Bihar News: बिहार की राजनीति में आज भले ही जेडीयू (JDU) का एक विशाल कुनबा और मजबूत ढांचा है, लेकिन इसके बीज बहुत गहरे संघर्षों के बीच बोए गए थे. नीतीश कुमार के उस सियासी सफर और संघर्षों को सहेजने के लिए बनाए गए नीतीश आर्काइव (Nitish Archive) ने एक बार फिर इतिहास के पन्नों से एक ऐसी अनमोल चीज निकाली है, जो मौजूदा दौर की राजनीति के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है. यह कहानी 1990 के उस दशक की है, जब बिहार में एक नए राजनीतिक विकल्प की नींव रखी जा रही थी.
चंदे के पैसों से उठी थी 'समता' की आवाज
1990 के दशक में जब बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव हो रहे थे, तब नीतीश कुमार और उनके साथियों ने मिलकर 'समता पार्टी' का गठन किया था. उस वक्त पार्टी के पास न तो बड़ा फंड था और न ही कोई कॉर्पोरेट समर्थन. नीतीश आर्काइव के मुताबिक, उस दौर में समता पार्टी का पूरा खर्च उसके अपने नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के चंदे से चलता था. यह वो समय था जब साइकिलों और पैदल चलकर गांव-गांव पार्टी का विचार फैलाया जाता था और आम जनता अपने सामर्थ्य के अनुसार पार्टी को आर्थिक सहयोग देती थी.
ये 1990 का दशक था जब बिहार में समता पार्टी बनी थी, और पार्टी का खर्च नेताओं और कार्यकर्ताओं के चंदे से चलता था.
— Nitish Archive (@NitishArchive) May 29, 2026
रोहतास जिले के करगहर विधानसभा क्षेत्र से JDU के प्रदेश महासचिव संजय सिंह जी का नीतीश आर्काइव आभारी है जिन्होंने हमें समता पार्टी का यह सहयोग पत्र उपलब्ध करवाया है. हम… pic.twitter.com/jyi3hPr1xo
रोहतास के जेडीयू नेता ने सौंपा 30 साल पुराना 'सहयोग पत्र'
समता पार्टी के उसी संघर्ष काल का एक बेहद दुर्लभ दस्तावेज अब सामने आया है. रोहतास जिले के करगहर विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले जेडीयू के प्रदेश महासचिव संजय सिंह ने यह ऐतिहासिक 'सहयोग पत्र' (चंदे की रसीद) नीतीश आर्काइव को उपलब्ध कराया है. दशकों पुराने इस पत्र को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे छोटी-छोटी सहयोग राशियों को जोड़कर एक बड़ी राजनीतिक पार्टी को सींचा गया था. आर्काइव ने इस अनमोल धरोहर को साझा करने के लिए संजय सिंह का विशेष आभार जताया है.
'इतिहास को जिंदा रखने की मुहिम'- आम लोगों से की ये अपील
सिर्फ नेताओं के दस्तावेजों तक सीमित रहने के बजाय, 'नीतीश आर्काइव' ने अब इस मुहिम को एक जन-अभियान का रूप दे दिया है. पेज की ओर से आम जनता से एक खास अपील की गई है. इसमें कहा गया है कि अगर किसी के पास नीतीश कुमार के जीवन से जुड़ी कोई पुरानी स्मृति, रोचक कहानी, ऐतिहासिक घटना या कोई पुरानी तस्वीर हो, तो वे सीधे उनसे संपर्क करें. आर्काइव की टीम का मानना है कि यह प्रोजेक्ट किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि 'आप सभी के द्वारा, आप सभी के लिए और आप सभी का' एक सामूहिक प्रयास है, ताकि बिहार की राजनीति के इस महत्वपूर्ण इतिहास को हमेशा के लिए जिंदा रखा जा सके.
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