांसद और राज्य विधान मंडल का दोनों का सदस्य नहीं हो सकता है. दोनों अब राज्यसभा जाएंगे. 16 मार्च को वे निर्वाचित हो चुके हैं. इसलिए उन्हें बिहार विधान परिषद और विधानसभा की सदस्यता छोड़नी होगी. 

क्या कह रहे हैं स्पीकर?

बिहार विधानसभा में स्पीकर प्रेम कुमार ने कहा कि नितिन नबीन को 30 मार्च तक इस्तीफा देना होगा. रविवार की सुबह खबर आई कि नितिन नवीन 8 बजकर 40 मिनट पर राज्यसभा से इस्तीफा देंगे. स्पीकर अपने चैंबर में उनका इंतजार करते रहे लेकिन नितिन नबीन नहीं पहुंचे. वे असम निकल गए. प्रेम कुमार ने कहा कि नितिन नवीन को किसी इमरजेंसी काम के लिए जाना पड़ा. कल तक का समय है वे बाद में इस्तीफा दे सकते हैं. जब उनसे नीतीश कुमार के इस्तीफे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह परिषद का मामला है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है. 

स्पीकर के बयान और नियम अलग - अलग

हालांकि स्पीकर के बयान और नियम दोनों अलग - अलग हैं. दरअसल भारतीय संविधान के अनुच्छेद तहत यह प्रावधान है कि कोई व्यक्ति एक ही समय में संसद (लोकसभा/राज्यसभा) और राज्य के विधानमंडल (विधानसभा/ विधानपरिषद) दोनों का सदस्य नहीं हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो उसे एक निश्चित समय सीमा के अंदर एक सदन से त्यागपत्र देना होगा. समय सीमा का निर्धारण राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम से तय होगा. प्रोहिबिशन ऑफ सिमुल्टनियस मेंबरशिप रूल्स 1950 में इसकी समय सीमा तय की गई है. इस नियम में तहत दो सदनों के सदस्य निर्वाचित होने की स्थिति में व्यक्ति को 14 दिनों के अंदर अपना पद छोड़ना होगा. यह 14 दिन तब से गिने जाएंगे जब परिणाम का प्रकाशन केंद्रीय या राज्य गजट में होगा. यानी कि निर्वाचन की तारीख और गजट का प्रकाशन अलग - अलग होगी. ऐसे में कोई भी व्यक्ति इस्तीफा गजट नोटिफिकेशन के 14 दिनों के अंदर देने के लिए बाध्य होता है न कि निर्वाचन की तारीख से. 

क्या 30 मार्च तक इस्तीफा न देने से सदस्यता जाएगी? 

कहा जा रहा है कि अगर नीतीश कुमार और नितिन नवीन ने 30 मार्च तक इस्तीफा नहीं दिया तो उनकी राज्यसभा की सदस्यता चली जाएगी. लेकिन यह गलत है. क्योंकि अभी राज्यसभा के चुनाव परिणामों का गजट प्रकाशित नहीं हुआ है इसलिए वे इस्तीफा देने के लिए बाध्य नहीं हैं. 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देने की मियाद गजट नोटिफिकेशन के बाद होगी न कि निर्वाचन की तारीख से. 

नीतीश कब छोड़ेंगे सीएम की कुर्सी? 

सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार अप्रैल में राज्यसभा के सदस्य की शपथ लेंगे. इसी दौरान वे बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ देंगे. हालांकि वे राज्यसभा के सदस्य रहते हुए भी 6 महीने तक मुख्यमंत्री रह सकते हैं. स्पीकर प्रेम कुमार और मंत्री श्रवण कुमार यह बयान दे चुके हैं. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164 (4) कहता है कि कोई व्यक्ति राज्य विधानमंडल का सदस्य रहे बिना भी मुख्यमंत्री रह सकता है. इसलिए नीतीश कुमार पर राज्यसभा की सदस्यता लेने के बाद भी मुख्यमंत्री पद छोड़ने की संवैधानिक बाध्यता नहीं है. लेकिन सूत्र बताते हैं कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह में वे सीएम की कुर्सी भी छोड़ देंगे.

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