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जब चंदे के पैसों से चलती थी नीतीश कुमार की पार्टी, 'नीतीश आर्काइव' ने शेयर किया 90 के दशक का 'सहयोग पत्र'

1990 के दशक में जब बिहार में समता पार्टी का गठन हुआ था, तब उसका खर्च कैसे चलता था? 'नीतीश आर्काइव' ने संघर्ष के उन दिनों का एक दुर्लभ 'सहयोग पत्र' शेयर कर सियासत की पुरानी यादें ताजा कर दी हैं. जानिए इस ऐतिहासिक दस्तावेज की पूरी कहानी.

जब चंदे के पैसों से चलती थी नीतीश कुमार की पार्टी, 'नीतीश आर्काइव' ने शेयर किया 90 के दशक का 'सहयोग पत्र'
जेडीयू नेता ने खोला 30 साल पुराना पिटारा, सामने आया समता पार्टी के संघर्ष के दिनों का वो अनसुना किस्सा.
NDTV Reporter

Bihar News: बिहार की राजनीति में आज भले ही जेडीयू (JDU) का एक विशाल कुनबा और मजबूत ढांचा है, लेकिन इसके बीज बहुत गहरे संघर्षों के बीच बोए गए थे. नीतीश कुमार के उस सियासी सफर और संघर्षों को सहेजने के लिए बनाए गए नीतीश आर्काइव (Nitish Archive) ने एक बार फिर इतिहास के पन्नों से एक ऐसी अनमोल चीज निकाली है, जो मौजूदा दौर की राजनीति के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है. यह कहानी 1990 के उस दशक की है, जब बिहार में एक नए राजनीतिक विकल्प की नींव रखी जा रही थी.

चंदे के पैसों से उठी थी 'समता' की आवाज

1990 के दशक में जब बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव हो रहे थे, तब नीतीश कुमार और उनके साथियों ने मिलकर 'समता पार्टी' का गठन किया था. उस वक्त पार्टी के पास न तो बड़ा फंड था और न ही कोई कॉर्पोरेट समर्थन. नीतीश आर्काइव के मुताबिक, उस दौर में समता पार्टी का पूरा खर्च उसके अपने नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के चंदे से चलता था. यह वो समय था जब साइकिलों और पैदल चलकर गांव-गांव पार्टी का विचार फैलाया जाता था और आम जनता अपने सामर्थ्य के अनुसार पार्टी को आर्थिक सहयोग देती थी.

रोहतास के जेडीयू नेता ने सौंपा 30 साल पुराना 'सहयोग पत्र'

समता पार्टी के उसी संघर्ष काल का एक बेहद दुर्लभ दस्तावेज अब सामने आया है. रोहतास जिले के करगहर विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले जेडीयू के प्रदेश महासचिव संजय सिंह ने यह ऐतिहासिक 'सहयोग पत्र' (चंदे की रसीद) नीतीश आर्काइव को उपलब्ध कराया है. दशकों पुराने इस पत्र को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे छोटी-छोटी सहयोग राशियों को जोड़कर एक बड़ी राजनीतिक पार्टी को सींचा गया था. आर्काइव ने इस अनमोल धरोहर को साझा करने के लिए संजय सिंह का विशेष आभार जताया है.

'इतिहास को जिंदा रखने की मुहिम'- आम लोगों से की ये अपील

सिर्फ नेताओं के दस्तावेजों तक सीमित रहने के बजाय, 'नीतीश आर्काइव' ने अब इस मुहिम को एक जन-अभियान का रूप दे दिया है. पेज की ओर से आम जनता से एक खास अपील की गई है. इसमें कहा गया है कि अगर किसी के पास नीतीश कुमार के जीवन से जुड़ी कोई पुरानी स्मृति, रोचक कहानी, ऐतिहासिक घटना या कोई पुरानी तस्वीर हो, तो वे सीधे उनसे संपर्क करें. आर्काइव की टीम का मानना है कि यह प्रोजेक्ट किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि 'आप सभी के द्वारा, आप सभी के लिए और आप सभी का' एक सामूहिक प्रयास है, ताकि बिहार की राजनीति के इस महत्वपूर्ण इतिहास को हमेशा के लिए जिंदा रखा जा सके.

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लेखक के बारे में
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पुलकित मित्तल
Senior Sub Edtior
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