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कटिहार में नाबालिग बच्चों को गमछे से बांधकर लाया गया अस्पताल, वीडियो वायरल होने के बाद मचा बवाल

कटिहार बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अनुसार किसी भी बच्चे को इस तरह गमछे से बांधकर ले जाना पूरी तरह से गैरकानूनी है.

कटिहार में नाबालिग बच्चों को गमछे से बांधकर लाया गया अस्पताल, वीडियो वायरल होने के बाद मचा बवाल
  • कटिहार सदर अस्पताल में तीन नाबालिग बालकों को मेडिकल जांच के लिए गमछे से बांधकर लाया गया था.
  • बच्चों को ऑब्जर्वेशन होम से कटिहार लाते समय सुरक्षा कर्मियों की कमी के कारण हाथ गमछे से बांधे गए थे.
  • ऑब्जर्वेशन होम के कर्मचारियों ने बताया कि पुलिस बल कम होने से बच्चों के भागने का डर था इसलिए ऐसा किया गया.

बिहार के कटिहार सदर अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए तीन नाबालिग बालकों को गमछे से बांधकर लाया गया. ये बच्चे पूर्णिया बाल संरक्षण इकाई की गाड़ी से ऑब्जर्वेशन होम से कटिहार लाए गए थे. अस्पताल लाते समय तीनों बच्चों के हाथ आपस में गमछे से बंधे हुए थे. इस मामले में ऑब्जर्वेशन होम के कर्मियों से जब सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि सुरक्षा कर्मियों की कमी थी. उनका कहना था कि पुलिस बल कम होने के कारण बच्चों के भाग जाने का डर था, इसलिए सुरक्षा के लिए हल्के तौर पर उन्हें बांधकर लाया गया.

ऑब्जर्वेशन होम के कर्मचारी दिनेश कुमार ने बताया कि भीड़-भाड़ को देखते हुए और पर्याप्त पुलिस बल नहीं होने की वजह से ऐसा किया गया. उनका कहना था कि बच्चों को नुकसान पहुंचाने की कोई मंशा नहीं थी, केवल सुरक्षा के लिए ऐसा कदम उठाया गया. वहीं, इस पूरे मामले पर कटिहार बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अनुसार किसी भी बच्चे को इस तरह गमछे से बांधकर ले जाना पूरी तरह से गैरकानूनी है. कानून के मुताबिक बच्चों के साथ किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक क्रूरता अपराध है.

राजेश सिंह ने बताया कि ऐसे मामलों में संबंधित कर्मी या अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है. कानून में इसके लिए एक लाख रुपये तक जुर्माना और तीन साल तक की सजा का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल एक सार्वजनिक जगह है और वहां बच्चों को इस तरह बांधकर लाना संविधान के अनुच्छेद 21 का भी उल्लंघन है, जो हर व्यक्ति को सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को लेकर जेजे बोर्ड, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई, जिला अधिकारी और एनसीपीसीआर में शिकायत की जा सकती है और दोषियों पर कार्रवाई कराई जा सकती है.

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